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राजस्थान की राजनीति में खलबली,अंर्तकलह का फायदा उठा सकती है भाजपा

राजस्थान की राजनीती में खलबली मच गई है। खलबली इस बात को लेकर है कि भाजपा के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिससे सूबे में सत्तासीन कांग्रेस की बैचेनी बढ़ गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने एक सच कहकर राजस्थान में आगामी राजनीती के संकेत भी दे दिए है। इससे कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। जिस तरह से राजस्थान में कांग्रेस के दो गुटों में आपसी कलह चल रही है, उसका फायदा भाजपा उठा सकती है।

22 सितम्बर को राजस्थान प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि अंर्तकलह के चलते प्रदेश में कांग्रेस की सरकार हिट विकेट हो जाएगी। भाजपा का प्रयास होगा कि अशोक गहलोत के नेतृत्व में चलने वाली कांग्रेस सरकार अपना कार्यकाल पूरा न कर सके। कांग्रेस में सीएम अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच पिछले कई माह से खींचतान चल रही है, लेकिन यह पहला मौका है जब प्रमुख विपक्षी भाजपा की ओर से इस तरह का बयान आया है।

अब तक भाजपा के नेताओं का यही कहना रहा कि कांग्रेस के आंतरिक विवाद से हमारा कोई सरोकार नहीं है। असल में भाजपा और कांग्रेस के विधायकों में बड़ा अंतर है। कांग्रेस के पास अब 200 में से 106 विधायक हो गए हैं, जबकि भाजपा के 72 विधायक हैं। सरकार को गिराने के लिए भाजपा को कम से कम 28 विधायकों का जुगाड़ करना है।

 

अब तक की चुप्पी के बाद 22 सितम्बर को जिस तरह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पूनिया का बयान आया है, उससे कांग्रेस में खलबली मच सकती है। अब तक जो भाजपा तमाशबीन की मुद्रा में थी, वह अब कांग्रेस के अंर्तकलह में रुचि दिखाने लगी है। यदि भाजपा की रुचि बढ़ती है तो राजस्थान में कांग्रेस की सरकार को खतरा हो सकता है।

हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को फिलहाल अपने ही लोगों से खतरा नजर आ रहा है। पिछले दिनों बसपा के छह विधायकों को कांग्रेस में शामिल करवाने से सीएम गहलोत बेहद उत्साहित थे। उम्मीद थी कि सरकार को मजबूती देेने के लिए बसपा के विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा।

गहलोत मंत्रिमंडल का विस्तार करते इससे पहले ही प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्तियां देने का मुद्दा उठा दिया। हालांकि बसपा विधायकों को शामिल करने में पायलट की कोई भूमिका नहीं थी, लेकिन फिर भी पायलट ने कहा कि बसपा के विधायक बिना शर्त कांग्रेस में शामिल हुए हैं।

 

पायलट का कहना रहा कि पहले कांग्रेस के उन कार्यकर्ताओं को सम्मान मिलना चाहिए जिन्होंने पांच वर्ष खून पसीना बहाकर प्रदेश में सरकार बनवाई है। पायलट के इस बयान के बाद गहलोत के मंत्रिमंडल का विस्तार टल गया।

 

क्रिकेट की राजनीति में भी पायलट की ओर से गहलोत को खुली चुनौती दी जा रही है। पायलट के समर्थक माने जाने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता रामेश्वर डूडी ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर दावा ठोक दिया है।

यह दावा तब किया गया है, जब सीएम गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत को एसोसिएशन का अध्यक्ष बनाने की कवायद हो रही है। देखना होगा कि अब भाजपा किस तरह से कांग्रेस की अंर्तकलह को हवा देती है। प्रदेश अध्यक्ष पूनिया के ताजा बयान से राजस्थान की राजनीति में खलबली मच गई है।

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