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हम मुसलमान हैं, हमें न्याय की कोई उम्मीद भी नहीं है : ओवैस के पिता

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले का यह थाना अचानक से सुर्खियों में आ गया है। क्योंकि इस थाने ने धर्मांतरण के नए क़ानून के तहत पहली गिरफ़्तारी की थी। नया कानून यानि कि अवैध धर्मांतरण विरोधी कानून 2020 जिसे पिछले वर्ष नवम्बर माह से लागू किया गया है।

मामला ओवैस और उसके अब्बा मोहम्मद रफ़ीक़ का है।ये उत्तर प्रदेश के शरीफ़ नगर में दिहाड़ी मज़दूरी करते हैं। उनके पास गाँव में थोड़ी सी ज़मीन भी है।

ओवैस वो पहला इंसान हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश के नए धर्मांतरण निरोधक क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया। ओवैस को उन्हीं के गाँव के रहने वाले और पड़ोसी टीकाराम की शिकायत पर 28 नवंबर को गिरफ़्तार किया गया था। इससे कुछ घंटे पहले ही उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उत्तर प्रदेश अवैध धर्मांतरण निरोधक अध्यादेश 2020 को अपनी मंज़ूरी दी थी।

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इस क़ानून के लागू होने के बाद, राज्य में धर्म परिवर्तन ग़ैर-ज़मानती अपराध हो गया है और इसका दोषी साबित होने पर दस साल क़ैद तक की सज़ा हो सकती है।

गिरफ़्तारी से पहले ओवैस छोटे-मोटे काम करके किसी तरह से बसर कर रहे थे। अब उन्हें इंतज़ार है कि पुलिस और अदालत बेगुनाही का एलान करें।अभी वो ज़मानत पर छूटे हुए हैं। पुलिस का कहना है कि वो अब भी मामले की जांच कर रही है।

इस मामले में बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट के अनुसार, गाँव के प्रधान कहते हैं कि, जून 2020 में आशा की शादी अपने ही समुदाय के एक व्यक्ति से कर दी गई थी।

जब मैंने टीकाराम के घर के बाहर उनका नाम लेकर पुकारा, तो एक महिला घर से निकलकर बाहर आई।उसने कहा कि टीकाराम घर पर नहीं हैं. उसने ये भी कहा कि वो इस घर में मेहमान है और उसे इस केस के बारे में कुछ भी नहीं पता।

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उसे ये भी नहीं पता कि टीकाराम घर कब लौटेंगे या वो कहाँ मिलेंगे।उसके पास टीकाराम का कोई फ़ोन नंबर भी नहीं था। ये कोई अचरज वाली बात नहीं थी।मुझे बताया गया था कि टीकाराम का परिवार, मीडिया से बात नहीं कर रहा है।वो पूरी तरह ख़ामोश हो गए थे।

हैरानी की बात ये है कि पुलिस ने ओवैस के ख़िलाफ़ जो नई तहरीर दर्ज की है, उसमें आशा के बयानों का ज़िक्र भी नहीं है।टीकाराम का कहना है कि ओवैस और आशा ने बारहवीं कक्षा तक साथ पढ़ाई की थी। वहीं, ओवैस का कहना है कि उन दोनों ने आठवीं तक ही साथ पढ़ाई की थी। दोनों दोस्त भी रहे थे। ओवैस ने कहा कि, ‘शायद हमारी दोस्ती के चलते ही उन्होंने मेरे ख़िलाफ़ केस दर्ज करा दिया।’

फिलहाल एक नए कानून की वजह से उन पर जबरन प्रहार को लेकर ओवैस के पिता ने कहा कि, ‘हम तो मुसलमान हैं। ये एक हक़ीक़त है। हम कोई ख़ास उम्मीद नहीं रखते।’

एफ़आईआर में क्या लिखा है यह भी पढिये :

एफ़आईआर के मुताबिक़, टीकाराम ने ओवैस पर आरोप लगाया था कि ‘उन्होंने बहला फुसलाकर और दबाव बनाकर उनकी बेटी आशा को इस्लाम धर्म क़ुबूल कराया था।’

ओवैस पर इल्ज़ाम लगा था कि उन्होंने आशा के परिवार पर इस बात का दबाव बनाया था वो अपनी बेटी को इस्लाम धर्म क़ुबूल करने और उससे शादी करने की इजाज़त दे दें।ओवैस पर इसके लिए आशा के परिवार को धमकाने का भी आरोप है। ये मामला बरेली के देवरैना पुलिस थाने में दर्ज कराया गया था।

ओवैस और आशा, पास के ही एक स्कूल में साथ-साथ पढ़ते थे और एक-दूसरे को जानते थे।गाँव में क़रीब 1200 मकान हैं और लगभग पाँच हज़ार लोग रहते हैं। गाँव के प्रधान ध्रुव राज के मुताबिक़, गाँव में चार सौ मुसलमान रहते हैं।

आशा की शादी पिछले साल जून में हो गई थी। लेकिन, उनके पिता का कहना था कि ओवैस उन्हें अब भी परेशान कर रहा था। पुलिस ने ओवैस को IPC की धारा 504 (किसी व्यक्ति को अपमानित करने), 506 (डराने-धमकाने) और नए क़ानून की धाराओं तीन और पाँच के तहत गिरफ़्तार किया था। उत्तर प्रदेश के नए धर्मांतरण निरोधक क़ानून की धारा 12 के मुताबिक़, ख़ुद को बेगुनाह साबित करने की ज़िम्मेदारी अभियुक्त पर है।

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