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किया चाको पर वार, दिल्ली कांग्रेस की रार

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के लाख प्रयास करने बाद भी पार्टी की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि गांधी परिवार के भक्त भी कमजोर समय में पार्टी नेतृत्व को आंखे दिखाने के बाज नहीं आ रहे हैं। हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक में पार्टी नेताओं के बीच छिड़ी वर्चस्व की जंग के बाद अब अगले तीन माह के भीतर होने जा रहे चुनावों की तैयारी के बजाय दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के नेता अब बजरिए मीडिया अपनी अंदरूनी कलह को सामने लाने में जुट गए हैं। शीला दीक्षित के स्थान पर प्रदेश नेताओं की कलह चलते पार्टी हाईकमान नया प्रदेश अध्यक्ष तक नहीं चुन सकी है। दरअसल इस समय प्रदेश इकाई अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको की भूमिका को लेकर दो गुटों में बंट चुकी है। चाको के संबंध शीला दीक्षित से बेहद तनावपूर्ण रहे थे। अपनी शालीनता के लिए पहचाने जाने वाली शीला दीक्षित को अपने अंतिम समय में इस बात का खासा मलाल था कि पीसी चाको उनकी वरिष्ठता और अनुभव को अनदेखा कर प्रदेश कांग्रेस में उनके विरोधी नेताओं को आगे बढ़ा रहे हैं। जून, 2019 में जब शीला दीक्षित ने प्रदेश की सभी 280 ब्लाॅक स्तरीय कमेटियों को भंग करने की घोषणा की थी तब चाको ने सार्वजनिक रूप से शीला दीक्षित के फैसले पर रोक लगा डाली।

पूर्व सांसद और शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित का आरोप है कि उनकी मां को इस प्रकार का सार्वजनिक अपमान बेहद अपमानजनक लगा और वे मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गई। दीक्षित का कहना है कि यही अघात और अपमान शीला दीक्षित की 20 जुलाई को हुई मृत्यु का कारण है। संदीप दीक्षित ने पीसी चाको को एक पत्र लिखकर यह आरोप लगाया। दीक्षित का यह पत्र लीक होकर मीडिया तक जा पहुंचा है। शीला दीक्षित के करीबी नेताओं का आरोप है कि पीसी चाको ने इस गोपनीय पत्र को जानबूझ कर लीक किया है।

शुक्रवार, 11 अगस्त को बकायदा एक प्रेस कांफ्रेंस कर दिल्ली कांग्रेस के पांच वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मांग कर डाली कि चाको को तत्काल दिल्ली के प्रभारी पद से हटाया जाए। किरण वालिया, रमाकांत गोस्वामी, जितेंद्र कोच्चर, मंगल राम सिंघल और रोहित मनचंदा ने पीसी चाको पर निशाना साधते हुए कह डाला कि चाको शीला दीक्षित की मृत्यु बाद भी उनकी छवि खराब करने का काम कर रहे हैं।

दूसरीतरह चाको का कहना है कि उन्होंने संदीप दीक्षित के पत्र को कांग्रेस अध्यक्ष के पास भेज दिया था। पत्र कैसे लीक हुआ उन्हें जानकारी नहीं। चाको ने संदीप दीक्षित पर अपनी मृत मां के सहारे घटिया राजनीति करने तक का आरोप लगा डाला है।

प्रदेश नेताओं की इस सिरफुटव्वल चलते प्रदेश अध्यक्ष पद पर निर्णय अधर में भटक गया है। सूत्रों की माने तो भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हो चुके पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा में से एक नाम पर जल्द ही सोनिया गांधी का फैसला आने वाला है। हालांकि इन दो के अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जेपी अग्रवाल, और अरविंदर सिंह लवली भी रेस में शामिल है। कांग्रेस आलाकमान के सामने बड़ा संकट कीर्ति आजाद को लेकर भी पैदा हो गया है। सुभाष चोपड़ा, जेपी अग्रवाल और अजय माकन किसी भी हाल में भाजपा से कांग्रेस में आए आजाद का नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार नहीं बताए जा रहे हैं।

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