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देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने अपने 139 वें स्थापना दिवस के दिन रैली के लिए नागपुर को चुना। ये शहर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का गढ़ कहा जाता है। नागपुर में कांग्रेस की इस रैली को लोकसभा चुनाव के लिए शंखनाद माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी देश को ये संदेश देना चाहते हैं कि हाल ही में हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में मिली हार के बाद भी पार्टी का मनोबल गिरा नहीं है और वो 2024 के चुनाव के लिए पूरी तैयार हैं।

नागपुर में हुई कांग्रेस की ये रैली पूरे देश में सुर्खियां बन गई, क्योंकि आरएसएस के गढ़ से कांग्रेस ने हुंकार भरी है। ऐसे में सवाल है कि आखिर नागपुर से ही कांग्रेस ने आगामी चुनाव का शंखनाद क्यों किया? यहां तक कि जिस मैदान में कांग्रेस की इस मेगा रैली का आयोजन किया गया उस ग्राउंड का नाम भारत जोड़ो ग्राउंड रखा गया। खास बात ये है कि महाराष्ट्र के जिस मैदान में कांग्रेस ने अपने139 वें स्थापना दिवस के दिन लाखों लोगों की भीड़ जुटाई, वहां से आरएसएस का मुख्यालय सिर्फ 6.5 किलोमीटर दूर है। लोगों के मन में सवाल है कि राहुल गांधी ने रैली के लिए आखिर नागपुर को ही क्यों चुना? क्या राहुल गांधी ये बताना चाहते हैं वो आरएसएस के गढ़ में घुसकर चुनौती देंगे? राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नागपुर किसी और का नहीं कांग्रेस का गढ़ है। नागपुर में सिर्फ आरएसएस का मुख्यालय ही नहीं है। इस शहर में ऐतिहासिक स्थल दीक्षाभूमि भी है।

दीक्षाभूमि में ही डॉ बीआर आंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था। कांग्रेस संदेश दे रही है कि वो वहां से चोट करना चाहती है जहां से बीजेपी के लिए एजेंडा तय होता है और बीजेपी इसका अपने ही अंदाज में जवाब दे रही है। राहुल गांधी का नागपुर से चुनावी रैली कितनी लंबी लकीर खींच पाती है इसके लिए तो काफी इंतजार करना पड़ेगा, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि नागपुर से लोकसभा चुनाव का शंखनाद करके कांग्रेस कैडर का मनोबल बढ़ाने में वो कामयाब जरूर हुए हैं। नागपुर को कांग्रेस अपना गढ़ क्यों बता रही है, उसे समझने की जरूरत है। 1952 से अब तक नागपुर लोकसभा सीट पर 18 बार चुनाव हुए हैं और इनमें 13 बार कांग्रेस की जीत हुई है। बीजेपी ने तीन बार नागपुर लोकसभा सीट पर चुनाव जीता है।

वर्ष 2014 से लगातार दो बार नितिन गडकरी के नागपुर से जीत दर्ज करने के बाद नागपुर बीजेपी का गढ़ माने जाना लगा। हालांकि वो शहर नागपुर ही था जब इमरजेंसी के ठीक बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रैली की थी और विदर्भ रीजन की सारी सीटें कांग्रेस ने जीत ली थीं। इसलिए राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में नागपुर से 2024 के चुनावी कैंपेन का आगाज करने के पीछे सिर्फ आरएसएस फैक्टर नहीं है। कांग्रेस महाराष्ट्र के उस हिस्से को और मजबूत करना चाहती है जो उसके लिए बड़ी ताकत साबित होता रहा है। दूसरा ये कि उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र वो राज्य है जहां सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें हैं। इसलिए महाराष्ट्र को कांग्रेस और मजबूत करना चाहती है। दूसरी तरफ पूरे देश में इस वक्त 22 जनवरी को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की चर्चा है। रामलला की मूर्ति कैसी होगी, कार्यक्रम कितना भव्य होगा, रामलला का दरबार कैसा होगा? राम भक्त इन सवालों के जवाब के लिए 22 तारीख का इंतजार कर रहे हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी इसे भुना रही है।

वह देश को बता रही है कि मंदिर को लेकर किया वायदा बीजेपी ने पूरा कर दिया है। बीजेपी इसे आजाद भारत की सबसे बड़ी घटना के तौर पर पेश करने का प्लान बना रही है। वहीं राम मंदिर की काट में राहुल गांधी ने भारत न्याय यात्रा शुरू करने का ऐलान किया है और खास बात ये है कि राहुल गांधी भारत न्याय यात्रा राम मंदिर समारोह से ठीक पहले शुरू करने जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि करीब एक साल पहले राहुल गांधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की थी। राहुल गांधी ने इसका आगाज दक्षिण से किया था और कन्याकुमारी से चलकर 136 दिन बाद कश्मीर तक का सफर तय किया था। इस यात्रा को राहुल के राजनीतिक करियर में एक बड़ी उपबल्धि के तौर पर गिना गया और अब ठीक एक साल बाद राहुल ने लोकसभा चुनाव से पहले यात्रा पार्ट टू के तौर पर भारत न्याय यात्रा का ऐलान किया है। जो 14 जनवरी को पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर से शुरू होगी और 67 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के जरिए लगभग 6200 किलोमीटर का सफर तय किया जाएगा। राहुल की भारत न्याय यात्रा 14 राज्य और 85 जिलों से होते हुए गुजरेगी। ये यात्रा मणिपुर, नागालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, यूपी, एमपी, राजस्थान, गुजरात और आखिर में महाराष्ट्र पहुंचेगी।

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