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अविश्वास प्रस्ताव ने 2019 का एजेंडा तय किया

जैसा कि पहले से तय था, विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव सदन में गिर जाएगा, वैसा ही हुआ। 126 के मुकाबले 325 वोट से टीडीपी द्वारा लाया एवं कांग्रेस, वामपंथी, टीएमसी, आजेडी आदि विपक्षी पार्टियों के समर्थित अविश्वास प्रस्ताव गिरा। मगर इस अविश्वास प्रस्ताव ने कुछ चीजों की तस्वीर स्पष्ट कर दी। खासकर संसद में कल हुए बहस ने करीब आठ महीनें बाद होने वाले लोकसभा चुनाव का एजेंडा तय कर दिया।*
पहले बात तय हुए एजेंडे की। अविश्वास प्रस्ताव पर बेशक पहला भाषण टीडीपी ने दिया, जिन्होंने अपने को केवल आंध्रप्रदेश को स्पेशल स्टेटस नहीं मिलने तक सीमित रखा। पर विपक्ष की ओर से असली भाषण कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ने दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर सीधा चोट किया।
अभी तक मोदी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने का दावा करती रही है। राहुल ने राफेल डील के जरिए मोदी सरकार के इस दावे पर जबरदस्त प्रहार किया। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी हमेशा युवाओं की बात कर उन्हें अपने करीब लाने की कोशिश करते हैं। राहुल ने युवाओं के रोजगार का मसला उठाकर मोदी को युवाओं से दूर करने का प्रयास किया।
इसके बाद राहुल ने किसानों की आत्महत्या और उन्हें अपनी पसल का लाभकारी मूल्य न मिलने का मुद्दा उठाया। मोदी-शाह के अहंकार की बात कर राहुल ने भारतीय परम्पराओं और भारतीय समाज की सहिष्णुता से इतर भाजपा को दिखाने की कोशिश किया। सबसे अंत में मोदी को गले लगा कर राहुल ने यह संदेश दिया कि कांग्रेस की परंपरा किसी से नफरत करने की नहीं बल्कि सभी को गले लगाने की रही है।
इस तरह राहुल ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए युवाओं की बेरोजगारी, किसानों की दुर्दशा, राफेल डील में भ्रष्टाचार से लेकर भाजपा की नफरत फैलाने की नीति का एजेंडा तय कर दिया है।
राहुल के भाषण की तारीफ लोग कर रहे हैं। मगर कई राजनीतिक जानकार अभी भी उनमें गंभीर नेताओं वाले गुणों की कमी देखते हैं। कल का उनका भाषण बेशक जोरदार रहा मगर कुछ बातें उन्होंने ऐसी बोल दी जिससे सब पर पानी भी फेर गया।
वे मोदी सरकार को जिस मामले में सबसे ज्यादा घेर सकते थे, उसी पर अतिउत्साह में वे चूक गए। राहुल ने फ्रांस के राष्ट्रपति से राफेल डील बात करने का दावा किया। वे यहीं नहीं रुके फ्रांस के राष्ट्रपति के हवाले से वे यह भी बोल गए कि उन्होंने राफेल डील पर किसी प्रकार की गोपनीयता से साफ इंकार किया है।
राहुल के इस बयान के बाद फ्रांस सरकार को बयान जारी करना पड़ा। जिसमें फ्रांस सरकार ने माना कि राफेल डील पर गोपनीयता बरतने का समझौता दोनों देशों ने किया है।
प्रधानमंत्री को गले लगाकर राहुल ने जहां

 सबका दिल जीता वहीं अपने सीट पर बैठने के बाद आंख मारने की क्रिया ने उस पर भी पानी फेर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी भी अपने भाषण के दौरान पूरी लय में दिखे। उन्होंने अपने भाषण में राहुल सहित विपक्ष के सभी आरोपों का जवाब दिया। राफेल डील पर उन्होंने कहा कि इसमें पूरी पारदर्शिता बरती गई है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस डील की गोपनीयता के लिए दो देशों के बीच समझौते हुए हैं। नेताओं को इसकी गंभीरता को समझना चाहिए। युवाओं के रोजगार पर भी उन्होंने कई आंकड़े पेश किए।  उनके द्वारा पेश आंकड़े किसी गैर सरकारी संस्था के थे, जिसे उन्होंने खुद अपने वक्तव्य में कहा। मगर यहां सवाल यह भी उठता है कि आखिर सरकार के पास ऐसे आंकड़े क्यों नहीं हैं।
मोदी ने टीडीपी नेताओं का भी जवाब दिया। आंध्रप्रदेश पर भी वे कई मिनट तक बोले, जिसका सीधा अर्थ था कि उनकी नजर आगामी चुनावों में दक्षिण के राज्य हैं।
उन्होंने बैंक के कर्ज और काला धन पर भी जवाब दिया। इसके एक जवाब में उन्होंने जो आंकड़े रखे वह आश्चर्यचकित करने वाला था। उन्होंने कहा आजादी से लेकर साठ साल तक यानी 1947 से 2007 तक करीब 18 लाख करोड़ रुपये बैंकों ने लोन दिए। जबकि 2007 से 2014 तक यानी सात साल में ही बैंकों ने 52 लाख करोड़ रुपये लोन में बांट दिए। उनका तत्कालीन कांग्रेस और यूपीए सरकार पर आरोप था कि वे फोन पर ही उद्योगपतियों को लोन दिलवाते थे। यही नहीं एक लोन को चुकाने के लिए दूसरा लोन और दूसरे को चुकाने के लिए तीसरा लोन दिया जाता रहा था।
कल के अविश्वास प्रस्ताव पर जिस तरह का बहस संसद में हुआ, उसने 2019 के चुनाव का एक झलक दे दिया है। आगामी चुनाव में दोनों पक्ष आक्रमक रहने वाले हैं। कांग्रेस विपक्ष का नेतृत्व करने को तैयार है।

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