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वेस्ट यूपी में दलितों पर क्यों बढ़ रहा अत्याचार 

केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में दलितों के खिलाफ अत्याचार के सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में ही दर्ज होते हैं।  2018 से 2020 के दौरान पूरे देश में दलितों पर अत्याचार के 1.3 लाख से भी ज्यादा मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 36,467 मामले अकेले उत्तर प्रदेश के है। उत्तर प्रदेश की रीढ़ कहे जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही पिछले एक पखवाड़े में दलितों पर अत्याचार के तीन मामले सामने आए है।  यह जब है तब इस बार के विधानसभा के चुनावों में दलित वोटर्स अपने चिर परिचित दल बहुजन समाज पार्टी में न जाकर भाजपा को शिफ्ट हुआ है। भीम आर्मी के संस्थापक आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्र शेखर आजाद ने तो इन घटनाओं पर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार को यह कहकर कठघरे में खड़ा कर दिया है कि यह मोदी और योगी के रामराज्य की एक झलक है। 
 
 
 
 पश्चिमी यूपी के बुलंदशहर को ही ले यहां 25 अप्रेल को एक बारात निकली। इस बारात में बाराती से ज्यादा पुलिस और पीएसी के जवान थे। दूल्हा घोड़ी पर था। अगल-बगल इंसास राइफल लिए हुए पीएसी के जवान चल रहे थे । चौकाने वाली बात यह है कि बारात की सुरक्षा में दो बटालियन पीएसी और 3 थानों की फोर्स को तैनात किया गया था। इस दौरान पूरे गांव में सन्नाटा दिख रहा था । बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद तहसील के जिस गढ़ना गांव में सुरक्षा में यह बारात निकली, वहां आजादी के बाद पहली बार दलित दूल्हे की घुड़चढ़ी हुई है। इसके पीछे की वजह यह बताई जा रही है कि यह गांव ठाकुर बाहुल्य है। यहां 70 प्रतिशत आबादी ठाकुरों की है। इस गांव में 5 दर्जन पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में जिस दलित दूल्हे की बारात निकली उसका नाम गौरव है। वह सीआरपीएफ  में तैनात है और फ़िलहाल झारखंड में पोस्टेड है। 
 
 
25 अप्रेल को उसकी बारात धूमधाम से गांव से निकली। बारात निकलने से पहले ही गांव में सारी रस्मेंपूरी भी की गईं। इस दौरान घोड़ी चढ़ते हुए दूल्हे गौरव की खुशी का ठिकाना नहीं था। आखिरकार उसका सपना जो पूरा हो गया। दरअसल ,  8 महीने पहले गांव में अजय नाम के एक दलित युवक ने घुड़चढ़ी करके बारात निकालने का प्रयास किया था । लेकिन उच्च जाति के लोगो को यह पसंद नहीं आया और अजय की बारात पर पथराव हो गया। कई पत्थर दूल्हे अजय को भी लगे जिससे उसकी उसकी मौत हो गई। इसके बाद गढ़ना गांव में फिर से कोई दलित दूल्हा घुड़चढ़ी की हिम्मत नहीं जुटा पाया था। जिस दलित की भी शादी होती थी वह गांव के बाहर तक पैदल ही जाता था और इस तरह उसका घोड़ी चढ़ने का सपना अधूरा ही रह जाता था। 
 
 दूसरा मामला 9 मई का है। मुजफ्फरनगर जिले के चरथावल थाना क्षेत्र के पावती खुर्द गांव की एक घटना हर किसी के मोबाइल में दिखाई दे रही है।. गांव के पूर्व प्रधान  राजबीर त्यागी ने गांव में रहने वाले दलितों के घर के आगे मुनादी करवाई और कहलवाया कि दलितों का उनके खेत में और उनके ट्यूबवेल पर प्रवेश वर्जित है। यही नहीं बल्कि मुनादी में उसने यह भी कहलवाया कि आदेश का उल्लंघन करने वाले दलित को पांच हजार रुपये जुर्माना और 50 जूतों की सजा मिलेगी।  सोशल मीडिया यह मुनादी का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रही इस मुनादी में कुंवरपाल नाम के एक व्यक्ति को ढोल बजा कर यह घोषणा करते हुए सुना जा सकता है। बताया जाता है कि राजबीर त्यागी गैंगस्टर विक्की त्यागी का पिता है। विक्की को एक विरोधी गिरोह के सदस्य ने 2015 में गोली मार दी थी लेकिन उसकी दहशत अभी भी लोगो के दिलों में कायम है। 
 
 
एक दिन पहले ही इस मुनादी का वीडियो भीम आर्मी के संस्थापक और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्र शेखर आजाद ने ट्विट्टर पर अपलोड किया है।  जिसमे उन्होंने कहा है कि हिंदू बनने का जिनको शौक चढ़ा था, उन्हें अब समझ आ गया होगा…ये है मोदी और योगी के रामराज्य की एक झलक। यहां यह भी बताना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश में कुछ ही महीनों पहले विधानसभा चुनाव हुए थे। इसमें दलितों का वोट अपने परंपरागत दल बसपा की बजाय भाजपा को मिलने की बात कही गई। माना जा रहा है कि आजाद का तंज उन दलितों को एक इशारा करना भी है जिन्होंने बीजेपी को वोट दिया। 
 
 
 
 
तीसरी घटना 10 मई यानि कल की है। मेरठ के सरधना क्षेत्र के सरूरपुर थाना के हसनपुर-रजापुर गांव में देर रात दलित दूल्हे के घोड़ी चढ़ने के दौरान कुछ लोगों ने दूल्हे को घोड़ी से उतार कर उसके साथ मारपीट कर दी। बीच-बचाव करने आए रिश्तेदारों को भी लाठी-डंडों से दौड़ाकर पीटा गया। हालाँकि इस मामले को लेकर पीड़ित पक्ष की ओर से कार्रवाई के लिए तहरीर दी गई है। पुलिस ने भी मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। जबकि बुलंदशहर की तरह ही यहां भी पुलिस की मौजूदगी में घुड़चढ़ी की रश्म कराई गई। 
 
 
 
 
बताया जाता है कि गांव हसनपुर राजापुर निवासी दलित समाज से आने वाले सचिन पुत्र जसवीर सिंह की 10 मई को शादी थी, देर रात घुड़चढ़ी की जा रही थी। घुड़चढ़ी के दौरान उसके रिश्तेदार व परिवार की महिलाएं आदि घुड़चढ़ी में चल रही थी। इसी दौरान दूसरे पक्ष के गांव के ही मोनू,प्रमोद व श्यामू सहित कई लोगो ने दूल्हे को घुड़चढ़ी से उतार कर अपमानित करते हुए जाति सूचक शब्द कहे और मारपीट शुरू कर दी। हमलावरों ने दूल्हे के कपड़े तक फाड़ दिए। यही नहीं बल्कि जब विरोध किया गया तो विरोध करने पर दूल्हे के रिश्तेदार और परिवार की महिलाओं तक को लाठी-डंडों से दौड़ा दौड़ाकर पीटा गया। 
 
 
 
अखिल भारतीय अंबेडकर महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष विध्या गौतम कहती हैं कि आजादी के बाद दलितों को समानता का अधिकार मिला था तब लगने लगा था कि दलित अब उच्च वर्ग के साथ बैठ सकेंगे। यह हुआ भी। लेकिन जब से भाजपा सरकार आई है। तब से इस सरकार का एजेंडा ही धर्म से शुरू होता है। धर्म के अंदर ही जाति आती है। भाजपा की राजनीति धर्म और जाति पर चलती है। इस पार्टी के जनप्रतिनिधियों की मानसिकता ऐसी ही हैं जिससे दलितों पर आये दिन अत्याचार की घटनाएं घट रही है।

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