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सजा से बचने के लिए बढ़ने लगा है खुद को मृत घोषित करने का चलन 

कई फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि आरोपी अपने आप को किए गए अपराधों की सजा से बचाने के लिए किसी निर्दोष को मौत के घाट उतार देता है। इसके जरिए वो खुद को मृत साबित कर देता है और बाहर बेख़ौफ़ होकर आजादी से जीवन-यापन करता है। फिल्मों में फिल्माया जाने वाला ये तरीका अब फिल्मों या वेब सीरीज तक सीमित नहीं रहा। अपराधियों द्वारा सजा से बचने का यह तरीका अब फ़िल्मी दुनिया से निकल कर असल जिन्दी में अपनाया जाने लगा है ।

शातिर दिमाग वाले एक मृत गैंगस्टर ने भी फ़िल्मी दुनिया के इसी तरीका को अपनाया है । इस शातिर अपराधी ने किए गए अपराधों की सजा से बचने के लिए अपने दोस्त की पहले तो हत्या कर दी और बाद में इसके जरिए खुद को मृत साबित कर दिया। जिसके चलते मुकेश कुमार के मृत साबित होने से उसके ऊपर चल रहे आपराधिक केसों को रोक दिया गया। मुकेश यादव नामक मृत गैंगेस्टर मृत्यु होने के बाद भी जीवित घूमता रहा। हाल ही में मुरादाबाद के रहने वाले इस मृत गैंगस्टर को यूपी पुलिस द्वारा शाहजहांपुर से हिरासत में लिया गया।

हिरासत में लेने के बाद ये खुलासा हुआ कि ये गैंगस्टर मुरादाबाद के मूंढापांडे थाना क्षेत्र के बेलवारी के मझरा इसनगंज का निवासी है। इस अपराधी को उसके द्वारा किये गए अपने अपराधों से बचने के लिए खुद को मृत साबित करने वाला तरीका आसान लगा। इसके लिए उसे अपनी प्लानिंग को अंजाम देना था। उसे इस साजिश के लिए  एक लाश की जरूरत थी। इसके लिए उसने अपने दोस्त को मौत के घाट उतार दिया। अपराधी पकड़ा न जा सकें इसके लिए उसने उत्तराखंड के सितारगंज स्थित पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारी के साथ मिलकर अपने कागजात शव के साथ रखवा दिए और  खुद को मृत साबित कर दिया । प्लानिंग के तहत परिवार के चुनिंदा लोगों से उस शव की मुकेश के रूप में शिनाख्त भी करवा दी गई थी। यही नहीं परिवार वालों से उसका अंतिम संस्कार भी करवा दिया गया।

खुद को मृत साबित करने के लिए दोस्त की बलि

निर्दोष मृतक का नाम मनेंद्र बताया जा रहा है।  मृतक मनेंद्र  के भाई मोनू कुमार के मुताबिक उसके भाई को मुकेश कुमार यादव सुपरवाइजर की नौकरी दिलवाने लाया था। मुकेश कुमार ने उसके भाई से सिक्युरिटी एजेंसी में नौकरी लगाने की बात कही थी।  29 जुलाई साल 2015 में मालुम हुआ कि मुकेश कुमार यादव की मौत हो चुकी है। इसके बाद मनेंद्र के परिवार वालों को उसकी कोई खबर नहीं मिली। मनेंद्र सूरजपुर का रहने वाला था। जिसे इसके घरवाले तलाश कर रहे थे।

मृतक के भाई ने आरोप लगाया है कि गैंगस्टर मुकेश कुमार ने उसके भाई की हत्या की है। हत्यारे को सजा दिलवाने के लिए उसने पुलिस थानों के कई चक्कर लगाए। मोनू कुमार के मुताबिक तत्कालीन थाना और चौकी प्रभारी तथा अधिकारियों से उसने शिकायत की। लेकिन शिकायत की कोई सुनवाई नहीं की गई है । वे सभी सबूत मांगते रहें। इसके बाद उन्होंने अब एसपी सिटी को तहरीर दी है। उन्होंने मृतक के भाई को कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। क्योंकि सारे सबूत अब मौजूद है। आश्वासन पाकर मृतक का भाई अब उम्मीद लगाए है कि अब उसके भाई को न्याय मिल पायेगा। सीओ हाईवे देश दीपक सिंह के अनुसार भी अब गैंगस्टर मुकेश यादव के मुकदमों का ब्यौरा खंगाला जा रहा है। इस अपराधी के मूंढापांडे थाने पर दो केस दर्ज हैं। इसके अलावा अपराधी से सम्बंधित सभी केसों को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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एक अपराध से बचने के लिए किया गया दूसरा अपराध

गौरतलब है कि इस तरह के अपराध का ये मामला पहला नहीं है। इससे पहले भी इसी तरह के वारदात को अंजाम दिया जा चुका है। उस दौरान एसपी ग्रामीण डॉ. ईरज राजा के अनुसार 2018 में अपराधी सुदेश ने अपनी 13 वर्षीय बेटी वंशिका की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। लड़की के दो बार घर से चले जाने के चलते सुदेश ने अपनी बेटी की हत्या कर दी। इस अपराध की सजा से खुद को बचाए रखने की उम्मीद से उसने अपनी बेटी की गुमशुदा  होने की प्राथमिकी तक दर्ज कराई । लेकिन जल्द ही पुलिस द्वारा सच्चाई मालूम होने के बाद सुदेश कुमार को हिरासत में ले लिया गया। लेकिन कोरोना काल के समय  उसे 21 मई को पैरोल पर जेल से छोड़ दिया गया । जब उसे मालूम हुआ की बेटी की हत्या के अपराध में सजा होने वाली है। तब इस अपराधी ने किये गए एक अपराध की सजा से बचने के लिए दूसरा अपराध करने की साजिश रची। सुदेश कुमार को भी  गैंगस्टर मुकेश कुमार की तरह ही खुद को मृत घोषित करने का तरीका सरल लगा था । स्वयं को मृत साबित करने के लिए सुदेश कुमार द्वारा मजदूर रविदास के मौत की साजिश रची गई थी ।

बीते वर्ष दिल्ली के शिव विहार के रहने वाले सुदेश कुमार द्वारा भी जेल और आपराधिक सजा से बचने के लिए एक खौफनाक घटना को अंजाम दे दिया गया था। सुदेश कुमार लेबर चौक पर जाकर अपने जैसी कद काठी वाले मजदूर को काम के बहाने लेकर आया। उसने मजदूर को अपने कपड़े दिए। अगले दिन मजदूर सुदेश कुमार दिए हुए कपड़े पहन कर आया और पार्टी के बहाने सुदेश कुमार ने मजदूर रविदास को रोक लिया। शाम को उसे खूब शराब पीला कर धुत किया गया । नशे में धुत मजदूर की सुदेश और उसकी पत्नी द्वारा हत्या कर दी गई। यही नहीं चेहरा पहचाना न जा सके इसके लिए निर्दोष मजदूर का चेहरा बुरी तरह से जला दिया गया था । अपराधी सुदेश कुमार खुद को मृत साबित कर सकें इसके लिए उसने मजदूर रविदास के पास अपना आधार कार्ड तक रख दिया।

 

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