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संदेशखाली में सामप्रदायिक तनाव क्यों?

पश्चिम बंगाल में नॉर्थ 24 परगना जिले में संदेशखाली यौन उत्पीड़न मामले को लेकर काफी समय से बवाल मचा हुआ है। बीजेपी कार्यकर्ता तथा वहां के लोगों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पुलिस ने उन्हें जाने से रोक दिया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच काफी झड़प हुई। अधीर रंजन को जब रोका गया तो वे रामपुर में ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि संदेशखाली की असली घटना क्या है? संदेशखाली मामले को हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक घटना के रूप में दिखाने की कोशिश की जा रही है। आरोप है कि ममता बनर्जी ने वहां पर आपराधियों को सह दे रखी है। भाजपा सांसद सुनीता दुग्गल के अनुसार बंगाल में अपराधियों को सह मिल रही है। उन्होंने संदेशखाली में पीड़ित महिलाओं से वीडियो कॉल पर बात की। वहां महिलाएं कह रही थी, पुलिस ने लाठीचार्ज किया है। हम बंगाल के गवर्नर से मिलेंगे और उन्हें पूरी जानकारी देंगे।

बीजेपी ने 4 सांसदों की कमेटी का गठन किया था। जिसमें केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी कमेटी की संयोजक हैं। केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक और 4 भाजपा सांसद- सुनीता दुग्गल, कविता पाटीदार, संगीता यादव और बृजलाल सदस्य हैं। कमेटी अब नड्डा को संदेशखाली मामले में रिपोर्ट सौंपेगी। संदेशखाली में महिलाओं ने तृणमूल कांग्रेस टीएमसी नेता शेख शाहजहां और उसके साथियों पर यौन उत्पीड़न, हिंसा और जमीन हड़पने के आरोप लगाए हैं। एक महीने पहले ईडी ने राशन घोटाले में टीएमसी के नेता शाहजहां के ठिकानों पर छापा मारा था। इस दौरान ईडी टीम पर हमला हुआ। तब से शाहजहां शेख फरार है। उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया जा चुका है। शाहजहां की गिरफ्तारी की मांग को लेकर संदेशखाली में बीते एक हफ्ते से विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। भाजपा के नेता और कार्यकर्ता पीड़ितों से मिलने भी गए थे। इस दौरान वहां पर धारा 144 लागू है।

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