देवरिया की जेल में दर्जन भर बंदीरक्षकों, लम्बरदारों और जेल के कुछ बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में माफिया से सांसद तक का सफर तय करने वाले अतीक अहमद का आतंक यह साबित करने के लिए काफी है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही भयमुक्त समाज के तमाम दावे क्यों न कर लें लेकिन माफिया उनसे चार कदम आगे हैं। जेल में बंद रहने के दौरान अतीक का यह आतंक योगी सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं  है। या यूं कह लीजिए कि अतीक के आतंक ने योगी के दावों को खुली चुनौती दी है तो शायद यह गलत नहीं होगा। 
संत से सांसद के रास्ते यूपी की सत्ता संभालने वाले योगी आदित्यनाथ ने जब 21 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली उस वक्त उनके समक्ष सबसे बड़ी चुनौती पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में गुण्डाराज से निपटने की थी। पहली बार उत्तर प्रदेश जैसे किसी बडे़ राज्य की सत्ता संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ के तेवर इस बात का संकेत दे रहे थे कि अब पूरे पांच वर्ष यूपी के अपराधियांे के लिए मुसीबत का सबब बन सकते हैं। शुरुआती दौर में पुलिस को दी गयी छूट का असर भी देखने को मिला और पुलिस ने कई नामचीन अपराधियों को मुठभेड़ में ढेर कर योगी के संकल्प को दिशा दी। उम्मीद जतायी जा रही थी कि सपा सरकार के कार्यकाल में गुण्डई और आतंक का पर्याय बने छठे हुए अपराधी आने वाले कुछ समय में या तो सलाखों के पीछे होंगे या फिर मुठभेड़ में ढेर कर दिए जायेंगे। योगी के संकल्प को यूपी पुलिस आगे बढ़ाती इससे पहले ही यूपी के नामचीन अपराधियांे ने योगी सरकार के कई मंत्री और भाजपा सांसदों से सांठगांठ करके अपना कवच मजबूत कर लिया। मौजूदा स्थिति यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ धार्मिक कार्यक्रमों में व्यस्त कर दिए गए और छठे हुए अपराधी पार्टी के कुछ बडे़ नेताओं का संरक्षण पाने के एवज में भाजपा के लिए फण्ड की व्यवस्था करने में जुट गए। अब न तो पुलिस में वे तेवर शेष बचे हैं और न ही अपराधियों के बीच योगी का खौफ। विगत दिनों देवरिया जेल में अतीक का आतंक दिखने के बावजूद अतीक के खिलाफ योगी सरकार की तरफ से किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई का न किया जाना इस बात का प्रतीक है कि मौजूदा योगी सरकार भी नामचीन अपराधियों के हौसलों के समक्ष नतमस्तक हो गयी है।
बताते चलें कि जब योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के पश्चात अपराधियों को खुली चुनौती दी थी उसी वक्त यह लगने लगा था कि उनका यह अभियान ज्यादा दिनों तक चलने वाला नहीं। ऐसी शंका इसलिए कि अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं कई आपराधिक मामलों में पंजीकृत थे। शायद यही वजह है कि राजनैतिक विश्लेषकों ने भी इस बात की पुष्टि कर दी थी कि योगी आदित्यनाथ का यह अभियान दामन में दाग के कारण ज्यादा दिनों तक चलने वाला नहीं। महत्वपूर्ण यह है कि सिर्फ योगी आदित्यनाथ ही नहीं बल्कि प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित राज्य के और भी कई विधायक अपराधिक मुकद्दमों का सामना कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के निर्वाचित 322 सत्तारुढ़ विधायकों में से 143 सत्ताधारी विधायकों पर गंभीर आपराधिक मुकद्दमे दर्ज हैं। इनमें 107 विधायकों पर हत्या, हत्या का प्रयास, दंगे-फसाद फैलाने जैसे गंभीर आरोप भी हैं। ये आंकड़े ही इस बात को साबित करने के लिए काफी हैं कि यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ साफगोई से अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाना चाहते हैं तो सर्वप्रथम उन्हें अपने घर को सब से पहले साफ करना होगा, जिसकी संभावना शून्य है। अब प्रश्न यह उठता है कि क्या उत्तरप्रदेश विधानसभा में निर्वाचित अपराधी विधायकों की इतनी बड़ी संख्या यहां तक कि राज्य के मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री की आपराधिक पृष्ठभूमि, उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को नियंत्रण में रखने और प्रदेश से गुंडाराज व अराजकता को समाप्त कर पाने में कारगर सबित हो सकेगी?
यही वजह है कि पिछले दिनों पूर्वांचल के माफियाओं में शुमार एक बड़ा नाम अतीक अहमद का आतंक देवरिया जेल में भी देखने को मिला। देवरिया जेल में बंद पूर्व सांसद अतीक अहमद की दबंगई का यह आलम है कि उसने योगी आदित्यनाथ के भयमुक्त प्रदेश के दावों को चुनौती देते हुए अपने गुर्गों के सहारे राजधानी लखनऊ के एक प्राॅपर्टी डीलर का अपरहरण करवाकर उसे सीधे देवरिया जेल की अपनी बैरक में बुलवा लिया। जेल की बैरक में उस प्राॅपर्टी डीलर को न सिर्फ बेदर्दी से मारापीटा गया बल्कि उसकी कनपटी में रिवाल्वर सटाकर उसकी हत्या तक करने की धमकी दी गयी। ये सारा खेल जेल के बडे़ अधिकारियों की मौजूदगी में चलता रहा। इतना ही नहीं जिस वक्त प्राॅपर्टी डीलर के साथ वहशियाना हरकत की जा रही थी उस वक्त बंदी रक्षक से लेकर लम्बरदार तक अतीक की बैरक में मौजूद थे। उन्हीं की मौजूदगी में प्राॅपर्टी डीलर की कनपटी से रिवाल्वर सटाकर उसकी पांच कम्पनियों का मालिकाना हक अपने ही गैंग के दो सदस्यों के नाम लिखवा लिया। प्राॅपर्टी डीलर को गोमती नगर से अपहृत करके देवरिया जेल ले जाया गया था। हालांकि इस घटना के बाद सरकार की छवि पर लगे दाग को धोने की गरज से देवरिया जेल में छापेमारी की गयी और कुछ कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी लेकिन मुख्य रूप से जिम्मेदार जेल अधिकारी अभी भी कार्रवाई की जद से बाहर हैं। बताया जा रहा है कि जल्द ही अतीक अहमद को भी देवरिया जेल से अन्यत्र किसी दूसरी जेल में भेज दिया जायेगा लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या दूसरी जेल में रहकर अतीक अपने आतंक को मूर्तरूप नहीं दे पायेगा? यदि इसका उत्तर सरकार के पास नहीं है तो सरकार को अतीक को एक जेल से दूसरी जेल में भेजने के बजाए उसके खिलाफ जेल में ही सख्ती करनी चाहिए। साथ ही जेल अधिकारियों को एक सिरे से बर्खास्त करते हुए उन सभी के खिलाफ एक अपराधी को संरक्षण दिए जाने सम्बन्धी मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

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