[gtranslate]
Country

ऑर्गेनिक खेती से हर साल 40 करोड़ रुपये कमाता है ये किसान

ऑर्गेनिक खेती से हर साल 40 करोड़ रुपये कमाता है ये किसान

वर्तमान में किसान अधिक फायदे के लिए रासायनिक खाद और कई तरह फर्टिलाइजर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन एक युवा किसान ऐसे भी है जिन्होंने इन सब चीजों के इस्तेमाल के बिना ही आर्गेनिक खेती की और अब वह हर साल 40 करोड़ का व्यापार करते हैं। निहाल सिंह 35 करोड़ का अकेले आर्गेनिक मेंथा एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी पवित्र मेंथा चलाते हैं जिसके साथ 3000 किसान जुड़े हुए हैं।

किसानों की आत्महत्या खबरों आए दिन आती रहती हैं। जिसके कारण निहाल सिंह के माता-पिता अपने बेटे को किसान बनने नहीं देना चाहते थे। माता-पिता के कहने पर निहाल सिंह ने नौकरी की पर दिल नहीं लगा और जैविक खेती करने की ठान ली। एक बहुराष्ट्रीय कंपनी की नौकरी को छोड़कर खेती करने के अपने प्रयोग के बारे में जब निहाल सिंह ने अपने माता-पिता को बताया तो शुरुआत में उसको ये अच्छा नहीं लगा। पर निहाल अपने माता-पिता को समझाने में सफल रहें और जैविक पद्धति से खेती करने का निर्णय लिया।

बरेली से करीब 40 किमी दूर आंवला में करीब 60 गाँवों के 3000 किसानों को आर्गेनिक खेती सिखाकर उनका माल अपनी कंपनी के जरिए अमेरिका और जर्मनी एक्सपोर्ट करने वाले निहाल सिंह के लिए यह सब आसान नहीं था। लेकिन धीरे-धीरे अपनी खेती को बढ़ाने के बाद उन्होंने जैविक मेंथा की खेती से लेकर खाने पीने की चीजें जैविक तरीके से कैसे उगाएं इसके लिए किसानों को ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी।

निहाल बताते हैं, “मेरा पूरा समर्पण जैविक खेती के लिए है। हमने कुछ स्पेशल नहीं किया बस उसी पुरानी पद्धति में जो हमारे पूर्वज करते थे, उसमें थोड़ा अध्ययन किया और जैविक खेती में लागू किया जो पहले खराब हो चुका है उसे सुधारने के लिए काम किया। जिससे पहले हम शिखर पर थे उन कारणों का भी अध्ययन किया।”

निहाल सिंह अपने खेती में किए गए प्रयोगों के बारे में बताते हुए कहते हैं, “एग्रीकल्चर को लोग सिर्फ खेती ही मान लेते हैं, जबकि ‘कल्चर’ एक पद्धति है, इसे हम लोग भूल-सा गए हैं। हम पहले विश्वगुरू कृषि की ही बदौलत थे। लेकिन आज खेती को निम्न दर्जे का माना जाने लगा।” उन्होंने पहले किसानों को समझाया कि जैविक खेती क्यों आवश्यक है? इसके जरिए वह कहते हैं कि आगे की पीढ़ी को खेती लायक जमींन तो दी जा सके। इसके लिए जैविक खेती निहाल सिंह बताते हैं, “अगर खाना शुद्ध नहीं होगा तो शरीर शुद्ध नहीं होगा, शरीर में विकार से विचारों में विकार आएंगे और समाज भी एक विकार युक्त हो जाएगा।”

वे आगे कहते हैं, “हमने किसानों से आर्गेनिक उत्पाद पैदा कराए और जो आर्गेनिक खाना चाहते थे उन तक पहुंचाया। विदेशी कस्टमर को शुद्ध खाना, तो किसानों को बाजार उपलब्ध कराया।,” अपने इस कठिन सफर में क्या-क्या परेशानियां आई इसके बारे में उन्होंने बताया कि अपने दूर के खेतों में जाने और किसानों की ट्रेनिंग के लिए उन्होंने एक पुरानी मोटरसाइकिल ली और एक ड्राइवर रखा, कुछ दिन तक तो ड्राइवर ने साथ दिया। लेकिन पैसों की तंगी के चलते ड्राइवर को हटाना पड़ गया और धीरे-धीरे खुद ही मोटरसाइकिल चलानी शुरू की दी।

ऑर्गेनिक खेती से हर साल 40 करोड़ रुपये कमाता है ये किसान

वे बताते हैं कि शुरुआत में उनके साथ जुड़े किसानों को नुकसान भी हुआ। जिसकी भरपाई उनको करनी पड़ी। लेकिन हार नहीं मानी। किसान निहाल सिंह बताते हैं, “हमारे पास मार्केटिंग का विभाग नहीं है, अमेरिका और जर्मनी के ग्राहक सीधे आकर मिले।” किसान परिवारों का दर्द करीब से महसूस करने वाले निहाल सिंह बताते हैं, “मैं पढ़ने में अच्छा था, जब मैं छोटा था तो माता जी एक प्राइमरी टीचर को दिखाते हुए हमेशा कहतीं-बेटा एक दिन तू ऐसे ही प्राइमरी टीचर बनना। पिता जी भी कहते थे कि बेटा हम तुम्हें इसलिए पढ़ा रहे हैं कि आगे इस मिट्टी में न लोटो, हमने अपनी पूरी ज़िंदगी इसमें बिता दी।”

अपनी आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने की लिए निहाल सिंह जर्मनी और अमेरिका जैसे कई जैसे देशों में लगातार यात्रा करते रहते हैं। निहाल सिंह की कंपनी ‘पवित्र मेंथा’ ने साल 2019 में कुल 40 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इसमें से 35 करोड़ का कारोबार केवल आर्गेनिक मेंथा का रहा। आर्गेनिक मेंथा की खेती और निर्यात के बारे में निहाल सिंह कहते हैं, “अभी मेंथा के कारोबार में धोखाधड़ी बहुत शुरू हो गई है, आज सिंथेटिक मेंथा का कारोबार ओरिजिनल मेंथ से ज्यादा है। आर्गेनिक की जरूरत ही तब पड़ी जब लोगों ने धोखाधड़ी शुरू कर दी। अब तो सिंथेटिक मेंथा भी आ गया है। जो लोग मेंथा ऑयल से अपना उत्पाद बनाते हैं वो आर्गेनिक मेंथा को तरजीह दे रहे हैं।”

अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों को आर्गेनिक मेंथा के एक्सपोर्ट के बारे में निहाल सिंह बताते हैं, “सारा मेंथा खाने वाली चीजों में जा रहा है। आर्गेनिक मेंथा कॉस्मेटिक या दवाइयों में जाता है, अगर केमिकल हैं तो बहुत खतरनाक होते हैं, स्किन को नुकशान पहुंचाते हैं तो फायदा नहीं होता है, सुगंध का भी असर होता है, आर्गेनिक वाले का थोड़ा अच्छा रहता है।”

साथ ही निहाल बताते हैं, “आर्गेनिक मेंथा में दिक्कत क्या है कि लोग सही तरह से इसे समझ नहीं पा रहे। इंसेक्ट (कीट) लगते हैं बीमारी ज्यादा नहीं लगती। अगर क्राप प्रोटेक्शन (फसल का बचाव) सही रखेंगे तो कीट नहीं लगेंगे। यही हम अपने किसानों को सिखाते हैं।” निहाल अपने साथ काम कर रहे किसानों को वर्मी कम्पोस्ट आदि बनाने की ट्रेनिंग देकर उनकी यूनिट लगाने में मदद करते हैं। जिससे रासायनिक खाद की खपत कम हो और लोगों का पैसा बचे।

मिट्टी की सेहत को सुधारने के लिए निहाल कहते हैं, “कुछ कठोर निर्णय लेने होंगे, पिछली दो पीढ़ियों से केमिकल की लत पड़ गई है, जब तक केमिकल नहीं हटेगा हमारी फसलों से तो जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानक हैं हम पूरे नहीं कर पाएंगे। फर्जी आंकड़ों पर बनती हैं देश की कृषि योजनाएं हम उत्पादन में निपुण हैं, हमारे पास युवा है, ऊर्जा है। ब्रिटानिया हमारा गेहूं 150 रुपये किलो बेच रहा है, 100 ग्राम गेहूं लगा के मैकडोनाल्ड 400 रुपये का पिज्जा बेचता है। जबकि इससे किसान को कितना मिलता है? सरकार इन कंपनियों से कहे कि आर्गेनिक किसान से अच्छे रेट पर खरीदें, इससे क्वालिटी भी सुधरेगी, और किसानों को भी फायदा होगा।”

वे आगे कहते हैं, “भ्रष्टाचार ने बहुत सारी चीजों को निगल लिया है। भ्रष्ट वो लोग हैं जिन्हें जो जिम्मेदारी दी गई वो स्वार्थ बस ईमानदारी से काम नहीं किया। जिन्हें जिम्मेदारी दी गई कि देश की खेती को आगे बढ़ाना है, उन लोगों ने बीज और कीटनाशक कंपनियों को आगे बढ़ाया, जबकि देश पीछे चला गया। पेस्टीसाइड कंपनी का उत्थान हुआ, किसान नीचे आ गया।”

निहाल आगे बताते हैं, “कई चीजों से लड़ा हूं, युवा के लिए रास्ता ही नहीं दिया जा रहा। हर जगह अदृश्य रुकावटें हैं, जब वह जाता है तो सामने वाला जिम्मेदार अधिकारी काम नहीं कर रहा, और तनख्वाह भी ले रहा है। अब उसके सामने दो ही रास्ते बचते हैं, या तो क्राइम या अवसाद।” किसानों को इसके बारे में निहाल सिंह बताते है, “किसान आगे की संभावनाओं से डरकर ज्यादा खर्च करता है। किसान भाइयों से कहूंगा कि खेती पेड़, पौधों और जैविक चीजों का प्रयोग है, उसमें पौधों जंतुओं और सूक्ष्म जीवों का काम है, अगर इसमें रसायन का इस्तेमाल करेंगे तो रिजल्ट हमेशा भयावह आएंगे।”

उन्होंने कहा, “किसानों के मित्र कीट और जीव बहुत सारे होते हैं लेकिन हमने उन्हें दुश्मन कीटों के चक्कर में मार दिया। किसान ज्यादा-से-ज्यादा देसी हरी या आर्गेनिक खाद का प्रयोग करें। किसान यह जरूर सोचें कि जो दवाई और केमिकल हम डाल रहे हैं, वह आगे तक के लिए कितना भयावह होगा।”

इस वक्त किसानों के लिए सबसे बड़ी विडम्बना है कि किसान को सम्मान नहीं मिल रहा। युवा सम्मान पाना चाहता है, जो उसका हक है। समाज में यहां तक है कि अगर किसान अच्छा पैसा कमाता भी है तो भी लोग अपनी बेटी की शादी किसी नौकरी पेशा से ही करना पसंद करते हैं। निहाल सिंह इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहते हैं कि रोटी के बिना कोई जिंदा रह सकता, तो यह मेरी नजर में दिव्य कार्य है। इसके लिए समाज को आगे आना पड़ेगा।

You may also like

MERA DDDD DDD DD