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उत्तराखण्ड में सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट शुरू

पिछले साल ही उत्तराखण्ड में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सरकार बनानी वाली भाजपा में सत्ता परिवर्तन की चर्चा शुरू हो गई है। ऐसे भी इस प्रदेश में अभी तक पहली निर्वाचित सरकार के मुखिया एनडी तिवारी को छोड़ किसी मुख्यमंत्री ने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया है। जिससे यहां के सभी मुख्यमंत्रियों में हमेशा कुर्सी जाने का भय सताता रहता है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के विश्वस्त माने जाने वाले त्रिवेंद्र सिंह पिछले दिनों एक शिक्षिका संग अपने व्यवहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में रहे। पार्टी सूत्रों का मानना है कि न केवल विधायक और मंत्री, बल्कि संघ भी सीएम की कार्यशैली से अब नाराज हो चला है। संघ के वरिष्ठ प्रचारक आलोक जी संग यूं तो सीएम के संबंध बेहद मधुर बताए जाते हैं। पर चर्चा जोरों पर है कि प्रांत प्रचारक ने भी मुख्यमंत्री को बदले जाने पर अपनी सहमति दे दी है।
सत्ता के गलियारों में तो यहां तक चर्चा है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह भी अब राज्य में बदलाव के लिए तैयार हो गए है। पेंच त्रिवेंद्र सिंह के विकल्प को लेकर फंस रहा है। रेस में सबसे आगे वित्त एवं आबकारी मंत्री प्रकाश पंत का नाम बताया जा रहा है। यदि उनकी ताजपोशी होती है तो अध्यक्ष पद से अजय भट्ट की भी विदाई करनी पड़ेगी। पंत और भट्ट राज्य के कुमाऊं प्रभाग से हैं, साथ ही दोनों ब्राह्मण है।
प्रदेश में जातिगत समीकरणों के चलते यदि सीएम ब्राह्मण होगा तो पार्टी अध्यक्ष किसी ठाकुर नेता को बनना पार्टी की मजबूरी होगी। अजय भट्ट के नेतृत्व में पार्टी ने जबरदस्त जीत हासिल की, ऐसे में उन्हें एडस्ट किया जाना भाजपा नेतृत्व के लिए टेड़ी खीर साबित होगी।
राज्य से राज्यसभा की सीट पर पिछले दिनों अनिल बलूनी को भेजा जा चुका है। ऐसे में यदि सीएम बदला जाता है तो भट्ट को केंद्रीय टीम में शामिल किया जा सकता है। प्रकाश के पंत के अलावा दो और नाम पर भी चर्चा चल रही है। इसमें एक हैं, त्रिवेंद्र सरकार के ही पर्यटन मंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सतपाल महाराज। महाराज के सीएम बनने पर पार्टी को प्रदेश अध्यक्ष के साथ छोड़छाड़ करने की जरूरत नहीं होगी।
ऐसे पिछले कुछ समय से महाराज संघ को अपने विश्वास में ले लिया है। संघ के मुखिया मोहन भागवत हरिद्वार में उनके आश्रम भी आ चुके हैं।
तीसरा नाम पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक का है। केंद्र में मोदी की सरकार बनने के वक्त उनके मंत्रिमंडल में जगह बनाने में निशंक कामयाब नहीं हो पाए थे। खंडूड़ी और कोश्यारी के बाद निशंक भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में हैं। उनकी पकड़ पूरे प्रदेश में एक समान भी है। इसलिए पार्टी आलाकमान उनके नाम पर भी सोच रही है।

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