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राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा का अज्ञातवास

 

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया विधानसभा चुनावो के बाद राजनितिक परिदृश्य से गायब हो गयी है। यहां तक कि पिछले दिनों बजट सत्र से भी वह गायब रही। वसुंधरा राजे के इस गायब होने के गड़बड़झाले के पीछे केंद्र की राजनीती का लोचा बताया जा रहा है। जब से राजस्थान में भाजपा बुरी तरह से परास्त हुयी है तब से पार्टी के दोनों सिपहसालारों नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने राजे को राजनीती के हासिए पर पंहुचा दिया है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने राजे को एक  चले हुए कारतूस की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि राजस्थान में गत दिनों बीते सत्र के दौरान एक और खास बात भी चर्चा में रही।  यह थी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का इससे नदारद रहना। चर्चा थी कि वे विदेश यात्रा पर हैं। वसुंधरा राजे की इस गैरमौज़ूदगी ने राजस्थान में कई तरह के कयासों को हवा दे दी है। इसकी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री व भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह से उनका पुराना टकराव बताया जा रहा है।

बताया जाता है कि वसुंधरा राजे और नरेंद्र मोदी के बीच अनबन सबसे पहले 2008 में राजस्थान-गुजरात की संयुक्त नर्मदा नहर परियोजना के उद्घाटन के समय सामने आयी थी। तब एक ही पार्टी से होने के बावजूद इन दोनों मुख्यमंत्रियों ने एक-दूसरे के कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लिया था। उनकी यह अदावत राजस्थान में पिछली वसुंधरा सरकार (2013-18) के दौरान चरम पर नज़र आई थी। इस दौरान अध्यक्ष अमित शाह और वसुंधरा राजे भी कई बार आमने-सामने देखे गए थे।  तब शायद ही ऐसा महीना  गुज़रा  जब सियासी गलियारों में वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की चर्चा ने जोर न पकड़ा हो। लेकिन अपने विधायकों पर उनकी जबरदस्त पकड़ के चलते उन्हें टस से मस नहीं किया जा सका था।

 

लेकिन सात महीने पहले भारतीय जनता पार्टी की राजस्थान विधानसभा चुनाव में शिकस्त के बाद से पार्टी स्तर पर वसुंधरा राजे को प्रभावहीन करने की कोशिशों में खासी तेजी आई है।  इसकी शुरुआत भाजपा हाईकमान ने वसुंधरा राजे की बजाय प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को नेता प्रतिपक्ष बनाकर की थी।  जबकि कहा जा रहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री खुद इस पद को संभालना चाहती थी। यहां यह भी बताना जरुरी है कि कटारिया और राजे के संबंध सामान्य नहीं माने जाते है। 2012 में जब राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी तब वसुंधरा राजे ने कटारिया की एक चुनावी यात्रा के विरोध में पार्टी छोड़ने की धमकी तक दे डाली थी। नतीजतन कटारिया को अपनी यात्रा स्थगित करनी पड़ी।

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