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Country Uttarakhand

क्यों खाली नहीं कर रहे निशंक लुटियंस का बंगला

जुलाई 2021 में स्वास्थ्य कारणों के चलते उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रहे और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने अपने मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया था। तब से वह लुटियंस जोन के बंगला नंबर 27  सफदरजंग रोड को खाली करने को लेकर केंद्रीय संपदा निदेशालय के निशाने पर है। संपदा निदेशालय उन्हें बंगला खाली करने के लिए लगातार कई बार नोटिस भेज चुका है ।
आज भी संपदा निदेशालय की एक टीम निशंक से बंगला खाली कराने के लिए जाएगी। बावजूद इसके निशंक बंगला खाली करने को तैयार नहीं हो रहे हैं । जबकि नियम यह है कि जब भी कोई कैबिनेट मंत्री अपने पद से हटता है तो 1 महीने के अंदर उसे अपना बंगला खाली कर देना होता है। निशंक को संपदा निदेशालय ने नया बंगला दो तुगलक लेन पर आवंटित किया है । लेकिन वह वहां नहीं जा रहे हैं।
उधर, दूसरी तरफ इस बंगले पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की नजर लगी है। सिंधिया को केंद्रीय संपदा निदेशालय ने कैबिनेट मंत्री बनने के बाद तीन बंगला में से कोई एक में रहने का ऑप्शन दिया था। लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बाकी दो बंगले के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। वह उस बंगले में रहने की जिद पर अड़े है। जिसमें पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक रहते हैं।
इसके पीछे ज्योतिरादित्य सिंधिया तर्क दे रहे हैं कि सफदरजंग रोड के इस 27 नंबर बंगले में उनके पिता माधवराव सिंधिया वर्षों तक रहे। इस बंगले में उनके पिता की और उनके बचपन की यादें समाहित है। इसके चलते ही वह इसी बंगले को अपने लिए अलाट कराना चाह रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया फिलहाल आनंद लोक स्थित अपने निजी आवास में रह रहे हैं।
अब सवाल उठता है कि आखिर क्या वजह है कि निशंक केंद्रीय संपदा निदेशालय के नोटिस के बावजूद भी इस बंगले को खाली क्यों नहीं कर रहे हैं। क्या इस बंगले पर उनका अधिकारिक कब्जा बरकरार रह सकता है या चिराग पासवान की तरह उनसे भी जबरन बंगला खाली कराया जा सकता है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक के टाइप 8 बंगले को संपदा निदेशालय जबरन खाली नहीं करा सकता है । उसके पीछे एक कानूनी पेच बताया जा रहा है । पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के कार्यालय ने इस पर अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि लोकसभा सचिवालय के नियमों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, पूर्व राज्यपाल और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष में से यदि कोई सांसद दो अर्हताएं रखता हो तो वह टाइप 8 बंगले में रहने का हकदार है। निशंक पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं तथा लोकसभा सचिवालय ने उन्हें टाइप 8 मकान के लिए अधिकृत किया है। वह पहले से ही इस श्रेणी के मकान में रह भी रहे हैं।
 गौरतलब है कि 1 दिन पहले ही बिहार के सांसद चिराग पासवान का जबरन बंगला खाली करा लिया गया। चिराग पासवान इस बंगले पर इस वजह से अपना अधिकार जता रहे थे कि वहां उनके पिता दिवंगत कैबिनेट मंत्री रामविलास पासवान वर्षों तक रहे थे। चिराग पासवान ने बंगले को अपने नाम पर बनाए रखने की अपील की थी। लेकिन संपदा निदेशालय ने उनकी इस मांग को अस्वीकार कर दिया।
इस समय लोकसभा सदस्यों के लिए कुल 517 घर हैं। जिनमें टाइप-आठ बंगलों से लेकर छोटे फ्लैट तक हैं। इसके अलावा हॉस्टल भी हैं। लोकसभा सदस्यों के लिए रिहाइशी ठिकानों में इस समय 159 बंगले, 37 ट्विन फ्लैट, 193 सिंगल फ्लैट, 96 बहुमंजिला इमारतों में फ्लैट और 32 इकाइयां रेगुलर ठिकानों की हैं।  ये सारे आवास सेंट्रल दिल्ली के नार्थ एवेन्यू, साउथ एवेन्यू, मीना बाग, बिशम्बर दास मार्ग, बाबा खड़क सिंह मार्ग, तिलक लेन और विट्ठल भाई पटेल हाउस में हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक को जो टाइप 8 बंगला मिला हुआ है वह बंगला सबसे उच्च श्रेणी का माना जाता है। यह लगभग तीन एकड़ का होता है। इन बंगलों की मुख्य बिल्डिंग में 8 कमरे (5 बेडरूम, 1 हॉल, 1 बड़ा डाइनिंग रूम और एक स्टडी रूम) होते हैं। इसके अलावा इस बंगले के कैम्पस में एक बैठकखाना और बैकसाइड (कैम्पस के अंदर ) में एक सर्वेन्ट क्वार्टर भी होता है।
नियमों के तहत टाइप 8 बंगला कैबिनेट मंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और वरिष्ठतम नेताओं को आवंटित किया जाता है। दिल्ली में टाइप 8 बंगले जनपथ, त्यागराज मार्ग, कृष्णमेनन मार्ग, अकबर रोड, सफदरजंग रोड, मोतीलाल नेहरू मार्ग और तुगलक रोड पर स्थित हैं।

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