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भारतीय स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी ,एक लाख स्कूलों में हैं केवल एक शिक्षक

देश में करीब 1 लाख 20 हजार ऐसे स्कूल हैं जहां सिर्फ एक ही शिक्षक है। यूनेस्को की एक रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से 89 फीसदी ग्रामीण इलाकों में हैं। जबकि भारत को शिक्षकों की कमी को पूर्ति करने के लिए 11 लाख 16 हजार और शिक्षकों की जरूरत है। यह स्टेट ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट-2020 शिक्षकों पर केंद्रित है। इसका डेटा आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) और शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) डेटा के विश्लेषण पर आधारित है। प्रोफेसर पद्म एम सारंगपानी के नेतृत्व में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई के विशेषज्ञों की एक टीम ने रिपोर्ट संकलित करने में यूनेस्को की टीम की सहायता से रिपोर्ट जारी की है ।

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण 2018 पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार अरुणाचल प्रदेश (18.22 फीसदी), गोवा (16.8 फीसदी), तेलंगाना (15.71 फीसदी) ,आंध्र प्रदेश (14.4 फीसदी) एक शिक्षक वाले स्कूलों में शामिल हैं। झारखंड (13.81 फीसदी), उत्तराखण्ड (13.64 फीसदी), मध्य प्रदेश (13.08 फीसदी) और राजस्थान (10.08 फीसदी)। रिपोर्ट में यह भी जानकारी दी गई है कि किन राज्यों में महिला शिक्षकों की संख्या सबसे अधिक है। त्रिपुरा 32 प्रतिशत महिला शिक्षकों की कमी वाले राज्यों में पहले स्थान पर है। इसके बाद असम, झारखंड और राजस्थान का नंबर आता है। सबसे अधिक महिला शिक्षकों वाले राज्यों में चंडीगढ़ 82 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर है। इसके बाद गोवा 80 प्रतिशत, केरल 78 प्रतिशत और दिल्ली 74 प्रतिशत है।

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रिपोर्ट में कहा गया है, “ग्रामीण क्षेत्रों में महिला शिक्षकों का अनुपात शहरी क्षेत्रों की तुलना में कम है।” ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक विद्यालयों में 28 प्रतिशत शिक्षक महिलाएं हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह संख्या 63 प्रतिशत है। माध्यमिक स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में 24 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 53 प्रतिशत महिला शिक्षक हैं। रिपोर्ट के अनुसार 35:1 के अनुपात के आधार पर लगभग 11 लाख 16 हजार 846 शिक्षकों की आवश्यकता है। अतिरिक्त शिक्षकों की कुल आवश्यकता में से 69 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। उच्च मांग वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश में 3.2 लाख और बिहार में 2.2 लाख है। इसके बाद झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में 60 हजार से 80 हजार शिक्षक हैं।

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