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वेदान्ती के बोल- कहां गए वे लोग…

रामजन्मभूमि न्यास (अयोध्या) के वरिष्ठ सदस्य और महंत राम बिलास वेदान्ती भाजपा की कथनी-करनी से बेहद रूष्ट हैं। वे दावा करते हैं कि भाजपा राम के नाम पर सत्ता में आयी थी और राम के नाम पर ही सत्ता से बाहर का रास्ता देखेगी। महंत वेदान्ती कहते हैं कि पीएम मोदी कुंभ मेंले में जाकर सफाई कर्मियों के पैर धो सकते हैं लेकिन अयोध्या में प्रभु राम के चरण धोने का समय उनके पास नहीं। महन्त वेदान्ती इस बात से भी गुस्से में हैं कि जिन नेताओं ने राम मन्दिर आन्दोलन की नींव रखी और उसी नींव को सीढ़ी बनाकर भाजपा सत्ता तक पहुंची उन नायकों की दशा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में उनसे किसी प्रकार की सलाह तक नहीं ली गयी। महंत वेदान्ती कहते हैं कि भाजपा राम के नाम पर आयी थी और राम के नाम पर जायेगी भी।
न आडवाणी का कहीं नाम है और न ही मुरली मनोहर जोशी का। अब न कल्याण सिंह की वह दमदार आवाज सुनने को मिलती है और न ही अब उमा भारती और विनय कटियार की गरज। साध्वी ऋतम्भरा का तेजस्वी भाषण तो अब गए दिनों की बात हो गयी। नब्बे के दशक के ये वह सियासी नायक हैं जिन्होंने भाजपा को फर्श से अर्श पर ला खड़ा किया। यही वे नायक हैं जिन्होंने यूपी की अयोध्या में राम मन्दिर निर्माण को लेकर अलख जगायी और जिसकी आग में सिर्फ यूपी भाजपा ने ही नहीं बल्कि पूरे देश में भाजपाइयों ने सियासी रोटियां सेकी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इन नेताओं की मेहनत की पहली फसल थे। इसी आन्दोलन और इन्हीं नेताओं के सहारे यूपी में भी भाजपा ने अपना परचम फहराया। आज स्थिति यह है कि भाजपा सिर्फ केन्द्र ही नहीं बल्कि देश के 17 राज्यों में शासन कर रही है।
यूपी ही नहीं बल्कि पूरे देश में भाजपा को नयी और मजबूत पहचान देने वाले ये नायक कहां हैं? शायद इसकी जानकारी अब प्रदेश भाजपा के कुछ बडे़ नेताओं को भी नहीं होगी। स्थिति यह है कि अब इन नेताओं को चुनाव में भी स्टार प्रचारक के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाता। एक समय था जब कल्याण सिंह, उमा भारती, साध्वी ऋतम्भरा और विनय कटियार जैसी शख्सियत जब भाषण देने मंच पर उतरती थी तो भीड़ उनका भाषण सुनने के लिए उमड़ पड़ती थी। ये वही नेता थे जिनके भाषणों ने एक वर्ग विशेष के भीतर ऐसी आग पैदा कि देखते ही देखते अयोध्या स्थिति सैकड़ों वर्ष पुराना ऐतिहासिक धार्मिक स्थल चन्द पलों में ही धूल-धूसरित हो गया। इन्हीं नेताओं के ओजस्वी भाषणों का प्रताप था कि मुलायम सरकार के कार्यकाल में कारसेवक के रूप में जुटे युवा जान तक देने पर उतारू हो गए थे। बताते चलें कि पुलिस द्वारा चलायी गयी गोलियों से दर्जनों की संख्या में युवकों की जान भी गयी थी। ऐसे नेता अब भाजपा में गए दिनों की बात हो गए हैं। इन्हें अब कोई पूछने वाला नहीं।
भाजपा के ऐसे नेताओं को भले ही उनका हाई कमान भूल गया हो लेकिन अयोध्या का साधू-संत आज भी इन नेताओं की कद्र करता है। रामजन्मभूमि न्यास के वयोवृद्ध और वरिष्ठ सदस्य डाॅ. राम बिलास वेदान्ती भाजपा के मौजूदा नेताओं से बेहद खफा हैं। एक टीवी इंटरव्यू में दिए गए बयान में उन्होंने कहा है कि भाजपा का चाल-चरित्र बदल चुका है। उसके लिए अब रामजन्मभूमि के नायकों की कोई कद्र नहीं है।
श्री वेदान्ती का कहना है कि जिन-जिन लोगों ने भाजपा को खड़ा किया और जिन-जिन लोगों ने भाजपा को जिन्दा करने के साथ ही जन-जन तक पहुंचाया, भाजपा ने उन लोगों को गिन-गिनकर किनारे कर दिया है। स्थिति यह है कि भाजपा ने राम मन्दिर आन्दोलन के जनक रहे नेताओं से चुनाव के सम्बन्ध में वार्ता तक नहीं की।
श्री वेदान्ती कहते हैं कि उन्हें लगता है कि आने वाले दिनों में राम का नाम लेने वालों के लिए भी खतरा पैदा हो जायेगा। जैसे रावण के काल में था, जो राम का नाम लेता था उसे जेल अथवा फांसी दी जाती थी वही हालात देश के बनते जा रहे हैं। अब तो ऐसा लगने लगा है मानों भविष्य में राम का नाम लेने वाले को सजा दी जाने लगेगी और यह सजा देश की जनता भुगतेगी, लिहाजा देश की जनता को 2019 के लोकसभा चुनाव में क्या निर्णय लेना है वह स्वयं विचार कर ले तभी देश का कल्याण होगा। महंत वेदान्ती कहते हंै कि राम के नाम पर भाजपा सत्ता में आयी थी और राम के नाम पर भी भाजपा की विदाई हो जायेगी।
प्रियंका गांधी के अयोध्या आगमन पर प्रश्न किए जाने पर श्री वेदान्ती कहते हैं कि अयोध्या जो कोई आयेगा, उसी का स्वागत होगा। प्रियंका गांधी ने अयोध्या में हनुमान गढ़ी के दर्शन किये लेकिन कोई यह बतायेगा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी कभी अयोध्या आए? कुंभ के मेले में जाकर सफाई कर्मियों के चरण धो सकते हैं लेकिन अयोध्या आकर रामलला के चरण धोने का समय उन्हें नहीं मिल पाया।
1 Comment
  1. Reosopbiomi 2 weeks ago
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