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अंततः मोदी ही ट्रप कार्ड

देश भर में भारतीय जनता पार्टी के बेशक करोड़ों कार्यकर्ता बन चुके हों, लेकिन सांगठनिक रूप से सशक्त और अनुशासित मानी जाने वाली इस पार्टी की राजनीति आज भी एक ही नेता पर निर्भर है। छोटे-छोटे राज्यों के चुनावों में नेता और कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुंह ताकने को मजबूर हैं कि मोदी का करिश्माई जादू उनकी चुनावी नैय्या पार लगा सकेगा। प्रधानमंत्री मोदी भी इसे बखूबी महसूस कर रहे हैं कि उनकी पार्टी के क्षेत्रीय नेता विपक्षी पार्टियों के क्षेत्रीय छत्रपों के मुकाबले बौने साबित हो सकते हैं। लिहाजा राज्य विधानसभाओं की चुनावी कमान उन्हें अपने हाथ में लेने को विवश होना पड़ रहा है।

दरअसल, प्रधानमंत्री को अहसास है कि यदि किसी राज्य में हार का सिलसिला शुरू हुआ तो यह नींव की ईंंट हिलने जैसा हो सकता है। यही वजह है कि उन्होंने तीन राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों में ‘कमल’ खिलाने की जिम्मेदारी खुद संभाल ली है। महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनावी बिगुल फूंकने के बाद पीएम मोदी झारखंड में बीजेपी के मिशन-65 को धार देने के लिए 12 सितंबर को रांची पहुंचे। इस तरह बीजेपी इन तीनों राज्यों में पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुकी है। इन राज्यों में पार्टी की अग्नि परीक्षा का समय है। यदि वह यहां फिर से सत्ता में वापसी नहीं कर पाती है तो जाहिर है कि देश भर में इसका यही संदेश जाएगा कि जनता भाजपा की नीतियों से दूर होने लगी है।

भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों में धारा 370 को हटाने के फैसले को सियासी तौर पर भुनाने की तैयारी कर ली है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला आम आदमी के अंदर तक गया है, इसलिए बीजेपी देश भर में जन जागरण अभियान चलाने के मिशन में लग गई है ताकि लोगों को बताया जाए कि इसे हटाने का फैसला कितना सही था। प्रधानमंत्री मोदी ने रोहतक की रैली में इसका जिक्र करके साफ कर दिया है कि तीन राज्यों के चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा होगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस यात्रा पर निकले हुए हैं तो हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की प्रदेशव्यापी ‘जन आशीर्वाद’ यात्रा आठ सितंबर को पूरी हो गई है। उधर झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास एक के बाद एक जिलों की यात्रा कर रहे हैं। वे एक ही बात दोहरा रहे हैं कि शासन तो पीएम मोदी के दिशा-निर्देशों पर चल रहा है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक बीजेपी का एजेंडा साफ है कि पीएम मोदी के नाम और काम पर ही राज्यों में वोट मांगे जाएंगे। यही वजह है कि चुनावी ऐलान से पहले पीएम मोदी ने एक के बाद एक तीन राज्यों का दौरा करके चुनावी अभियान को धार देना शुरू कर दिया है। 9 सितंबर को पीएम मोदी ने मुंबई में एक जनसभा को संबोधित किया तो हरियाणा के रोहतक में आठ सितंबर को रैली करके बीजेपी का चुनावी एजेंडा तय कर दिया है। हरियाणा और महाराष्ट्र के बाद पीएम मोदी ने इसी हफ्ते 12 सिंतबर को झारखंड का दौरा किया। इस दौरान पीएम मोदी ने रांची में झारखंड के सबसे बड़े पंचायत भवन और साहेबगंज में मल्टी मॉडल हब का उद्घाटन भी किया। इस हब के शुरू होने पर जलमार्ग से लोग सस्ती दरों पर माल ढुलाई कर सकेंगे। ये ढुलाई बांग्लादेश, म्यांमार समेत कई अन्य देशों को भी हो सकेगी। इस दौरान पीएम ने किसान मानधन योजना की शुरुआत भी की।

हरियाणा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते आठ सितंबर को रोहतक रैली के जरिए चुनावी अभियान का बिगुल फूंका। मोदी ने इस रैली के जरिए धारा 370 के मुद्दे को उठाने के साथ-साथ किसान और युवाओं को साधने की कवायद की। इससे बीजेपी का चुनावी एजेंडा साफ हो गया है। साथ ही नरेंद्र मोदी ने कहा कि बीते पांच साल में हरियाणा को बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकार के डबल इंजन का पूरा लाभ मिला है। हरियाणा में केंद्र सरकार की मदद से लगभग 25 हजार करोड़ रुपए के बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।

पिछले चुनावों में पीएम मोदी ने हरियाणा में जीत मिलने के बाद मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाकर एक कार्ड खेला था।खट्टर के सामने अब खुद को राजनीति का मंझा हुआ खिलाड़ी साबित करने का वक्त है। इसी के चलते उन्होंने पिछले एक महीने से हरियाणा में यात्रा करके माहौल बनाने की कोशिश की है, जिसका रोहतक में आठ सितंबर को समापन हुआ, बीजेपी ने हरियाणा में खट्टर के चेहरे को आगे करके एक बार फिर गैर जाट कार्ड खेलने का मन बना लिया है। बीजेपी ने राज्य में मिशन-75 का लक्ष्य रखा है।

महाराष्ट्र में पीएम मोदी ने पिछले हफ्ते 9 सितंबर को मुंबई में सरकारी योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करने के साथ-साथ जन सभाओं को भी संबोधित करके विधानसभा चुनाव का शंखनाद किया। इससे पहले मोदी विले पार्ले में लोकमान्य सेवा संघ तिलक मंदिर में गणपति की पूजा-अर्चना में भी शामिल हुए थे। मोदी ने कहा कि ‘बीते पांच सालों में’ ‘आमची मुंबई’ के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के लिए हमने बहुत ईमानदारी से प्रयास किया है। यहां फडणवीस की सरकार ने मुंबई और महाराष्ट्र के एक-एक प्रोजेक्ट के लिए कितनी मेहनत की है, मैं जानता हूं।’

पीएम मोदी बीजेपी के ट्रंप कार्ड हैं, जिसकी काट फिलहाल विपक्ष के पास नहीं है। पीएम ने महाराष्ट्र के दौरे से राज्य के तीन इलाकों मुंबई, मराठवाड़ा और विदर्भ को साधने की कवायद की। मोदी के महाराष्ट्र के रण में उतरने से शिवसेना के रुख में नरमी दिखी। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रैली में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में दोनों दलों का गठबंधन ‘अटल’ है और यह गठबंधन एक बार फिर से सत्ता में वापसी करेगा।

महाराष्ट्र में बीजेपी मिशन-220 का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री फडणवीस महाजनादेश यात्रा के जरिए माहौल बनाने में जुटे हैं, हालांकि महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर सहमति अभी नहीं बनी है।

इस बार झारखंड में पार्टी ने मिशन-65 का लक्ष्य तय कर रखा है। पिछले चुनावों में बड़ी मशक्कत करने के बाद सरकार बनी थी और उम्मीदों के मुताबिक सीटें नहीं आई थी। इस बार बीजेपी आलाकमान कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है। इसलिए इस बार पीएम मोदी ने झारखण्ड में 12 सितंबर को खुद ही सियासी रण का शंखनाद किया है।

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