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बिसरख के रण में BJP से टिकट पाने को ताल ठोक रहें दिग्गज

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में योगी सरकार की असातीय सफलता के बाद अब पार्टी की नजर ब्लॉक प्रमुख चुनाव पर है। फिलहाल, पार्टी ने प्रत्येक ब्लॉक में चुनाव प्रभारी नियुक्त किए हुए हैं । यह प्रभारी ब्लॉक प्रमुख चुनाव में पार्टी के संभावित प्रत्याशियों की हैसियत आंक रहे हैं। साथ ही वह उनका तोलमोल कर भी देख रहे हैं।

 

 

कहा जा रहा है कि भाजपा ऐसे प्रत्याशियों पर ही दांव लगाएगी जो जीत की तरफ जाता दिखाई हुआ देगा । इसके मद्देनजर ही पार्टी प्रत्येक ब्लॉक के अंतर्गत समीक्षा बैठक करने में जुटी हुई है। फिलहाल, उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ब्लॉक प्रमुख चुनाव में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए जमीनी तैयारियों में जुटी हुई है।

 

 

गौरतलब है कि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में प्रदेश के 75 जिलों में भाजपा को 22 जिलों में निर्विरोध तौर पर सफलता मिली है। 22 जिलों में भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध जीत दर्ज करा चुके हैं। इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अमरोहा, मुरादाबाद, आगरा , इटावा और सहारनपुर हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 9 जिलों के जिला पंचायत अध्यक्ष पर निर्विरोध जीत कर भाजपा ने किसान आंदोलन कर रही पार्टियों को भी आईना दिखा दिया है । कहां जा रहा था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन के चलते भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावो में अपना परचम लहराने में कामयाब नहीं होगी।

 

 

इसी के साथ ही प्रदेश के ललितपुर, झांसी, बांदा, चित्रकूट, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, शाहजहांपुर, गोरखपुर, मऊ, वाराणसी, पीलीभीत और बहराइच ऐसे जिले हैं जहां भाजपा ने निर्विरोध बाजी जीत कर विपक्षी दलों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वह चुनाव मैनेजमेंट में किसी से भी कमजोर नहीं है। विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ भाजपा पर जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए साम- -दाम – दंड – भेद की नीति अपनाने का आरोप लगाया है।

 

 

हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव का अभी फाइनल रिजल्ट आना बाकी है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्षों की जीत से उत्साहित भाजपा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में मिली हार को भुलाने की कोशिश कर रही है । यहां यह भी बताना जरूरी है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सबसे ज्यादा जिला पंचायत सदस्य समाजवादी पार्टी के जीते थे। जबकि भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी। लेकिन जिस तरह जिला पंचायत अध्यक्ष में भाजपा अप्रत्याशित परिणाम पा रही है उससे लगता है कि प्रदेश में एक बार फिर सत्तारूढ़ पार्टी के जिला पंचायत अध्यक्ष सबसे ज्यादा होंगे। अब से पूर्व में सूबे पर सत्तारूढ़ रही सरकारों में भी यही पुनरावृत्ति देखने को मिलती रही है। चाहे वह बसपा की सरकार हो या सपा की।

 

 

फिलहाल, ब्लाक प्रमुख के चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज कराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे ज्यादा चर्चित रहने वाले बिसरख ब्लॉक के चुनाव में इस बार भाजपा के मुकाबले विपक्ष की भूमिका नगण्य हो गई है। यहां फिलहाल तीन प्रत्याशी मैदान में है। तीनों ही भाजपा से टिकट पाने के लिए ताल ठोक रही है। बिसरख ब्लॉक प्रमुख सीट इस बार महिला आरक्षित है। यहां कुल 38 क्षेत्र पंचायत सदस्य हैं। जिनमें ब्लाक प्रमुख का चुनाव जीतने के लिए महज 20 क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) का समर्थन जिसे मिल गया वह बिसरख ब्लॉक का प्रमुख बन जाएगा।

 

 

ब्लॉक प्रमुख बिसरख में दुजाना के पूर्व प्रधान ओमपाल नागर की पत्नी अप्रीत कौर भाजपा से उम्मीदवार है। इसके अलावा भाजपा के सांगठनिक नेता मुकेश नागर एडवोकेट की पुत्र वधू पूजा नागर की भी अपनी दावेदारी बरकरार है । जबकि बादलपुर निवासी पूर्व राज्य मंत्री करतार नागर की पुत्री और बिसरख निवासी पूर्व ब्लॉक प्रमुख ध्यान सिंह भाटी की पुत्रवधू रुचि भाटी भी मैदान में है। रुचि भाटी अपने पैतृक गांव बादलपुर से निर्विरोध क्षेत्र पंचायत सदस्य चुनी गई है।

 

 

मजे की बात यह है कि तीनों ने ही भाजपा से टिकट मांगा है। भाजपा सूत्रों की ही बात करें तो पार्टी के पैनल में फिलहाल तीनों उम्मीदवारों के नाम शामिल हो गए हैं। लेकिन ब्लॉक प्रमुख पद प्रत्याशी भाजपा किसे बनाएगी यह आगामी 1 सप्ताह में तय हो पाएगा। इसके लिए फिलहाल समीक्षा बैठक की जा रही है ।

 

 

दो दिन पहले ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित आईआईटी कॉलेज में भी इस संबंध में एक समीक्षा बैठक की गई थी। इसकी अध्यक्षता ब्लॉक प्रमुख चुनाव के प्रभारी सतपाल सिंह सैनी के द्वारा की गई। जिसमें जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह, दादरी के विधायक तेजपाल नागर, विधान परिषद सदस्य श्रीचंद शर्मा, नवनियुक्त जिला पंचायत अध्यक्ष अमित चौधरी के साथ ही जिला महामंत्री धर्मेंद्र कोली और आशीष वत्स शामिल हुए थे।

 

 

हालांकि इसमें निर्णायक मंडल किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा। लेकिन जिस तरह से समीक्षा बैठक में मौजूद भाजपा नेताओं का रुझान रहा उससे लगा कि पार्टी ब्लॉक प्रमुख चुनाव को लेकर दो धडो में बटी हुई है। जिसमें एक धड़ा अप्रीत कौर को तो दूसरा रुचि भाटी को टिकट दिलाने की मंशा पाले हुए हैं। रुचि भाटी और अप्रीत कौर दोनो के समर्थक फिलहाल क्षेत्र पंचायत सदस्यों की संख्या इतनी बता रहें हैं कि वह जीत के करीब है। दोनों के द्वारा अपने – अपने पाले में जीत के लिए जरूरी जितने सदस्य होने चाहिए उतने का दावा भी किया जा रहा है। जबकि तीसरी प्रत्याशी पूजा नागर के बारे में अभी तक यही कहा जा रहा है कि उनके पास जिताऊ वोट नहीं है।

 

 

पूजा नागर मुकेश नागर एडवोकेट की पुत्रवधू है । पार्टी संगठन के हिसाब से अगर देखा जाए तो भाजपा के सबसे पुराने और समर्पित नेता मुकेश नागर ही हैं। वह पिछले दो दशक से भाजपा की जमीनी राजनीति से जुड़े हुए हैं । संगठन में उनका वर्चस्व कायम है।

 

 

फिलहाल, मुकेश नागर पिछले दो दशक से संगठन के प्रति अपने इसी समर्पण को अपना प्लस प्वाइंट मानते हैं। वह कहते हैं कि पार्टी के द्वारा उनकी ही पुत्रवधू को प्रत्याशी बना जाएगा। जिताऊ सदस्यों की संख्या बल के सवाल पर वह कहते हैं कि जब पार्टी यह तय कर देगी कि किसे प्रमुख पद का प्रत्याशी बनाया जाएगा तो संभव है कि अन्य दो प्रत्याशी भी उसी का समर्थन करेंगे जिसका नाम पार्टी द्वारा डिक्लेअर किया जाएगा।

 

 

अप्रीत कौर दुजाना के पूर्व प्रधान ओमपाल नागर की पत्नी हैं। वह निर्विरोध क्षेत्र पंचायत सदस्य बनी है। ओमपाल नागर पूर्व में कांग्रेस के नेता रहे हैं। लेकिन सांसद सुरेंद्र नागर के समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने के दौरान ओमपाल नागर भी भाजपा में शामिल हो गए थे।

 

 

फिलहाल, ओमपाल नागर की पत्नी अप्रीत कौर को राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर का समर्थन मिल रहा है। इसके बलबूते वह अपनी मजबूत दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं। इस बाबत ओमपाल नागर के पुत्र श्यामेन्द्र नागर कहते हैं कि उनके पास ब्लाक प्रमुख पद पर जीतने के लिए पर्याप्त वोट है। भाजपा के सामने वह अपने क्षेत्र पंचायत सदस्यों की परेड भी कराने के लिए तैयार हैं। प्रधान ओमपाल नागर भी फिलहाल अपनी पत्नी अप्रीत कौर का भाजपा से टिकट पक्का माने बैठे हैं।

 

 

इसके अलावा बिसरख ब्लॉक के पूर्व प्रमुख रहे ध्यान सिंह भाटी की पुत्रवधू रुचि भाटी भी अपने पारिवारिक राजनीतिक समीकरणों के सहारे भाजपा से टिकट पाने की जुगत में है। हालांकि ध्यान सिंह भाटी को पूर्व में समाजवादी पार्टी और फिर बसपा का नेता माना जाता रहा है। लेकिन फिलहाल में वह अपनी पुत्रवधू को भाजपा के टिकट पर ब्लॉक प्रमुख का उम्मीदवार बनाने की पुरजोर पैरवी कर रहे हैं।

 

 

भाजपा के राजनीतिक सूत्रों की मानें तो रुचि भाटी को दादरी के विधायक तेजपाल नागर का अंदरूनी समर्थन मिल रहा है। रुचि भाटी के देवर और पूर्व ब्लॉक प्रमुख अंबरीश भाटी बताते हैं कि पार्टी के विधायक के साथ ही सांसद भी उनके समर्थन में हैं । वह अभी भी भाजपा नेता के तौर पर काम कर रहे हैं।

 

 

एक दिन पहले ही भाटी के द्वारा सादोपुर की झाल पर नवनियुक्त भाजपा मंत्री अमित बाल्मीकि का स्वागत समारोह कर पार्टी में खलबली मचा दी है। इसके बाद लोगों को पहली बार पता चला कि रुचि भाटी और उनके देवर पूर्व ब्लॉक प्रमुख अंबरीश भाटी भाजपा नेताओं का स्वागत कर रहे हैं। वह भाजपा में नही है लेकिन भाजपा नेताओं का स्वागत कैसे कर रहे हैं।

 

 

इस बाबत सवाल पूछने पर अंबरीश भाटी ने कहा कि उन्हें भाजपा के जिला कार्यालय से फोन आया था। जिसमें उनसे कहा गया कि वह सादोपुर की झाल पर नवनियुक्त प्रदेश मंत्री अमित बाल्मीकि का स्वागत करें। इस आदेश का उन्होंने पालन किया। यह पूछने पर कि अगर उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो वह क्या करेंगे ? इस पर अंबरीश भाटी ने कहा कि ‘जैसा पार्टी का आदेश होगा’।

 

 

पार्टी का आदेश क्या होगा और पार्टी किसको अपना कैंडिडेट बनाएगी , यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है। लेकिन फिलहाल बिसरख ब्लॉक प्रमुख पद को लेकर भाजपा के नेताओं में तपिश बढ़ गई है। बिसरख ब्लॉक प्रमुख चुनाव को लेकर फिलहाल भाजपा की पॉलिटिकल गहमागहमी जारी है। जबकि विपक्ष मूकदर्शक की भूमिका में हैं।

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