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कब-कब हुई अयोध्या विवाद में सुलह-समझौते की कोशिश

 

बहरहाल राम मंदिर का मुद्दा पहली बार अंग्रेजी हुकूमत के वक्त आज से करीब 206 साल पहले उठा था। यहां आप जान सकते हैं कि इस मामले में अब तक क्या कुछ हुआ है।

1986:  शंकराचार्यों ने इस विवाद को बातचीत से सुलझाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए।

  • वर्ष 1990-91:  तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शरद पवार और राजस्थान के मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत की मध्यस्थता में बात कराई।
  • वर्ष1992: पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में इस विवाद को फिर सुलह-समझौते से हल करने की कोशिश हुई। मंत्री सुबोधकांत सहाय की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई, लेकिन यह भी विफल रही।
  • वर्ष 2002:  अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में प्रधानमंत्री कार्यालय में अयोध्या प्रकोष्ठ बनाया गया। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को तैनात करके कई बार सुलह का प्रयास कराया, लेकिन यह भी सफल नहीं हुआ।
  • वर्ष 2003:  जून महीने में कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की बात कही थी। शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने 1998 से 2004 के दौरान भाजपा सरकार के समय मध्यस्थ की भूमिका निभाने की बात कही थी।
  • वर्ष 2010:  सितंबर महीने में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के तत्कालीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्मवीर शर्मा ने कहा कि सुलह के लिए प्रयास करने में कोई हर्ज नहीं है। इस पर भी बातचीत का सुझाव आगे नहीं बढ़ सका।
  • वर्ष 2010 से 2016: सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति पलोक बसु ने इस विवाद को अदालत के बाहर मिल बैठकर सुलझाने की कई साल तक कोशिश की। इसमें हिंदू-मुस्लिमों के 10 हजार हस्ताक्षरयुक्त पत्र सुप्रीम कोर्ट में पेश भी किए गए हैं।
  • वर्ष 2016- मई महीने में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने हाशिम अंसारी के साथ मुलाकात की। बातचीत आगे बढ़ती इसके पहले ही अंसारी का निधन हो गया।
  • वर्ष 2017- 21 मार्च को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पेशकश की चीफ जस्टिस जे एस खेहर ने कहा है कि अगर दोनों पक्ष राजी हो तो वो कोर्ट के बाहर मध्यस्थता करने को तैयार हैं।
  • वर्ष 2017: 16 नवंबर को आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता करने की कोशिश की, उन्होंने कई पक्षों से मुलाकात की। हालांकि रविशंकर की पहल का कोई हल नहीं निकला था।
  • 8 मार्च 2019:  सेवानिवृत न्यायाधीश एफएमई कलीफुल्ला के नेतृत्व में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल गठित। श्रीश्री रविशंकर व श्रीराम पंचू सदस्य।
  • 155 दिन तक चली सुनवाई:  नहीं निकला कोई हल। पैनल भंग। 6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में चल रही  सुनवाई।

 

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