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एफएमआर प्रतिबंध पर आदिवासी संगठन का विरोध

केंद्र सरकार द्वारा आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से आठ फरवरी को भारत – म्यांमार सीमा पर मुक्त आवागमन की व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया है। जिसका विरोध मणिपुर की जनजातियां कर रही हैं। दरअसल गृह मंत्रालय ने एफएमआर पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा है। इस जानकारी की पुष्टि केंद्रीय गृह मंत्री अमितशाह ने अपने एक्स अकाउंट पर भी की है , उन्होंने लिखा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हमारी सीमाओं को सुरक्षित करने का संकल्प है। देश की आंतरिक सुरक्षा के मद्देनजर गृह मंत्रालय द्वारा फैसला लिया गया है कि म्यांमार के बॉर्डर से लगे भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों की जनसांख्यिकीय संरचना को बनाए रखने के लिए मुक्त आवाजाही व्यवस्था (एफएमआर) को खत्म कर दिया जाएगा।” अमितशाह के कहने अनुसार विदेश मंत्रालय फिलहाल इसे खत्म करने की प्रक्रिया में है।

 

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने एक्स पर गृह मंत्रालय के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वागत किया और इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया । एफएमआर पर प्रतिबंध को मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि इससे घुसपैठ पर लगाम लगेगी और देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होगी। जहां एक और राज्य के मुख्यमंत्री इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं वहीं दूसरी और मणिपुर के आदिवासी संगठन ने सरकार द्वारा एफएमआर को खत्म करने पर विरोध जताया है। आदिवासी समूहों के सदस्यों ने भारत-म्यांमार मुक्त आवागमन व्यवस्था (एफएमआर) को खत्म करने के फैसले का विरोध करते हुए मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाने की धमकी दी है।

क्या है मुक्त आवागमन व्यवस्था ( एफएमाआर)

 

पूर्वोत्तर के नागा , सिंहपो, कूकी ,मिजो समेत कई जनजातियों का दावा है कि भारत और म्यांमार के बीच की सीमा उस क्षेत्र की पारंपरिक सीमाओं से असंगत है जिसमें वे निवास करते हैं और अभी भी उनके अपने रिश्तेदारों के साथ सीमा पार संबंध कायम हैं। भारत-म्यांमार मुक्त आवागमन व्यवस्था ( एफएमाआर) के तहत ये लोग मुक्त रूप से संबंधों को निभाते हुए आवागमन कर सकते हैं । इसके अंतर्गत निवासियों को बिना किसी दस्तावेज यानि बीजा के एक-दूसरे के क्षेत्र में 16 किलोमीटर तक भीतर जाने की अनुमति थी। भारत – म्यांमार के नागरिकों को बिना वीजा के 72 घंटे रहने की अनुमति देता है, इसके विपरीत म्यांमार भारत के नागरिकों अपने यहां केवल 24 घंटे रहने की अनुमति देता है। लेकिन अब सरकार द्वारा इस आवागमन व्यवस्था को खत्म करने की घोषणा की गई है। गृह मंत्री ने कहा है कि केंद्र सरकार ने देश की आंतरिक सुरक्षा और पूर्वोत्तर राज्यों की जनसांख्यिकीय संरचना को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया है।

 

इसके विपरीत आदिवासी संगठन ‘जो यूनाइटेड’ के प्रवक्ता गिन्जा वुअलजोंग ने कहा, ‘मणिपुर और मिजोरम में आदिवासी समुदाय एफएमआर के फैसले से खुश नहीं हैं और वे बड़े स्तर पर निर्णय का विरोध करने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।
गौरतलब है कि ‘जो यूनाइटेड’ एक समन्वय निकाय है जिसमें कुकी इंपी मणिपुर, जोमी काउंसिल, इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ), कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (सीओटीयू), हिल ट्राइबल काउंसिल (एचटीसी) और जनजाति परिषद जैसे सभी शीर्ष संगठन शामिल हैं।

क्यों लगा रही है सरकार “एफएमआर” प्रतिबन्ध

 

खुफिया एजेंसियों ने चिंता व्यक्त की है कि आतंकवादी और अपराधियों द्वारा एफएमाआर के नाम पर अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया जाता रहा है। घुसपैठ , नशीले पदार्थों और हथियारों के तस्करी आदि को लेकर एफएमआर का दुरूपयोग किया जाता रहा है। इसके अलावा सीमावर्ती राज्यों के बीच तरह -तरह के प्रोटोकॉल का पालन किया जाता रहा है । जिसके परिणाम स्वरूप न केवल राज्य बल्कि देश के लिए खतरा उतपन्न होने का अंदेशा लगाया जा रहा है । इस लिहाज से कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार ने एफएमआर मुक्त आवागमन व्यवस्था को प्रतिबंधित किया है।

 

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