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कहा गायब हो गए ‘बात बिहार की’ करने वाले ‘PK’ प्रशांत किशोर ?

वर्ष 2019 में फोर्ब्स मैगजीन ने दुनिया के टॉप-20 निर्णायक लोगों की एक सूची जारी की थी। सूची में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर को अगले दशक का निर्णायक चेहरा बताया गया था। सूची में कन्हैया कुमार 12वें स्थान पर जगह बना सके थे जबकि प्रशांत किशोर 16वें पायदान पर रहे। प्रशांत किशोर के बारे में मैगजीन ने लिखा, वो भविष्य में भारतीय राजनीति में शक्तिशाली पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

साथ ही फ़ोर्ब्स ने यह भी कहा था कि प्रशांत किशोर वर्ष 2011 से एक राजनीतिक रणनीतिकार हैं, जिन्होंने बीजेपी को गुजरात विधानसभा चुनाव जीतने में मदद की और 2014 में नरेंद्र मोदी के चुनाव अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

 

 

आज से ठीक पांच साल पहले बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर वीआईपी बने हुए थे। चुनाव नतीजे आये तो मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को जेडीयू में उपाध्यक्ष बनाकर नंबर दो की पोजीशन दे डाली। यही नहीं बल्कि नीतीश कुमार ने कहा कि प्रशांत किशोर पार्टी का भविष्य हैं। भविष्य तो नहीं लेकिन भविष्यवाणी बहुत टिकाऊ नहीं रही। एक वक्त ऐसा आया कि नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को जेडीयू से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

जेडीयू से बाहर होने के बाद प्रशांत किशोर ने सात माह पहले 18 फरवरी को एक प्रेस कांफ्रेंस की। जिसमे उन्होंने ” बात बिहार की ” नामक कार्यक्रम की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि बात बिहार की के जरिए मैं ऐसे लोगों को जोड़ना चाहता हूं जो बिहार को अग्रणी राज्यों की दौर में शामिल करना चाहते हैं, जो लोग बिहार को अगले 10 सालों में टॉप 10 राज्यों में देखना चाहते हैं। वह इस कार्यक्रम से जुडेंगे।

 

 

उन्होंने साफ किया था कि जब तक जीवित हूं बिहार के लिए पूरी तरह समर्पित हूं, मैं कहीं नहीं जाने वाला हूं। मैं आखिरी सांस तक बिहार के लिए लड़ूंगा। अब जब आम लोग उनके कार्यक्रम से भारी संख्या में जुड़ रहे हैं तो इससे यह बात साफ हो जाती है कि बिहार की जनता को प्रशांत किशोर के रूप में एक नया विकल्प मिल गया है। प्रशांत किशोर पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ेंगे और न ही किसी गठबंधन में शामिल होंगे।

जेडीयू के पूर्व उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार के रूप में अपनी रणनीति का लोहा मनवा चुके प्रशांत किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था । अलग-अलग चुनावों में अलग-अलग नीतियों वाली पार्टियों के लिए लुभावने नारे गढ़ने वाले चुनावी प्रबंधक प्रशांत किशोर ने तब ऐलान किया था कि वह कोई नया दल नहीं बनाने जा रहे हैं, वह सिर्फ बिहार में बदलाव के लिए काम करेंगे

 

 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उन्होंने ‘पितातुल्य’ बताया था और कहा था कि उनका हर फैसला उन्हें मंजूर है। हालांकि इसके तुरंत बाद ही वह नीतीश सरकार के 15 साल के शासनकाल की कमियां भी गिनाने लगे थे। प्रशांत किशोर के इस कार्यक्रम को लोगो ने हाथो हाथ लिया और देखते ही देखते पहले दिन में ही तीन लाख लोग बात बिहार की से जुड़ गए।

वहीं भाजपा के साथ सरकार बनाने को लेकर भी उन्होंने नीतीश पर सवाल उठाए थे। तब  जेडीयू ने पलटवार करते हुए कहा था कि प्रशांत किशोर की ऐसी हैसियत नहीं की वो सवाल खड़े कर सके और जेडीयू इसका जबाव दे। इसके बाद बिहार के लोगो को बड़ी उत्सुकता बढ़ी कि प्रशांत किशोर इस कार्यक्रम के जरिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर क्या नया हमला बोलते हैं और सरकार पर क्या-क्या सवाल खड़े करते हैं।

 

 

लेकिन उसके बाद प्रशांत किशोर बिहार के राजनितिक परिदृश्य से गायब नजर आने लगे। हालाँकि सोशल मीडिया पर बात बिहार की जरूर हो रही है।  याद रहे कि  ‘बात बिहार की’ के फेसबुक पेज पर 9 लाख 32 हज़ार लाइक है, इंस्टाग्राम पर 31 हज़ार फॉलोवर्स और ट्विटर पर 18 हज़ार 500 फ़ॉलोअर्स हैं।

बिहार का एक बड़ा वर्ग प्रशांत किशोर को ‘बिजनेस मैन’ मानता है। राज्य की राजनीति की गहरी समझ रखने वाले चुनावी पंडित तो ये भी मानते हैं कि बिहार को लेकर उन्होंने गलत आंकलन किया। बिना सोचे-समझे मोर्चा खोल दिया और जब सब बिखरता हुआ तो दिखा तो निकल गए।वजह चाहे जो भी हों, लेकिन इतना साफ है कि जब बिहार में चुनावी दंगल का मैदान तैयार हो रहा है, तो दंगल लड़ाने और जिताने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर गायब हैं।

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