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बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के लिए पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव होंगे चुनौतीपूर्ण

आगामी 25 नवंबर को पश्चिम बंगाल की तीन विधानसभा सीटों कालियागंज, खड़गपुर और करीमपुर विधानसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के लिए कड़ी चुनौती साबित होने वाले है।

अगले महीने पश्चिम मेदिनीपुर जिले की खड़गपुर, नदिया जिले की करीमपुर और उत्तर दिनाजपुर की कालियगंज सीटों के लिए उपचुनाव होगा। कालियगंज सीट कांग्रेस विधायक प्रमथनाथ राय के निधन से खाली हुई है जबकि खड़गपुर सीट से पिछली बार विधायक चुने गए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के लोकसभा सदस्य चुने जाने से रिक्त हुई है।

बीते लोकसभा चुनाव के बाद यह पहला मौका होगा जब यह दोनों राजनीतिक दल चुनावी मैदान में फिर आमने-सामने होंगे। जिन तीन सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं उनमें से एक-एक पर तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और कांग्रेस का कब्जा रहा है।

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वहीं, करीमपुर की तृणमूल विधायक महुआ मित्र ने भी कृष्णनगर संसदीय सीट से जीतने के बाद इस्तीफा दे दिया था। भाजपा के सामने इन चुनावो में जहां लोकसभा के प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती होगी, वहीं तृणमूल कांग्रेस इन तीनों सीटों को जीत कर अपने पैरों तली खिसकती जमीन को बचाने का प्रयास करेगी। कांग्रेस और माकपा ने मिलकर उपचुनाव लड़ने का फैसला किया है। कांग्रेस खड़गपुर व कालियगंज सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वाममोर्चा के हिस्से खड़गपुर सीट आई है।

बंगाल की तीन और उत्तराखंड की एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव 25 नवंबर को कराया जाएगा। राज्य सरकारों के अनुरोध पर हाल में हुए विधानसभा चुनावों के साथ ये उपचुनाव नहीं कराए गए थे। दरअसल, इस दौरान उत्तराखंड में स्थानीय निकायों के चुनाव हो रहे थे और बंगाल ने उपचुनाव स्थगित करने के लिए दुर्गा पूजा उत्सवों को कारण बताया था।

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