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कौन होगा अगला मुख्यमंत्री ?

महराष्ट्र विधानसभा 2019 में BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। बीजेपी को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला है। किसी भी दल को पूर्ण बहुमत के लिए 145 सीटें चाहिए, पर बीजेपी पार्टी को सिर्फ 105 ही मिलीं। वैसे, पिछली बार के चुनाव में यह आंकड़ा 122 था। वह भी अकेले। यानी इस बार सीटें बढ़नी चाहिए थीं, पर उल्टा ये घट गईं। चूंकि, शिवसेना को इस बार 56 सीट मिलीं और सरकार बनाने के लिए बीजेपी को उसका समर्थन चाहिए होगा, इसलिए बीजेपी पार्टी को उद्धव ठाकरे के दल की बातें माननी पड़ सकती हैं। इस चुनाव में भाजपा के कुल नौ मंत्रियों को हार मिली। इनमें सात कैबिनेट मंत्री हैं और 2 राज्य मंत्री. सबसे बड़ा नाम- पंकजा मुंडे का है। रोचक बात है कि वह चचेरे भाई धनंजय मुंडे से ही हार गई वह भी तब, जब वह सीएम देवेंद्र फडणवीस की सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं. और, पीएम मोदी और अमित शाह तक ने उनके लिए प्रचार-प्रसार किया था। दरअसल, विधान सभा चुनाव से पहले कांग्रेसी-NCP के नेता बीजेपी-शिवसेना में आए थे, पर इन 35 दल-बदलुओं में से 19 हार गए बड़े नाम- जयदत्त सागर और वैभव पिचड़ आदि हैं। यही नहीं, विधानसभा चुनाव के साथ सतारा लोकसभा सीट पर उपचुनाव भी हुआ, जिसमें शिवाजी महाराज के वंशज उदयानंद भोंसले भी हार गए। वह चुनाव से पहले NCP से बीजेपी में आए थे। भगवा दल ने सोचा था कि वह जीतेंगे पर, हुआ उल्टा। बीजेपी का गढ़ माना जाने वाले विदर्भ इलाके में बीजेपी की सीटें गिरीं। इस बार पार्टी को 29 सीट मिलीं, जबकि 2014 में 44 सीटें आई थीं।  इस क्षेत्र में कुल 62 सीटें हैं। देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी समेत कई बड़े नेता इसी इलाके से आते हैं। खुद सीएम नागपुर की जिस सीट से लड़े, वहां वह कम अंतर से जीत सके। इतना ही नहीं, इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू भी खासा नहीं कारगर साबित हुआ। दरअसल, सूबे में उन्होंने नौ जगह चुनावी सभाएं कीं, जिनमें तीन पर बीजेपी के कैंडिडेट्स हार गए।
शिवसेना के नेता संजय राउत ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के अपने कॉलम ‘रोक-टोक’ में लिखा, ‘‘2014 में शिवसेना ने 63 सीटें जीती थीं, जो इस बार 56 रह गईं। इसके बावजूद सत्ता का रिमोट कंट्रोल शिवसेना के पास है।’’ सामना के एग्जिक्यूटिव एडिटर संजय राउत ने लिखा, ‘‘1995 से 1999 के दौरान शिव सेना और बीजेपी के बीच पहली बार गठबंधन हुआ था। उस दौरान बाल ठाकरे ‘रिमोट कंट्रोल’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर करते थे। अगर शिव सेना हमेशा बीजेपी के पीछे चलती रही तो उसका सपना अधूरा रह जाएगा। कार्टून में टाइगर को अपने हाथ में कमल थामे दिखाया गया है, जो वर्तमान स्थिति बयां करता । महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे 24 अक्टूबर को घोषित किए गए। इनमें बीजेपी ने 105 सीटें जीतीं, जबकि शिवसेना के खाते 56 सीटें गई थी। नतीजे घोषित होने के साथ ही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बीजेपी की नई सरकार में 50-50 फॉर्म्यूला लागू करने की मांग की थी । वहिं संजय राउत ने कहा, ‘‘बीजेपी ने 164 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 144 सीटें जीतने का टारगेट रखा था, जिसे वोटर्स ने नकार दिया। चुनाव परिणाम प्रमुख कांग्रेस-एनसीपी नेताओं के बीजेपी में शामिल होने से बढ़ रहे अनैतिक विचारों की हार है।’’

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