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क्या हैं राहुल गांधी की बंगाल से दूरी की मजबूरी?

पश्चिमी बंगाल  विधानसभा चुनाव में तीन चरणों का मतदान खत्म हो चुका है कल चौथे चरण के लिए वोट पडनी है। कल शाम इस चरण के लिए भी चुनाव प्रचार थम गया है। परंतु, बंगाल में अब तक कांग्रेस के एक भी बड़े नेता का पदार्पण नही हो सका है। खासकर राहुल गांधी का अब तक बंगाल चुनाव से दूर रहना चर्चा का विषय बना हुआ है।
बंगाल की सियासत में यह चर्चा आम है कि आखिर राहुल गांधी की बंगाल के विधानसभा चुनाव से दूरी की मजबूरी क्या है। वह जानबूझकर नहीं आ रहे हैं या किसी पार्टी विशेष को फायदा पहुंचा रहे हैं। हालाकि राजनीतिक पंडितों की माने तो राहुल गांधी और कांग्रेस के किसी बड़े नेता का पश्चिम बंगाल चुनाव में न आने का कारण ममता बनर्जी को फायदा पहुंचाना बताया जा रहा है। राहुल गांधी देश के पांच राज्यों के चुनाव में उधर केरल , तमिलनाडु और असम में चुनाव प्रचार में पूरा जोर लगा रहे थे। हालांकि 6 अप्रैल को पश्चिम बंगाल को छोड़कर बाकी अन्य चार राज्यों में चुनाव संपन्न हो चुके हैं। लेकिन अभी भी राहुल गांधी का पश्चिम बंगाल की तरफ रुख न करना सियासत की गलियों में सुर्खियां बना हुआ है।
राहुल गांधी अभी तक केरल, तमिलनाडु और असम में चुनाव प्रचार किए थे, लेकिन बंगाल एक बार भी नहीं आए। यहां तक कि प्रियंका गांधी भी बंगाल चुनाव में नही दिखाई दी। जबकि   दूसरी तरफ भाजपा ने बंगाल में अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बार-बार बंगाल दौरे पर आ रहे हैं और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लगातार राजनीतिक हमले कर रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का कहना है, यह तो मुमकिन नहीं है कि पूरी भाजपा बंगाल में डेरा डाले रहे लेकिन पांचों चरण के मतदान के दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल घर बैठे रहें। इसलिए तय मानें कि राहुल आखिरकार बंगाल दौरे पर जाएंगे ही।
बताया जा रहा है कि ऐसी कई राजनीतिक मजबूरी है जिन पर उठने वाले सवालों से बचने के लिए राहुल बंगाल दौरे से बचते रहे हैं। एक ओर जहां वाम दलों के साथ बंगाल में मिलकर कांग्रेस चुनाव लड़ रही है और वहीं केरल में मुख्य विरोधी है। कहा जा रहा है कि ऐसे में वह दोहरे माप दंड वाले मजबूरी से बचने के लिए अभी तक बंगाल में चुनाव प्रचार से बचते रहे हैं।

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