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अब फेस स्कैनिंग से होगा मतदान

अगले महीने होने वाले बिहार नगरपालिका चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। यह चुनाव इस लिए भी खास है क्योंकि चुनाव आयोग इस चुनाव में नई तकनीक का प्रयोग करने जा रहा है। जिसके अंतर्गत मतदान से पहले मतदाता का फेस स्कैन किया जायेगा।

चुनाव आयोग के इस फैसले के पीछे एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि मतदान के दौरान दिए जाने वाले फर्जी मतों पर रोक लगाई जा सके । दरअसल पिछले कुइछ वर्षों से कई राजनीतिक पार्टियों द्वारा आरोप लगाए जाते रहे हैं कि चुनावों में गलत तरीके से मतदान कराए जाते हैं। इसलिए चुनाव आयोग ने इस नई तकनीक से मतदान करने का फैसला लिया है। जिसकी शुरुआत बिहार नगरपालिका चुनाव से की जा रही है।

वर्तमान में क्या है मतदान का तरीका

 

भारत एक लोकतान्त्रिक देश है जहाँ देश का नागरिक 18 वर्ष की आयु से अपने मत का प्रयोग कर सकता है। जिसके लिए उन्हें अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करना आवश्यक होता है। जिसके बाद आप एक मतदाता के रूप में मतदान कर सकते हैं। वर्तमान में मतदान के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का प्रयोग किया जाता है।
ईवीएम के दो भाग होते हैं एक नियंत्रण इकाई और दूसरा मतदान इकाई। दोनों ही भाग एक एक दूसरे से एक केबल के माध्यम से जुड़े रहते हैं। इसका पहला भाग मतलब नियंत्रण इकाई मतदाता अधिकारी के पास होता है और दूसरा भाग अर्थात मतदान इकाई मतदान कक्ष में मतदाता के पास । मशीन में हर पार्टी के चुनाव चिन्ह की बटनें होती हैं जिनमें से अपनी पसंद के उम्मीदवार की पार्टी चुनाव चिह्नन के बटन को दबाकर अपने मत का प्रयोग करते हैं। ईवीएम द्वारा जो मतदाता वोट नहीं कर पाता तो वो बैलेट पेपर का प्रयोग करते हैं । जिसे वह डाक द्वारा भेज सकता है। इस प्रक्रिया से वोट देने का अधिकार कुछ लोगों को ही होता है जिनमें सैनिक, चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी, देश के बाहर कार्यरत सरकारी अधिकारी , प्रिवेंटिव डिटेंशन में रहने वाले लोग (कैदियों को वोट डालने का अधिकार नहीं होता है), 80 वर्ष से अधिक की उम्र के वोटर (रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है) , दिव्यांग व्यक्ति शामिल हैं। मतगड़ना के समय पहले बैलेट पेपर द्वारा भेजे गए इन मतों की गड़ना की जाती है और बाद में ईवीएम द्वारा डाले गए वोटों कि।

 

फर्जी मतदान को रोकने के लिए अन्य नियम

 

फर्जी रूप से किये जाने वाले मतदान को रोकने लिए पहले से कई नियम हैं।जैसे की मतदान करने के बाद एक ऊँगली पर नीली स्याही लगाई जाती है। ये स्याही हर उस मतदाता की ऊँगली पर लगाई जाती है जो मतदान करता है। इस स्याही की एक खास बात यह है कि एक बार इंक लग जाने पर उसे नाखून से हटने में काफी समय लगता है। ऐसे में उस स्थिति से बचा जा सकता है जब कोई मतदाता दो बार वोट देने की कोशिश करे। साथ ही अगर कोई एक बार वोट देने के बाद किसी अन्य मतदाता के स्थान पर वोट देने जाता है तब भी इंक के आधार पर यह पहचान की जा सकती है कि वह पहले वोट दे चुका है।
मतदान के दिन बूथ पर अगर कोई मतदाता दूसरे किसी और के नाम पर वोट करने आता है तो बूथ एजेंट फर्जी वोटर के खिलाफ पीठासीन अधिकारी के पास चैलेंज वोट की अपील कर सकता है। इसके बाद निर्वाचन टीम मौके पर जांच करेगी जिसमें उसके परिवार के बारे में जानकारी ली जाएगी। अगर मतदाता फर्जी साबित हुआ तो उसे पीठासीन अधिकारी पुलिस के हवाले कर दिया जाता है और इस बात का पता चलने से पहले ही की मतदाता फर्जी है उसने वोट दिया है तो उस व्यक्ति से भी वोट करने का अधिकार नहीं छीना जाता जिसके नाम पर वो फर्जी वोट किया गया है।

 

 

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