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गवर्नर की सख्ती के बाद भी क्यों नहीं सामने आ रहे मध्य प्रदेश के 22 बागी विधायक

गवर्नर की सख्ती के बाद भी क्यों नहीं सामने आ रहे MP के 22 बागी विधायक

मध्य प्रदेश के गवर्नर लालजी टंडन ने कल कांग्रेस के 22 बागी विधायकों को चेतावनी दी गई थी कि वह उनके सामने आकर पेश हों नहीं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद भी कांग्रेस के बागी विधायकों पर गवर्नर के आदेशों का कोई असर होता नहीं दिख रहा है। मध्य प्रदेश के गवर्नर लालजी टंडन ने सख्ती भरे लहजे में कहा था कि इस्तीफा देने वाले सात विधायक शुक्रवार को हर हालत में उनके सामने पेश हो। यही नहीं बल्कि आज ज्योतिरादित्य सिंधिया के द्वारा राज्यसभा का नामांकन करने के दौरान इन विधायकों के उपस्थित होने के पूरे-पूरे आसार थे। लेकिन विधायक आज बेंगलूर से वापिस नहीं पहुंचे।

कांग्रेस के बागी विधायकों के भोपाल में न पहुंचने पर सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी को मायूसी हाथ लगी है। कहा जा रहा था कि कांग्रेस के बागी विधायक जब भोपाल ज्योतिरादित्य सिंधिया के पर्चा दाखिल करने के दौरान उपस्थित होंगे तो उन्हें मनाने की भरपूर कोशिश की जाएगी। बताया जा रहा है कि इसके लिए कांग्रेस ने पूरी तैयारी कर ली थी ।

जबकि दूसरी तरफ एमपी के सीएम कमलनाथ को प्रदेश के गवर्नर लाल जी टंडन के इस आदेश में भी अपनी जीत नजर आ रही थी। जिसमें उन्होंने बागी विधायकों को चेतावनी दी और कार्रवाई करने का स्पष्ट आदेश किया था। लेकिन लगता है कि कांग्रेस के बागी विधायकों को गवर्नर का भी डर नहीं है।

उधर दूसरी तरफ आज प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ गवर्नर लालजी टंडन से मिले। उन्होंने टंडन से करीब एक घंटा मुलाकात की। इस दौरान कमलनाथ ने गवर्नर लालजी टंडन को तीन पेज की एक चिट्ठी सौंपी और भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि वह फ्लोर टेस्ट कराने को तैयार हैं बशर्ते की पहले 22 विधायकों को भाजपा की कैद से मुक्त कराया जाए।

दूसरी तरफ 16 मार्च से शुरू हो रहे मध्य प्रदेश के विधानसभा सत्र को भाजपा स्थगित कराने के लिए राजनीतिक पैतरेबाजी पर उतर आई है। प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री गोविंद सिंह ने विधानसभा को स्थगित करने के पीछे कोरोना वायरस को आधार बताया है। उन्होंने विधानसभा के अध्यक्ष एनपी प्रजापति को एक पत्र लिखा है और कहा है कि कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए बजट सत्र स्थगित किया जाए। जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बेंगलुरु में सिंधिया गुट के विधायकों के कोरोना वायरस से संक्रमण की आशंका जताई है और उनके टेस्ट कराने की मांग की है।

बताया जा रहा है कि बजट सत्र के पहले दिन गवर्नर के अभिभाषण के दौरान विपक्ष अगर हंगामा करता है तो स्पीकर सख्त फैसले ले सकते हैं। उधर कांग्रेस बेंगलुरु से विधायकों के आने पर उनके परिजन और क्षेत्र के लोगों को सामने रख सकती है। ताकि वह यह सोचने पर मजबूर हो जाए कि दोबारा चुनाव में जाते हैं तो उनके सामने क्या दिक्कत आ सकती है।

कांग्रेस को ये भी लगता है कि भाजपा सिंधिया समर्थक विधायकों को अगर सदन से गैर-हाजिर रखना चाहती है तो वह उन्हें आगामी मध्यावधि चुनाव में हराने का डर दिखा सकते हैं। बहरहाल, अगर सिंधिया खेमे के कांग्रेस के 22 बागी विधायक नहीं आते हैं तो और उनका इस्तीफा मान्य नहीं होगा। ऐसे में सदन की कार्रवाई चलती रहेगी। तब कांग्रेस सरकार को खतरे से बाहर निकलने का मौका भी मिल जाएगा।

इस तरह कांग्रेस ने भाजपा को जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है। कांग्रेस का फिलहाल पहला कदम यह होगा कि भाजपा जब तक बेंगलुरु में रखे गए 22 बागी विधायकों को पेश नहीं करती हैं तब तक कांग्रेस सदन में फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार नहीं होगी। फिलहाल कमलनाथ सरकार इस जिद पर अड़ी रहकर विपक्षी भाजपा के लिए मुश्किल खडी कर सकती है।

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