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सोशल मीडिया पर मोटर चालान के मजाक से घबराई यूपी सरकार,किए जाएंगे रेट कम 


सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ मजाकिया लहजे में वायरल हो रहे नए चालान अधिनियम कानून को लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार हिचकिचा गई है। भारी भरकम धनराशि के चालान का कानून लागू होते ही कही जनता सरकार के विरुद्ध कोई आंदोलन शुरु न कर दे यह डर भी प्रदेश सरकार को सता रहा है। हालाकि इस कानून को लागू करने से पहले कैबिनेट में पास कराना भी अनिवार्य है।
एक सितंबर से देशभर में संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट भले ही लागू कर दिया हो लेकिन अभी उत्तर प्रदेश में इसे लागू नहीं किया गया है । यूपी में अभी पुरानी जुर्माना राशि के हिसाब से ही चालान काटे जा रहे हैं । इसके पीछे केंद्र द्वारा संशोधित किए नए मोटर व्हीकल एक्ट को प्रदेश सरकार द्वारा अंगीकृत ना करना बताया जा रहा है । कहा जा रहा है कि केंद्र के इस एक्ट को तभी लागू किया जाएगा जब यूपी सरकार की कैबिनेट की बैठक में इसे पास कर दिया जाएगा ।
प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक ना होने तक पुरानी तर्ज पर ही चालान की धनराशि वसूली जाएगी । चर्चा है कि अन्य प्रदेशों के साथ ही उत्तर प्रदेश में होने वाले विरोध के चलते प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में जुर्माना राशि घटाई जा सकती है ।
गौरतलब है कि सरकार ने कानून में बदलाव करते हुए नशे की हालत में गाड़ी चलाने बिना हेलमेट ड्राइविंग, सीट बेल्ट का उपयोग न करने, बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के ड्राइविंग करने, अनियंत्रित रफ्तार, सिग्नल की अनदेखी समेत हर गलती के लिए जुर्माने और सजा को सख्त बना दिया है।
देश में लापरवाही से ड्राइविंग करने के चलते हादसों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आए दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से सड़क दुर्घटनाओं के खौफनाक वीडियो सामने आते हैं। इनमें हर साल हजारों लोग असमय मौत के शिकार हो जाते हैं। हादसों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने यातायात के नियमों को और सख्त करने का फैसला लिया है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मोटर व्हीकल एक्ट (संशोधन), 2019 पेश किया था, जिसे संसद की मंजूरी मिल चुकी है। याद रहे कि इस संशोधन प्रस्ताव को 2017  में भी पेश किया गया था,लेकिन तब पास नहीं हो पाया। नए नियम रविवार से लागू हो गए हैं।
सरकार ने कानून में बदलाव करते हुए नशे की हालत में गाड़ी चलाने ड्रंकीन ड्राइविंग, बिना हेलमेट ड्राइविंग, सीट बेल्ट का उपयोग न करने, बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के ड्राइविंग करने, अनियंत्रित रफ्तार, सिग्नल की अनदेखी समेत हर गलती के लिए जुर्माने और सजा को सख्त बना दिया है।
नियम बदलाव के बाद पकड़े जाने पर मोटर व्हीकल एक्ट की विभिन्न धाराओं के हिसाब से जुर्माने की राशि बढ़ाई गई है।
जैसे बिना लाइसेंस ड्राइविंग एक हजार रुपए से बढ़ाकर पांच हजार रुपए,बिना टिकट यात्रा   दो सौ रुपए से बढ़ाकर पांच सौ रुपए,शराब पीकर चलाना  दो हजार से बढ़ाकर दस हजार रुपए,ओवर स्पीड या रेस लगाना पर पांच सौ से बढ़ाकर पांच हजार रुपए, बिना परमिट का वाहन पांच हजार से बढ़ाकर दस हजार रुपए,सीट बेल्ट सौ से बढ़ाकर एक हजार रुपए,
 बिना इंश्योरेंस ड्राइविंग एक हजार से बढ़ाकर दो हजार रुपए।तो वही केंद्र सरकार ने पुराने कानून को सख्त बनाने के साथ-साथ इसमें कुछ नए नियम भी जोड़े हैं,ओवर साइज व्हीकल पांच हजार रुपए, इमरजेंसी वाहनों को जगह न देना दस हजार रुपए,नाबालिगों के अपराध  पच्चीस हजार रुपए के साथ तीन साल की सजा।
यह है सरकार का मजाक उडाता मैसेज,जो वायरल हो रहा है …
कमाल है  हमारे देश का कानून !
बिना हेलमेट… जुर्माना 1000/-
नो पार्किंग में पार्किंग करना… जुर्माना 3000/-
इन्सुरेंस नही है… जुर्माना 1000/-
शराब पी कर वाहन चलाना… जुर्माना 10000/-
नो एंट्री में वाहन चलाना… जुर्माना 5000/-
मोबाईल फोन पे बात करना… जुर्माना 2000/-
प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं… जुर्माना 1100/-
ट्रिपल सीट ड्राइविंग… जुर्माना 2000/-
खराब सिग्नल… कोई जिम्मेदार नहीं है!
सड़क पर गड्ढ़े… कोई जिम्मेदार नहीं है!
अतिक्रमित फुटपाथ… कोई जिम्मेदार नहीं है!
सड़क पर रोशनी नहीं… कोई जिम्मेदार नहीं है!
सड़क पर कचरा बह रहा है…कोई जिम्मेदार नहीं है!
सड़कों पर लाइट के खंभे नहीं… कोई जिम्मेदार नहीं है!
खुदी सड़क कोई मरम्मत नहीं… कोई जिम्मेदार नहीं है!
गड्ढों में गिर कर आप गिरो चोटिल हो जाएँ… कोई जिम्मेदार नही है!
आवारा गायें जानवर टकरा जाए कुत्ता काट ले… कोई जिम्मेदार नहीं!
ऐसा लगता है कि जनता ही एकमात्र अपराधी है और जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी है। प्रशासन, निगम और सरकार कोई जिम्मेदार नहीं है। उनके लिए कोई नियम लागू नहीं होते हैं। वे किसी भी चूक के लिए कभी ज़िम्मेदार नहीं हैं।
क्या उन्हें दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए ????
नागरिक केवल काम करेंगे… दर्द का सामना करेंगे… कर चुकाना होगा… जुर्माने का भुगतान करेगा… सरकार की जेब भरें… और उन्हें फिर से सत्ता में वोट दें ! और ये नेता  सदन में जाकर जनहित के विधेयक वर्षों लटका कर रखते है और स्वयम के मौजमस्ती के बिल 2 मिनट पे पारित करतें है।
आप लोगों से हाथ जोड़कर निवेदन है कि इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकी यह बात उन्हें भी पता चलनी चाहिए जिन्होंने यह नियम बनाया है। ठीक है लापरवाही से ड्राइव करने वालों, बिना हेलमेट मोटरसाइकिल या स्कूटर चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों का चालान हो  क्योंकि जान है तो जहान है ।
पर जो दुर्घटनाएं इन सड़कों केबड़े बड़े खड्डों व जहां सड़क किनारे पैराफिट होने चाहिए के न होने की वजह से होती है उसके लिए जिम्मेदार कौन है ? सरकार के इन विभागों के खिलाफ भी कड़ा कानून बनाना चाहिए जिनकी वजह से प्रतिदन सैकड़ों जाने जा रही है।

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