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टिकैत ने पलटा पासा तो अन्ना ने भी ठोकी ताल ,फिर घिरी सरकार

गणतंत्र दिवस पर  किसानों की ट्रैक्टर परेड के बाद पैदा हुए हालात के चलते किसान आंदोलन लगभग  खत्म की कगार पर था|  कई किसान संघठनो  ने तो  इस आंदोलन से समर्थन भी वापस ले लिया था | ऐसा लग रहा था की आंदोलन की मौत हो चुकी है, लेकिन कल अचानक ही किसान नेता  राकेश टिकैत के आंसुओं ने इस आंदोलन में फिर से जान फूंक दी| उनको आह्वान पर  हजारो की तादात में किसान गाज़ीपुर बॉर्डर पर पहुच रहे है|   इसी बीच समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी किसानों के समर्थन में अनशन का  ऐलान कर दिया है वह 30 जनवरी यानि बापू की पुण्यतिथि पर   रालेगण सिद्धि स्थित यादव बाग मंदिर में आमरण अनशन शुरू करेंगे | अन्ना का कहना है कि वह केंद्र सरकार से कई बार दरख्वास्त कर चुके हैं की  स्वामीनाथन  आयोग की सिफारिश लागू कर दी जाए |  लेकिन ऐसा हुआ नहीं जिसके चलते उन्हें अब आमरण अनशन शुरू करना पड़ रहा हैं|

अन्ना अनशन पर ना बैठे इसके लिए केंद्र सरकार ने भी पूरी कोशिश की और  इसके लिए उन्होंने  पहले महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हरीभाऊ बागडे पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व् भाजपा नेता राधाकृष्ण विखे पाटील सीमित अन्य नेताओ ने  रालेगण सिद्धि में अन्ना से मुलाकात कर उन्हें मनाने की कोशिश कर  चुके हैं लेकिन अन्ना से बातचीत के बाद कोई रास्ता नहीं निकल सका | अन्ना स्वामी नाथन आयोग की सिफारिशें और एमएसपी की मांगों पर अड़े रहे | अब सरकार ने केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी को आज अन्ना को मनाने के लिए भेजा गया है| देखना यह होगा की अन्ना मानेंगे या फिर कल से किसानों के समर्थन में अनशन पर बैठेंगे |

कौन हैं स्वामीनाथन

जब हरित क्रांति की बात चलती है एक शख्स का नाम जरुर आता है.. वो हैं प्रो. एमएस स्वामीनाथन। प्रो. स्वामीनाथन को हरित क्रांति का जनक कहा जाता है, उन्होंने किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए जो सुझाव दिए थे, अगर वो पूरी तरह लागू हो जाएं तो किसानों की दशा बदल सकती है।उन्होंने 1966 में मैक्सिको के बीजों को पंजाब की घरेलू किस्मों के साथ मिश्रित करके उच्च उत्पादकता वाले गेहूं के संकर बीज विकसित किए थे। ‘हरित क्रांति’ कार्यक्रम के तहत ज़्यादा उपज देने वाले गेहूं और चावल के बीज ग़रीब किसानों के खेतों में लगाए गए थे।इस क्रांति ने भारत को दुनिया में खाद्यान्न की सर्वाधिक कमी वाले देश के कलंक से उबारकर 25 वर्ष से कम समय में आत्मनिर्भर बना दिया था। उस समय से भारत के कृषि पुनर्जागरण ने स्वामीनाथन को ‘कृषि क्रांति आंदोलन’ के वैज्ञानिक नेता के रूप में ख्याति दिलाई।एमएस स्वामीनाथन को ‘विज्ञान एवं अभियांत्रिकी’ के क्षेत्र में ‘भारत सरकार’ द्वारा सन 1967 में ‘पद्म श्री’, 1972 में ‘पद्म भूषण’ और 1989 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था।

क्या हैं स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें

किसानों की आर्थिक हालत  और अन्न की आपूर्ति को बेहतर करने के दो मकसदों को लेकर 2004 में केंद्र सरकार ने एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नेशनल कमीशन ऑन फार्मर्स का गठन किया। जिसे  स्वामीनाथन आयोग नाम दिया गया |  इस आयोग ने अपनी पांच रिपोर्टें सौंपी। अंतिम व पांचवीं रिपोर्ट 4 अक्तूबर, 2006 में सौंपी गयी लेकिन इस रिपोर्ट में जो सिफारिशें हैं उन्हें अभी तक लागू नहीं किया जा सका है।

आयोग  की सिफारिशों में किसान आत्महत्या की समस्या के समाधान, राज्य स्तरीय किसान कमीशन बनाने, सेहत सुविधाएं बढ़ाने व वित्त-बीमा की स्थिति पुख्ता बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। एमएसपी औसत लागत से 50 फीसदी ज्यादा रखने की सिफारिश भी की गई है ताकि छोटे किसान भी मुकाबले में आएं, यही ध्येय खास है। किसानों की फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य कुछेक नकदी फसलों तक सीमित न रहें, इस लक्ष्य से ग्रामीण ज्ञान केंद्र व मार्केट दखल स्कीम भी लांच करने की सिफारिश रिपोर्ट में है।

सिंचाई के लिए सभी को पानी की सही मात्रा मिले, इसके लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग व वाटर शेड परियोजनाओं को बढ़ावा देने की बात रिपोर्ट में वर्णित है। इस लक्ष्य से पंचवर्षीय योजनाओं में ज्यादा धन आवंटन की सिफारिश की गई है।

फसली बीमा के लिए सस्ती दरों पर क्रॉप लोन मिले यानि ब्याज़ दर सीधे 4 प्रतिशत कम कर दी जाए। कर्ज उगाही में नरमी यानि जब तक किसान कर्ज़ चुकाने की स्थिति में न आ जाए तब तक उससे कर्ज़ न बसूला जाए। उन्हें प्राकृतिक आपदाओं में बचाने के लिए कृषि राहत फंड बनाया जाए।

उत्पादकता बढ़ाने के लिए मिट्टी की टेस्टिंग वाली लैबों का बड़ा नेटवर्क तैयार करना होगा और सड़क के ज़रिए जुड़ने के लिए सार्वजनिक निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया जाए।

खाद्य सुरक्षा के लिए कम्युनिटी फूड व वाटर बैंक बनाने व राष्ट्रीय भोजन गारंटी कानून की संस्तुति भी रिपोर्ट में है। इसके साथ ही वैश्विक सार्वजनिक वितरण प्रणाली बनाई जाए जिसके लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के 1% हिस्से की जरूरत होगी। महिला स्वयंसेवी ग्रुप्स की मदद से ‘सामुदायिक खाना और पानी बैंक’ स्थापित करने होंगे, जिनसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को खाना मिल सके। कुपोषण को दूर करने के लिए इसके अंतर्गत प्रयास किए जाएं।

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