[gtranslate]
Country

कमजोरी रुपए में नहीं ,बल्कि डॉलर में आई है मजबूती :निर्मला सीता रमण

पिछले तीन वर्षों से कोरोना महामारी के बाद अब सात महीनों से जारी रूस – यूक्रेन युद्ध के चलते दुनियाभर के देशों की अर्थव्यस्था चरमराई हुई है। बावजूद इसके बीते दिनों वर्ल्ड बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर कहा था कि दुनिया को भारत से सीख लेनी चाहिए। इस बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की सालाना बैठकों में शामिल होने के लिए गई वित्त सीतारमण ने देश के रुपए में लगातार गिरावट को लेकर कहा है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बावजूद भारतीय मुद्रा में स्थिरता बनी हुई है। वित्त मंत्री के अनुसार कमजोरी रुपये में नहीं आई बल्कि डॉलर में मजबूती आई है।

दरअसल ,दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में मुद्रास्फीति कम है और इससे निपटा जा सकता है। भारतीय मुद्रा में गिरावट आने के संबंध में वित्त मंत्री ने कहा है कि “मैं इसे इस तरह नहीं देखूंगी कि रुपया फिसल रहा है, बल्कि मैं यह कहना चाहूंगी कि रुपये में मजबूती आई है। उनके अनुसार डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है, मजबूत हो रहे डॉलर के सामने अन्य मुद्राओं का प्रदर्शन भी खराब रहा है। लेकिन अन्य उभरते बाजारों की मुद्राओं की तुलना में भारतीय मुद्रा (रुपया ) ने बेहतर प्रदर्शन किया है।

देश का विदेशी मुद्रा भंडार इसी साल सात अक्टूबर तक 532.87 अरब डॉलर था जो की एक वर्ष पहले 642.45 अरब डॉलर से कहीं कम है। वित्त मंत्री के मुताबिक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आने का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण मूल्यांकन में परिवर्तन आना है। वित्त मंत्री के अनुसार देश के अर्थव्यवस्था की बुनियाद ही नहीं बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति भी अच्छी है। मुद्रास्फीति भी इस स्तर पर है जिससे निपटे जाने की संभावना है । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार मुद्रास्फीति छह फीसदी नीचे लाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।

वित्त मंत्री ने दहाई अंक की मुद्रास्फीति वाले तुर्की जैसे अन्य देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि “दूसरे देश बाहरी कारकों से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं, लेकिन दूसरे देशों की तुलना में अपनी स्थिति को लेकर हमें सजग रहना होगा ,मैं वित्तीय घाटे को लेकर पूरी तरह से सतर्क हूं। उन्होंने बढ़ते व्यापार के घाटे पर जिक्र करते हुए कहा कि ‘ हम निर्यात की तुलना में ज्यादा आयात कर रहे हैं, हम यह भी देख रहे हैं कि यह अनुपातहीन वृद्धि क्या किसी एक देश के मामले में हो रही है। गौरतलब है कि यह इशारा असल में चीन के लिहाज से व्यापार घाटा बढ़कर 87 अरब डॉलर होने की ओर किया गया था।

यही नहीं उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि भारत अगले वर्ष होने वाली “जी-20” के दौरान क्रिप्टोकरेंसी के लिए SOP डेवलप करने का टारगेट लेकर चल रहा है। इस बैठक में क्रिप्टो भी भारत के लिए एजेंडा होगा। गौरतलब है कि भारत जी-20 की अध्यक्षता इसी साल के दिसंबर से 30 नवंबर 2023 तक करेगा और इस दौरान 200 से अधिक देशों की मेजबानी करेगा।

यह भी पढ़ें : भारत के आर्थिक विकास को सपेरे की तस्वीर में दिखाने को लेकर बवाल

You may also like

MERA DDDD DDD DD