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उत्तर प्रदेश से कैसे निकलेगा दिल्ली का रास्ता ?

कहा जाता रहा है कि  दिल्ली का रास्ता  उत्तर प्रदेश से निकलता है  यानी कि  लोकसभा चुनाव में  जो दल  उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा  सीट लेकर आता है  वह ही  दिल्ली की  सत्ता तक पहुंचता है  । इस बार उत्तर प्रदेश में एक्जिट पोल में मामला गठबंधन के पक्ष में  दिख रहा है । बावजूद इसके  देश भर के एक्जिट पोल से दिल्ली की गद्दी पर  एक बार फिर  नरेंद्र मोदी  बढत बनाए हुए हैं । लेकिन 2014 के मुकाबले इस बार यूपी से भाजपा को भारी नुकसान हो रहा है । ऐसे में सवाल यह है कि दिल्ली की सत्ता तक भाजपा कैसे पहुंचेगी । भाजपा ही नही गठबंधन के लिए भी यह चुनौति है ।
लोकसभा चुनाव के सातवें व अंतिम चरण का मतदान खत्म होते ही विभिन्न चैनलों और एजेंसियों के एग्जिट पोल के नतीजे घोषित हो गये हैं। हालांकि एग्जिट पोल के नतीजे सिर्फ अनुमान भर हैं, वास्तविक हार-जीत का फैसला 23 मई को होगा।
 उत्तर प्रदेश के बारे में विभिन्न टीवी चैनलों और एजेंसियों के घोषित सर्वे में भाजपा को जोर का झटका लगता दिख रहा है। एग्जिट पोल के नतीजे बता रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को जोर का झटका लगा है, वहीं सपा-बसपा और रालोद गठबंधन का फॉर्मूला हिट हो गया है।
किसी भी एजेंसी के एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी 40 से अधिक सीटें मिलती नहीं दिख रही हैं। एबीपी के सर्वे में भाजपा को महज 22 सीटें मिलती दिख रही हैं। एबीपी के सर्वे में सपा-बसपा और रालोद गठबंधन को 56 सीटें मिल रही हैं। अन्य एजेंसियां के एग्जिट पोल के नतीजे भी गठबंधन को भाजपा से ज्यादा सीटें मिलना बता रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80 में 71 लोकसभा सीटें जीती थीं और दो सीटें सहयोगी पार्टी अपना दल को मिली थीं। इस लिहाज से उत्तर प्रदेश में भाजपा को बड़ा नुकसान होता दिख रहा है।
एग्जिट पोल के नतीजों में उत्तर प्रदेश में गठबंधन को सबसे ज्यादा सीटें मिलने का दावा किया जा रहा है। मतलब अखिलेश यादव मायावती ग्राउंड लेवल पर अपने मतदाताओं का वोट एक दूसरे प्रत्याशी को ट्रांसफर करवाने में सफर रहे।
कांग्रेस को लेकर किसी भी एजेंसी या चैनल के एग्जिट पोल में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को दो अधिक सीटें मिलती नहीं दिख रही हैं। एग्जिट पोल के नतीजों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में प्रियंका का जादू चलता नहीं दिख रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। इनमें अमेठी और रायबरेली की सीट शामिल थी। इस बार भी स्थिति वैसी ही बनती दिख रही है।

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