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प्यास लगना मौत है !

जल को जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण बताया जाता है।  लेकिन क्या आपने सुना है कि आपकी मौत पानी से भी हो सकती है। पूरी दुनिया जहरीली हवा में सांस ले रही है और अब हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि केवल हवा ही जहरीली है बल्कि पानी भी जहरीला है। इसलिए अगर आपको भी प्यास लगती है तो ये आपके लिए एक धीमी मौत हो सकती है।
आपको याद होगा 1970 का वो दशक जब भारत में डायरिया और हैजे जैसी बीमारियों की रोकथाम और सिंचाई के लिए बड़े पैमाने पर बोरवेल खोदे गए और बाद में जोर-शोर से हैंडपंप लगाए गए। लेकिन कई जगहों पर इनसे आर्सेनिक युक्त विषैला पानी बाहर निकला जिसके कारण हजारों लोगों ने अपनी जान गंवा दी। लेकिन हालात अब भी वैसे ही हैं। 1970 का वो दशक और वर्तमान में पानी का दूषित होना अब भी जारी है। वर्तमान में प्यास लगना अब भी जानलेवा हो सकता है।
दरअसल, भारत 122 देशों के वर्ल्ड वॉटर क्वालिटी इंडेक्स में बहुत निचले पायदान पर आ गया है। भारत 122 में 120 वें नंबर है। जिसकी वजह है पानी, जिसमें घुली होती है आर्सेनिक नाम की मौत। भारत में ऐसे 20 राज्य हैं जिनके कई जिलों के भूजल में आर्सेनिक की मात्रा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक है। जो खतरनाक है।
भारत के 20 राज्यों के कई जिलों में भूजल में आर्सेनिक की मात्रा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक है।  उत्तराखंड को छोड़कर गंगा-यमुना के किनारे बसे सभी राज्य में पानी प्रदूषित है। राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड, आंध्र प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भी आर्सेनिक का लेवल 0.01 से ज्यादा है।
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स ने क्या कहा ?

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के अनुसार, आर्सेनिक की मात्रा एक लीटर पेयजल में 0.01 मिलीग्राम से ज्यादा होना सेहत के लिए खतरनाक है। क्योंकि इससे स्किन कैंसर , फेफड़े, लीवर और बच्चेदानी की गंभीर बीमारी होने की संभावना है।

क्या है आर्सेनिक ?

आर्सेनिक एक अत्यधिक विषैला तत्व है और इसकी थोड़ी मात्रा भी मानव शरीर को प्रभावित कर सकती है। विज्ञान, चिकित्सा और तकनीकी कार्यों में आर्सेनिक की उपयोगिता जगजाहिर है, लेकिन भूजल में आर्सेनिक की मात्रा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक होने पर स्वास्थ्य पर इसके दुष्प्रभाव दिखने लगते हैं।

भारत के वो 20 राज्य जहां प्यास एक धीमी मौत है 

पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल में 1980 के दशक में पहली बार भूजल में आर्सेनिक के निर्धारित मात्रा से अधिक होने का पता चला और स्थिति आज भी वैसी ही है। आज भी आर्सेनिक की मात्रा हुगली, मालदा, मुर्शीदाबाद, नादिया, 24 परगना उत्तर और 24 परगना दक्षिण जिले में 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक है।

उत्तर प्रदेश
यूपी के बहराइच, देवरिया, लखीमपुर, आज़मगढ़ और बलिया जिले में भी भूजल में आर्सेनिक की मात्रा खतरनाक स्तर की है।  इन जिलों में कई गांव कैंसर पीड़ितों से भरे हुए हैं।

पंजाब
अमृतसर, रोपड़ और तरण तारण जिले के भूजल में आर्सेनिक 0.05 मिलीग्राम प्रतिलीटर से ज्यादा है। आर्सेनिक वाले पानी से सिंचाई करने पर यह भोजन में भी घुल जाता है।

मणिपुर
पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर राज्य में बिष्णुपुर और थोबाल जिले में भूजल आर्सेनिक के कारण अत्यधिक दूषित पाया गया। इसका जिक्र भी भारत के केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट में है।

हरियाणा
कृषि प्रधान राज्यों में शुमार हरियाणा के अंबाला और झज्जर जिले में भी भूजल आर्सेनिक से दूषित है। जमीन से पानी निकालने के लिए लगातार और गहराई तक ड्रिल करने से भी आर्सेनिक पानी में घुल जाता है।

बिहार
बिहार के पटना, गोंडा, कटिहार, सारण और वैशाली समेत 11 जिलों में आर्सेनिक वाले भूजल के कारण 90 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं।  गोंडा में तो आर्सेनिक की मात्रा बहुत ज्यादा है।

झारखंड
कोयला खनन के लिए विख्यात या कुख्यात धनबाद और साहेबगंज जिले में कई गांव आर्सेनिक वाले पानी के चलते बुरी तरह बीमार हैं।

असम
असम के राज्य के तीन जिलों कछार, जोरहाट और नगांव में भूजल के सैंपल लिए गए तो उनमेंआर्सेनिक 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा पाया गया ।

केंद्रीय भूजल बोर्ड को जमीन से जब छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव, कर्नाटक के राइचुर में पानी निकाला गया तब भी अत्यधिक मात्रा में आर्सेनिक मिला। गौरतलब है कि हर साल भारत में दूषित पानी पीने की वजह से दो लाख लोग अपनी ज़िंदगी से हाथ धो बैठते हैं।

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