[gtranslate]
Country

धार्मिक हिंसा की चपेट में त्रिपुरा


एक तरफ हिन्दुओं के साथ हिंसा से बांग्लादेश में स्थिति बिगड़ती जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ अब भारत के राज्य त्रिपुरा में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। ये ऐसे समय में हो रहा है जब पिछले सप्ताह ही बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान कई हिन्दुओं के साथ हिंसा हुई और उनके घर, धार्मिक स्थलों आदि पर हमले किए गए। त्रिपुरा में मुसलमानों पर हो रहे हमलों को बांग्लादेश में हुई हिंसा की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा हिंसा के बाद अब भारत का राज्य त्रिपुरा भी पिछले एक सप्ताह से हिंसा की चपेट में है। अब बांग्लादेश से सटे त्रिपुरा के रहने वाले मुसलमानों के घरों, व्यवसायों और मस्जिदों पर हमले और तोड़फोड़ की कई खबर सामने आई हैं। कम से कम एक दर्जन से अधिक मस्जिदों में तोड़फोड़ की गई है या आग लगा दी गई है। कई जगहों पर मुसलमानों के घरों और कारखानों पर हमला किया गया है।

गौरतलब है कि त्रिपुरा में हुए हमले से एक रात पहले विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों ने कथित तौर पर मुस्लिम परिवार के घर पर भगवा झंडा लगाया था। इसी परिवार के अब्दुल मन्नान एक जाने-माने कारोबारी हैं और राज्य की विधानसभा के एक सदस्य के ख़ास रिश्तेदार हैं। बावजूद इसके वो अपने घर पर हमले को रोक नहीं पाए।

वो कहते हैं, ”जहां हम रहते हैं वहां मुसलमानों के सिर्फ़ 5-10 घर ही हैं। अगर हमले नहीं रुके तो हमें ऐसी जगह जाकर रहना पड़ेगा जहां मुसलमानों की अच्छी आबादी हो। त्रिपुरा में मुसलमानों की आबादी दस प्रतिशत से भी कम है।  यहां मुसलमान किसी एक जगह नहीं रहते हैं बल्कि पूरे प्रांत में फैले हुए हैं।

यह भी पढ़ें : पलायन को मजबूर होते बांग्लादेशी हिंदू

 

त्रिपुरा पिछले कई सालों से शांतिपूर्ण रहा है लेकिन यहां स्थानीय हिंदू आबादी और शरणार्थियों के बीच हिंसा का इतिहास रहा है। पिछले कुछ सालों से क़ायम शांति और क़ानूनी व्यवस्था की स्थिति ने राज्य को अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद की है।  भारत की ‘ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी’ में त्रिपुरा की भूमिका अहम रही है क्योंकि इससे बांग्लादेश और म्यांमार के साथ दोस्ताना संबंध बेहतर हुए हैं।

त्रिपुरा हिंसा के बाद जमात-ए-उलेमा (हिंद) की तरफ से मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को दी गई एक याचिका के मुताबिक  कुछ दिनों में विश्व हिंदू परिषद  और हिंदू जागरण मंच जैसे रूढ़िवादी हिंदू संगठनों ने राजधानी त्रिपुरा और राज्य के अन्य शहरों और कस्बों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।  जो कथित तौर पर स्थानीय मुसलमानों के ख़िलाफ़ आक्रोश में बदल गए। जमात ने प्रदर्शनकारियों पर मस्जिदों और मुसलमानों के घरों को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया है।

वही इस पर विश्व हिंदू परिषद  के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल का कहना है कि हमला उनके कार्यकर्ताओं की तरफ से नहीं हुआ बल्कि उलटे मस्जिद और पास के घरों से उन पर पत्थर फेंके गए।

साथ ही यह भी कहना है कि  विश्व हिंदू परिषद  और बजरंग दल स्थानीय लोगों के खिलाफ नहीं है।  बल्कि उनका प्रदर्शन बांग्लादेश में हिंदुओं की आस्था पर जिस तरह से प्रहार हुए। उसके खिलाफ था। प्रशासन को पूरे मामले पर जिहादियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि बीते एक सप्ताह से वीएचपी सिर्फ़ त्रिपुरा में ही नहीं बल्कि समूचे देश में बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुए हमले के विरोध में रैलियां निकाल रही है। ये रैली निकालना उनका अधिकार है। त्रिपुरा में हुई हिंसा में अभी तक किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं है। लेकिन कई जगहों पर तनाव की स्थिति है। राज्य के उत्तरी हिस्से में हिंसा का हवाला देते हुए पुलिस ने दावा किया है कि स्थिति नियंत्रण में है।

प्रशासन ने कई इलाकों में भारतीय दंड संहिता की धारा 144 लागू कर दी है। जिसके तहत एक जगह चार से ज्यादा लोग इकट्ठा नहीं हो सकते हैं। त्रिपुरा में हुई हिंसा पर त्रिपुरा स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सफीकुल रहमान का कहना है कि त्रिपुरा में जारी हिंसा और तनाव की स्थिति का कारण सिर्फ़ बांग्लादेश में हुई हिंसा ही नहीं बल्कि अगले महीने होने वाले नगर निकाय चुनाव भी है।

रहमान कहते हैं कि नगरपालिका चुनाव ऐसे समय में होने वाले थे जब कोरोना महामारी अपने चरम पर थी। लेकिन सरकार कोरोना महामारी फैलने के तुरंत बाद चुनाव नहीं कराना चाहती थी। लेकिन जैसे ही हिंसा शुरू हुई सरकार ने चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। उनका दावा है कि हालिया घटनाक्रम के बाद राज्य की पूरी हिंदू आबादी इस तरह एक साथ आ गई है कि कोई भी पार्टी हिंसा पर बोलने को तैयार नहीं है। इनमें विपक्षी पार्टियां भी शामिल हैं।

सोशल मीडिया पर मस्जिदों और मुस्लिम घरों में तोड़फोड़ की तस्वीरें शेयर की जा रही हैं। एक वीडियो में एक महिला पुलिस अधिकारी मुसलमानों से विरोध न करने और शांति बनाए रखने में मदद करने की अपील कर रही है। महिला अधिकारी कह रही हैं कि पुलिस सभी की रक्षा करेगी। लेकिन वीडियो में दिख रहा है कि स्थानीय मुसलमान पुलिस पर विश्व हिंदू परिषद की रैलियां को ना रोकने के आरोप लगा रहे हैं।

त्रिपुरा स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सफीकुल रहमान कहते हैं, “उन्होंने चंद मस्जिदों का दौरा किया लेकिन हालात नाज़ुक होने की वजह से हिंदू बहुल इलाकों की मस्जिदों में नहीं जा सके।

रहमान कहते हैं कि पूरे त्रिपुरा के मुसलमान डरे हुए हैं। उन्होंने सभी हिंदू युवाओं को कट्टरपंथी बना दिया है। उत्तरी त्रिपुरा की रहने वाली तानिया ख़ानम का कहना है कि हिंदू रूढ़िवादी पार्टियां पूरे राज्य में रैलियां कर रही हैं और मुस्लिम विरोधी नारे लगा रही हैं।      

 

गौरतलब है कि भारतीय राज्य त्रिपुरा में मुसलमान अल्पसंख्यक हैं और अधिकतर आबादी हिंदुओं की है। इनमें बड़ी संख्या में बांग्लादेश से आए हिंदू भी शामिल हैं। बांग्लादेश में हाल के दिनों में हिंदुओं पर हमले हुए हैं। माना जा रहा है कि उसी हमलों के जवाब में मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश के कुमिल्ला जिले में एक पूजा पंडाल में कथित तौर पर मुसलमानों की पवित्र पुस्तक कुरान की बेअदबी के बाद हिंसा भड़क गई थी। जिसके बाद देशभर में हिंदुओं के धर्मस्थलों, घरों और कारोबार को निशाना बनाया गया था। बांग्लादेश ने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। हिंसा के तुरंत बाद बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश के हिंदू समुदाय से मुलाकात की।  सरकार ने कई गिरफ्तारियां भी की और सरकार के मंत्री प्रभावित हिंदुओं से भी मिले।

You may also like

MERA DDDD DDD DD