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ग्राम पाठशाला टीम : पहले मिशन लाइब्रेरी अब ‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’

यह पिछले साल की बात है जब कोरोना काल में जिला गाजियाबाद के गनौली गांव से मिशन लाइब्रेरी शुरु किया गया। यह मिशन ऐसे समय में शुरु किया गया जब लोग अपने घरों में छुपकर कोरोना से बचाव कर रहे थे। इसके बाद ‘ग्राम पाठशाला’ के बैनर तले युवाओं ने गांव गांव लाइब्रेरी बनाने का अभियान शुरु किया । जिसमें दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर लाल बहार युवाओं का रोल मॉडल की भूमिका में सामने आए।

लाल बहार के नेतृत्व में जिला गाजियाबाद के साथ ही गौतम बुद्ध नगर , मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, हापुड़ सहित सातो जिलों में सैकड़ों लाइब्रेरी बनाती गई । गांव गनौली से शुरु हुए मिशन को ‘गनौली मॉडल’ के रूप में जाना जाने लगा।

फिलहाल इस ग्राम पाठशाला टीम में सातों जिलों से हजारों युवाओ का संगठन काम कर रहा है। ऐसे समय में जब देश में कोरोना महामारी गांव – गांव तक पहुंची तो ग्राम पाठशाला टीम ने अपने मिशन लाइब्रेरी को होल्ड कर “मेरा गांव – मेरी जिम्मेदारी” अभियान शुरू कर दिया है । ग्राम पाठशाला टीम का हर सदस्य अब अपने-अपने गांवों में कोरोना महामारी पर रोकथाम में जुटा गया है।

ग्राम पाठशाला के सदस्य संजय बैसला कहते हैं कि नौकरी पेशा लोगों का समूह ग्राम पाठशाला पिछ्ले करीब दस महिनों से देश के हर गाँव में एक लाइब्रेरी की मुहिम चला रहा था। इस मुहिम के तहत टीम ग्राम पाठशाला के सदस्यों ने सौ से ज्यादा गाँवों में जन-जागरण कर पुस्तकालयों का निर्माण भी कराया।
इसी बीच अप्रैल के मध्य में कोरोना ने विकराल रूप धारण कर लिया जिस कारण टीम को गाँव-गाँव जाकर जन-जागरण कार्यक्रम बन्द करने पड़े।

देश में कोरोना इतनी तीव्र गति से फैला कि सारे संसाधन कम पड़ने लगे और लोग दवाईयोँ, अस्पतालों, ऑक्सिजन और यहाँ तक कि खाने के लिए भी मजबूर होने लगे।
ऐसे हालात में ग्राम पाठशाला ने लोगों की मदद का बीड़ा उठाया और टीम ग्राम पाठशाला के करीब दो सौ सदस्य जरूरतमंद लोगों की मदद करने में जुट गए हैं।

बैसला बताते हैं कि ग्राम पाठशाला ने छह हेल्प लाइन मोबाइल नम्बर भी जारी किये है ताकि जरुरतमंद लोग तुरन्त टीम ग्राम पाठशाला से सम्पर्क कर सकें। अभी तक ग्राम पाठशाला दो सौ से ज्यादा मरीजों के लिए ऑक्सिजन सिलिंडर, दवाईयां, ब्लड, प्लाज्मा, खाना, एम्बुलेंस, व्हीलचेयर आदि की व्यवस्था कर चुकी है।
ग्राम पाठशाला के सदस्य चौबीस घंटे मरीजों की मदद के लिए तत्पर रहते हैं तथा देश के विभिन्न हिस्सों के लोग अपने परिजनों के ईलाज के लिए टीम से सम्पर्क कर रहे हैं।

गाँवों में चिकित्सा के सीमित संसाधनों के मद्देनजर ग्राम पाठशाला ने गाँवों के पुस्तकालयों पर ही आपातकालीन बेड, दवाईयां और ऑक्सिजन सिलिंडर की व्यवस्था कराई है ताकि मरीज की तबियत ज्यादा बिगड़ने की स्थिति में उसे ऑक्सिजन का सपोर्ट देकर नजदीकी अस्पताल पहुँचाया जा सके।
टीम ग्राम पाठशाला ने गाँवों के लोगों को जागरुक करने के लिए “मेरा गाँव मेरी जिम्मेदारी” अभियान चलाया हुआ है जिसके तहत गाँव के ही कुछ युवा अपने गाँव के लोगों को जागरुक करने की जिम्मेदारी लेते हैं। पाठशाला के सदस्य पवन यादव ने बताया कि उनसे दिल्ली, हरियाणा, यूपी, महाराष्ट्र और बिहार तक के लोगों ने मदद के लिए सम्पर्क किया है।

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