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Country Uttarakhand

उत्तराखंड CM के मीडिया सलाहकार मानसेरा की दो दिन में विदाई, क्या रहें कारण?

मुझे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत जी ने अपना मीडिया सलाहकार बनाया। इसमें सबकी दुआएँ मिली और जब मैं देहरादून पहुंचा तो उससे पहले ही सोशल मीडिया पर बहुत कुछ मेरे बारे में मेरे परिवार के बारे में उछाला गया। इस सबसे भी ज्यादा मुख्यमंत्री श्री तीरथ सिंह रावत के फैसले पर सवाल उठे।जबकि मेरी नियुक्ति के पीछे मेरी योग्यता मेरा पत्रकारिता का अनुभव ,व्यवहार मेरे द्वारा लोगो की भलाई ही आधार थी। जोकि ऐसे लोगो को रास नही आ रही, जो मुझे पहचानते भी नही।

इस सभी विषयों से सीएम साहब को भी कष्ट पहुंच रहा है। मुझे बुलाने और अपनी टीम में रखने का निर्णय उनका ही था। मुझे आभास है कि वो सरल सज्जन व्यक्ति है। इसलिए मुझे यहां पदभार ग्रहण करने से पहले सभी विषयों पर सोचना समझना पड़ा और यही फैसला लिया है कि जब हम ऐसे लोगो से घिरे रहेंगे जोकि हमे काम ही करने नही देगे तो ऐसे माहौल में काम करने का कोई औचित्य नही। मुझे पद लालसा कभी नही रही । ये मेरे करीबी सब जानते है। मान सम्मान सबका जरूरी है। जोकि कायम रहना चाहिए। मैं स्पष्ट मानता हूं कि जब तक कार्य संस्कृति न हो वहां सब बेमानी है। इसलिए सबकी गरिमा बनी रहे मैं इस पद को अस्वीकार करता हूँ।”

सोशल मीडिया फेसबुक पर यह भावनात्मक पोस्ट उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार दिनेश मानसेरा ने लिखी है। इसी के साथ ही मानसेरा ने दो दिन पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का मीडिया सलाहकार बनने में असमर्थता जाहिर करते हुए इस महत्वपूर्ण पद को अस्वीकार कर दिया।

लेकिन वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर वरिष्ठ पत्रकार दिनेश मानसेरा के बारे में उत्तराखंड के कुछ पत्रकारों ने विरोध में मोर्चा खोल दिया। यह पत्रकार अपने आपको मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का करीबी बताते है । हालांकि इन्होंने दिनेश मानसेरा के मुख्यमंत्री का मीडिया सलाहकार बनते ही उनकी तारीफ में लंबी चौड़ी पोस्ट लिखी थी। जिसमें मानसेरा पर संघ का आशीर्वाद होना भी बताया गया था।

 

इससे पहले की उत्तराखंड सरकार की तरफ से दिनेश मानसेरा को अधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री का मीडिया सलाहकार पर पदासीन किया जाता देहरादून के पत्रकारों ने उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया। जिसके बारे में खुद मानसेरा ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनात्मक पोस्ट में लिखा है। देहरादून के विरोधी पत्रकारों ने दिनेश मानसेरा के खिलाफ उनके द्वारा पूर्व में किए गई ट्विटर की विवादास्पद पोस्टों को वायरल कर दिया । जिसमें मानसेरा ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सहित भाजपा के कई नेताओं पर व्यंगात्मक टिप्पणी की थी। इसी के साथ ही मानसेरा का दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साथ मधुर संबंध होना भी विरोधी लोगों को रास नहीं आया। एनडीटीवी का पत्रकार होना भी उनका सबसे बड़ा गुनाह बताया गया। इस तरह सोशल मीडिया पर मानसेरा के खिलाफ माहौल तैयार किया गया । जिसके चलते उत्तराखंड सरकार दबाव में आ गई  । बहरहाल, सरकार  को अपने फैसले पर यू टर्न लेने पर मजबूर होना पड़ा।

उत्तराखंड शासन ने आज इस बाबत एक आदेश जारी किया । जिसमें अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की तरफ से कहा गया कि पिछले शासनादेश को निरस्त किया जाता है। यह शासनादेश दिनेश मानसेरा के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का मीडिया सलाहकार बनाने संबंधित था। 17 मई को उत्तराखंड के संयुक्त सचिव एनएस डूंगरियाल ने दिनेश मानसेरा को इस शासनादेश के जरिए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का मीडिया सलाहकार बनाने का शासनादेश जारी किया था। जिसे 2 दिन बाद ही निरस्त कर दिया गया । हालांकि इस आदेश को निरस्त करने से पहले ही वरिष्ठ पत्रकार दिनेश मानसेरा मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार जैसे महत्वपूर्ण पद को अस्वीकार कर चुके थे।

बताया जा रहा है कि दिनेश मानसेरा पिछले डेढ़ महीने से पत्रकारों और सरकार के बीच तालमेल बनाने के कार्य में लगे थे। दिनेश मानसेरा को मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने करीब डेढ़ महीने पहले ही अपनी टीम का हिस्सा बना लिया था। बताया तो यहा तक जा रहा है कि मानसेरा के कहने पर ही मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने सूचना विभाग की कार्यशैली में बदलाव किया। यही नहीं बल्कि मानसेरा के सुझाव पर ही सूचना महानिदेशक मेहरबान सिंह का जाना, रणवीर सिंह चौहान का आना, उसके बाद मुख्यमंत्री और पत्रकारों के बीच तालमेल को वरीयता, कोविड वैक्सीन का पत्रकारों को भी लगाना जैसे विषय तय करने में साथ ही कोविड प्रभावित पत्रकारों से सूचना महानिदेशक की दूरभाष पर बातचीत के सुझाव को मुख्यमंत्री द्वारा अमल में लाना था। इन सब कार्यों के पीछे मानसेरा की ही मुख्यमंत्री को सलाह बताई गई है।

अब सवाल उठता है कि दिनेश मानसेरा की एंट्री तीरथ सिंह रावत की किचन कैबिनेट में कैसे हुई? इसके कई पहलू है। एक तो यह की तीरथ सिंह रावत मानसेरा  को व्यक्तिगत रूप से पिछले 25 सालों से जानते थे । जब वह भाजपा के कुमाऊं क्षेत्र के मीडिया प्रभारी थे । दूसरा संघ परिवार के दरवाजे से उनकी एंट्री हुई। खबर ये भी थी कि मानसेरा की एंट्री त्रिवेन्द्र सरकार के समय ही हो जानी थी। लेकिन ऐन वक्त पर दौरान दिल्ली हाई कमान से अचानक रमेश भट्ट की एंट्री हो गयी और मानसेरा का  नाम एक किनारे कर दिया गया।

मानसेरा के बारें में कहा जाता है कि वह बेशक एनडीटीवी में अपना कैरियर संभाले हुए थे। लेकिन अपनी विचारधारा को अपने प्रोफेशन पर उन्होंने कभी हावी नही होने दिया। वह खबर को खबर की तरह देखते रहे और यही वजह थी कि उन्होंने पत्रकारिता में अपना नाम और साख को बनाये रखा। वह स्वतंत्र रूप से राष्ट्रवादी लेखन भी करते रहे। पांचजन्य और अन्य पत्रों में वह बेबाक लिखते रहे । साथ ही सोशल मीडिया में सहीं को सही गलत को गलत कहने में भी कभी पीछे नही रहे ।

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