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अमिताभ बच्चन के गुरुद्वारा को दिए दो करोड़ दान ने फिर ताजा कर दिए 84 दंगों के घाव

अकाली दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनजिंदर सिंह सिरसा ने अपने 9 तारीख के ट्वीट में लिखा था है कि “सिख महान हैं, सिखों की सेवा को सलाम…ये शब्द थे अमिताभ बच्चन जी के जब उन्होंने श्री गुरु तेग बहादुर कोविड केयर फैसिलिटी के लिए 2 करोड़ रुपये का योगदान दिया। दिल्ली ऑक्‍सिजन के लिए जूझ रही है, अमिताभ जी ने लगभग हर रोज फोन करके मुझसे फैसिलिटी का जायजा लिया है।”

मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्विटर पर यह प्रशंसनीय पोस्ट सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की कि है। वह इसलिए कि अमिताभ बच्चन ने दो करोड रुपए गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब में दान में दिया है।

दिल्ली स्थित गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में पिछले दिनों से कोविड केयर सेंटर चल रहा है। जिसकी जनसेवा की पूरे देश में प्रशंसा हो रही है। यह कोविड केयर सेंटर मरीजों को निशुल्क सेवा प्रदान कर रहा है।

इसी कोविड केयर सेंटर की सहायतार्थ अमिताभ बच्चन ने 2 करोड रुपए दिए । लेकिन उनके यह दान देने के बाद सिखों में उबाल आ गया है । सिख समुदाय का एक वर्ग जोर शोर से यह मांग करने लगा है कि अमिताभ बच्चन के 2 करोड रुपए वापिस किए जाने चाहिए। इसके पीछे 1984 के सिख दंगों को मुख्य वजह बताया गया है। जिसमें अमिताभ बच्चन की संलिप्तता को आधार मानते हुए यह विरोध हुआ है।

फिलहाल, सिख समुदाय में अमिताभ बच्चन के 2 करोड रुपए के दान को लेकर विरोध के स्वर बुलंद हो गए हैं। एक तरह से कहा जाए तो 84 के सिख दंगों के जख्म फिर से हरे हो गए हैं। सबसे पहले विरोध के स्वर उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सरदार परमिंदर सिंह की तरफ से बुलंद हुए हैं। सरदार परमिंदर सिंह ने अमिताभ बच्चन की न केवल आलोचना की है बल्कि 84 के दंगों का दर्द भी बयां किया है।

उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य परमिंदर सिंह ने कहा है कि “ऐसा जानकारी में आया है कि अभिनेता अमिताभ बच्चन ने दिल्ली शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी को कोविड की सेवाओं के लिए 2 करोड़ रुपये दान में दिए हैं। तीसरे गुरु के समय बादशाह अकबर भी बहुत सी जागीरे और गांव देना चाहता था लेकिन तीसरे गुरु ने इसे स्वीकार नहीं किया क्योंकि यह अकबर की कमाई नहीं थी।”

वह आगे कहते हैं कि
यह वही अमिताभ बच्चन हैं जिन्होंने 1984 में सिख दंगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिखों के खिलाफ दंगों को भड़काया था। अगर ऐसे व्यक्ति से दान लिया जाएगा तो यह सिख समाज के लिए श्रेयस्कर नहीं होगा और उनके मूल्यों के खिलाफ भी होगा।

सरदार परमिंदर सिंह ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और उसके अध्यक्ष सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा से दान को तत्काल वापस करने की मांग करते हुए कहा कि सिख समाज के पास पैसों की कमी नहीं है। हम हर घर के सामने जाकर हाथ जोड़कर पैसे मांग लेंगे, इसलिए इस प्रकार का दान तत्काल वापस कर देना चाहिए। मैं अनुरोध करना चाहूंगा कि अगर कोई भी ऐसा व्यक्ति है, जिसने मानवता के विरुद्ध काम किया हो तो उससे गुरु घर एक भी रुपया ना ले।

याद रहे कि 1 नवंबर 1984 को भारत के इतिहास की सबसे भयानक घटना घटी थी। देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश भर में सिख विरोधी दंगा फैल गया था और हजारों सिखों को निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया था। 31 अक्टूबर को इंदिरा गांधी के दो सिख बॉडीगार्ड ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। उनकी हत्या के बदले का बहाना बनाकर निर्दोष सिखों को निशाना बना गया। उनको मौत के घाट उतारा गया, उनके दुकान और मकान को लूटा गया और महिलाओं का बलात्कर किया गया। तब कहा गया कि दिल्ली, कानपुर, राउरकेला और देश के अन्य शहरों में दिन दहाड़े 15,000 सिखों की हत्या कर दी गई। अकेले दिल्ली में ही दिन दहाड़े 6 से 7 हजार निर्दोष सिखों की हत्या कर दी गई थी।

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