[gtranslate]
Country

कुछ भी तो नहीं बदला है यूपी में !

आगरा जनपद में तैनात रहे तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक (उत्तर प्रदेश परिवहन निगम) नीरज सक्सेना के खिलाफ भ्रष्टाचार से सम्बन्धित तमाम दस्तावेजों के साथ निगम के ही एक तत्कालीन सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक प्रवीण कुमार ने आला अधिकारियों तक शिकायत पहुंचायी। दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश भी जारी किए गए। नीरज सक्सेना के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर जांच का दायित्व उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के मुख्य प्रधान प्रबंधक (संचालन) एच.एस. गाबा को सौंपा गया। जांच अधिकारी श्री गाबा ने इस प्रकरण की जांच करने के बजाए इस पूरे मामले को यह कहकर समाप्त करने की संस्तुति कर दी कि शिकायतकर्ता प्रवीण कुमार इससे पूर्व भी अपने कई अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें दर्ज करवा चुका है, चूंकि यह शिकायत करने का आदी हो चुका है लिहाजा पूरे परिवाद को समाप्त किए जाने की संस्तुति की जाती है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में भ्रष्टाचार से सम्बन्धित इस मामले की सच्चाई जाने बगैर प्रकरण को इस तरह से समाप्त किए जाने की संस्तुति स्पष्ट संकेत देती है कि कथित भ्रष्ट क्षेत्रीय प्रबंधक को बचाने में निगम के कई अन्य अधिकारियों की मिली भगत रही है। यदि ऐसा नहीं था तो जांच अधिकारी को इस तरह की टिप्पणी अंकित करके मामले को बंद नहीं करना चाहिए था।
इस सच्चाई से कतई इंकार नहीं किया जा सकता है कि भले ही यूपी में सरकारें बदलती रही हों लेकिन यूपी की तस्वीर में कोई बदलाव नजर नहीं आया। वही विभागीय भ्रष्टाचार और भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने के लिए दांव-पेंच। वही शिकायतों का दौर और शिकायतों को फाइलों में दफनाए जाने के पुराने तौर-तरीके। वही रिश्वत लेते हुए पकडे़ जाने पर रिश्वत देकर छूट जाने की पुरानी परम्परा और वही शिकायतों के आधार पर जांच की कछुआ छाप चालें। नयी सरकारों के दावे भी हर बार भ्रष्टाचार को समूल नष्ट किए जाने के होते रहे हैं लेकिन चन्द महीनों की तेजी के बाद सब कुछ जस का तस और जिन पर कार्रवाई का सिलसिला भी शुरु होता है वह भी चन्द दिनों के बाद सत्ताधारी दल के नेताओं को साधकर चतुराई से बच निकलता है। मौजूदा भाजपा सरकार के कार्यकाल का भी कमोवेश यही हाल है। पिछले एक वर्ष के दौरान तमाम भ्रष्ट अधिकारियों को चिन्हित करके कार्रवाई किए जाने का आश्वसान दिया जाता रहा है लेकिन सच्चाई यह है कि अभी भी सैकड़ों-हजारों की संख्या में अधिकारी और कर्मचारी भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी लगा रहे हैं।

भ्रष्टाचार से सम्बन्धित यह मामला आगरा जनपद स्थित परिवहन निगम में संविदा कर्मचारियों के रूप में पीआरडी जवानों की अवैध भर्तियों से सम्बन्धित है। आरटीआई के माध्यम से भ्रष्टाचार की पुष्टि भी हो चुकी है और तमाम शिकायती पत्र सम्बन्धित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को भी दिए जा चुके हैं, इसके बावजूद कथित भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया दूर-दूर तक नजर नहीं आती।

दस्तावेजों को यदि आधार माना जाए तो आगरा परिक्षेत्र के तत्कालीन कथित भ्रष्ट क्षेत्रीय प्रबंधक (उत्तर प्रदेश परिवहन निगम) नीरज सक्सेना का मौजूदा योगी सरकार के कार्यकाल में भी जलवा अफरोज है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि योगी आदित्यनाथ ने सूबे की सत्ता पर कदम रखते ही पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में कथित भ्रष्टाचार की फाइलों को रिओपन कर भ्रष्ट अधिकारियों को दण्डित किए जाने का भरोसा सूबे की आम जनता को दिलाया था। कहा गया था कि पिछली सरकार के कार्यकाल में अंजाम दिए गए भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को शत-प्रतिशत सजा मिलेगी। लगभग एक वर्ष से ज्यादा का समय बीत चुका है इसके बावजूद परिवहन निगम का एक कथित भ्रष्ट क्षेत्रीय प्रबंधक नीरज सक्सेना का बाल भी बांका नहीं हुआ। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिन आला अधिकारियों के कंधों पर सजा देने की जिम्मेदारी थी उन्होंने भी उसका बचाव करते हुए सिर्फ इतना किया कि उन्हे  आगरा परिक्षेत्र से हटाकर उसी पद पर मेरठ में तैनात कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि आगरा परिवहन विभाग में नीरज सक्सेना के खिलाफ आवाज उठाने वाले शांत होकर बैठ जाएं।
नीरज सक्सेना के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाले तत्कालीन सहायक क्षेत्रीय प्रबन्धक (वित्त, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम, आगरा) प्रवीण कुमार ने जनवरी 2018 में एक शिकायती पत्र मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को प्रेषित करते हुए क्षेत्रीय प्रबन्धक नीरज सक्सेना के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
दस्तावेजों के साथ मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में परिवादी प्रवीण कुमार का कहना है कि उसने क्षेत्रीय प्रबंधक नीरज सक्सेना के भ्रष्टाचार से सम्बन्धित शिकायत पुख्ता प्रमाणों के आधार पर की थी लेकिन निगम के चन्द अफसरों की वजह से इस पूरे प्रकरण का दफन किए जाने की कोशिशें हो रही हैं। यहां यह भी बताना जरूरी है कि इससे पूर्व प्रवीण कुमार ने निगम के ही एक उच्च अधिकारी के खिलाफ शिकायत की थी। शिकायत पर कार्रवाई न होने के कारण उसने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय द्वारा मामले की जांच के आदेश पर पूरे मामले का खुलासा हुआ और निगम के कथित भ्रष्ट अधिकारी नरेन्द्र सिंह यादव (सेवानिवृत्ति के पश्चात) के देयकों से नौ लाख से अधिक की रकम की भरपायी की गयी। प्रवीण का दावा है कि यदि इस मामले को भी गंभीरता से लिया जाए तो निगम को हुए नुकसान की भरपायी की जा सकती है।
फरवरी 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए पत्र में शिकायत की गयी है कि क्षेत्रीय प्रबंधक नीरज सक्सेना ने निगम के अन्य अधिकारियों को विश्वास में लेकर योगेन्द्र कुमार नाम के एक कर्मचारी को नियमविरुद्ध तरीके से प्रोन्नति देकर लेखाकार बना दिया। इस गंभीर प्रकरण में मुख्य रूप से जिम्मेदार निगम के अन्य अधिकारियों के साथ ही न तो नीरज सक्सेना के खिलाफ कार्रवाई की गयी और न ही योगेन्द्र कुमार के खिलाफ, मात्र एक कर्मचारी को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। ज्ञात हो लेखाकार पद पर प्रोन्नति के लिए तीन वर्ष का अनुभव जरूरी बताया गया था लेकिन नीरज सक्सेना ने अपने करीबी कर्मचारी को लाभ पहुंचाने की गरज से लिखापढ़ी में अनुभव होना जरूरी नहीं बताया और कूटरचित तरीके से योगेन्द्र कुमार को लेखाकार के पद पर प्रोन्नत कर दिया।
अपर नगर मजिस्टेट (प्रथम), आगरा ने अपनी जांच में उपरोक्त प्रकरण को लेकर जांच की। जांच में उन्होंने पाया कि पीआरडी जवानों को परिचालकों के पद पर भर्ती किया जाना प्रथम दृष्टया नियमानुसार प्रतीत नहीं होता। यह रिपोर्ट मार्च 2018 में ही दी जा चुकी है। लगभग छह माह पश्चात की स्थिति यह है कि न तो आरोपी नीरज सक्सेना के खिलाफ कार्रवाई हो पायी है और न ही उन अधिकारियों के खिलाफ जो इस फर्जीवाडे़ में बराबर के जिम्मेदार रहे हैं।
आरोपी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने का परिणाम यह है कि वह शिकायतकर्ता प्रवीण कुमार और उसके परिवार को परिणाम भुगतने की धमकी दे रहा है।
क्षेत्रीय प्रबंधक नीरज सक्सेना का एक और कारनामा विभाग में खासा चर्चा में बना हुआ है। शिकायती पत्र में कहा गया है कि नीरज सक्सेना ने बुलन्दशहर के पीआरडी अधिकारियों से सांठ-गांठ करके अपना निजी हित साधते हुए 300 से अधिक पीआरडी परिचालकों को फर्जी तरीके से नियुक्त कर दिया। बताया जाता है कि इस मामले में प्रत्येक पीआरडी परिचालकों से सुविधा शुल्क के रूप में मोटी रकम फसूली गयी। यह मामला भी दबा दिया जाता यदि विभाग के एक कर्मचारी द्वारा इस मामले का खुलासा न किया गया होता। भ्रष्टाचार का खुलासा होने पर उस पीआरडी अधिकारी के खिलाफ तो कार्रवाई हुई जिसकी मिलीभगत के चलते इतने बडे़ घोटाले को अंजाम दिया गया लेकिन परिवहन निगम के जिम्मेदार अधिकारियों सहित नीरज सक्सेना के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गयी जबकि इस सम्बन्ध में शिकायती पत्र के साथ वे फर्जी प्रमाण पत्र भी संलग्न किए गए थे जिनके आधार पर पीआरडी जवानों की भर्तियों की गयी थीं।
मुख्यमंत्री को भेजे गए अपने शिकायती पत्र में प्रवीण कुमार (तत्कालीन सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, वित्त) ने उपरोक्त आरोपों के साथ ही अन्य कई आरोप नीरज सक्सेना पर लगाते हुए जांच की मांग की है, साथ ही उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गयी है जिन्होंने दोषी पाए जाने के बावजूद नीरज सक्सेना के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई नहीं की।
फिलहाल भ्रष्टाचार से सम्बन्धित यह मामला जांच रिपोर्ट आने के बावजूद ठण्डे बस्ते में पड़ा है।

You may also like

MERA DDDD DDD DD