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…तब दीदी के सामने दादा होंगे

यदि ममता ने अब राज्य की किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ने को सोची तो भाजपा उनके खिलाफ मिथुन चक्रवर्ती को उतार देगी

नंदीग्राम में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस की प्रत्याशी ममता बनर्जी को घेरने की हर संभव कोशिशें की हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित तमाम केंद्रीय मंत्रियों ने यहां रैलियां और जनसभाएं की, तो जवाब में ममता बनर्जी भी तीन दिनों तक नंदीग्राम क्षेत्र में मोर्चे पर डटी रहीं। भाजपा राज्य को संदेश दे रही है कि जब ममता नंदीग्राम को ही नहीं बचा पा रही हैं, तो अन्य सीटों को भला क्या जीत पाएंगी। सूत्रों के मुताबिक भाजपा की रणनीति न सिर्फ नंदीग्राम तक सीमित है, बल्कि आगे भी वह दीदी को घेरने में कोई कमी नहीं छोड़ेगी। हाालांकि ममता बनर्जी पूरी तरह आश्वस्त हैं कि नंदीग्राम में उनकी जीत पक्की है, लेकिन यदि दीदी का विश्वास डगमगाया और उन्होंने राज्य के किसी अन्य क्षेत्र से भी चुनाव लड़ने का मन बनाया तो सूत्रों के मुताबिक तब ममता ‘दीदी’ के सामने भाजपा की रणनीति ‘दादा’ यानी मिथुन चक्रवर्ती को खड़ा करने की होगी। यानी दीदी को भाजपा उलझाए रखना चाहती है।

दरअसल, बंगाल में भाजपा की रणनीति शुरू से ही तृणमूल कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने और जनता को यह संदेश देने की रही है कि बंगाल से दीदी के पांव उखड़ रहे हैं। यही वजह है कि पार्टी ने बंगाल में पूरी ताकत झोंक डाली है। खुद प्रधानमंत्री मोदी वहां कई सभाएं कर चुके हैं। भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत तमाम नेताओं ने चुनाव प्रचार कर पहले चरण में पूरी ताकत झोंकी है। मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए भाजपा नेता और गृह मंत्री अमित शाह का पहले चरण की 30 सीटों में 26 सीटें जीतने का दावा भी अहम भूमिका निभा सकता है। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में जिन 30 सीटों पर मतदान हुआ है उनमें मतुआ समुदाय सबसे अहम है। इस चरण की लगभग आधी से ज्यादा सीटों पर वह निर्णायक भूमिका में माना जा रहा है। भाजपा ने इस समुदाय को अपने साथ लाने के लिए पूरी कोशिश की है।

प्रधानमंत्री के बांग्लादेश दौरे को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। पहले चरण की सीटों पर पिछले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया था। इस दृष्टि से यह उसका मजबूत गढ़ है, लेकिन भाजपा को भी इसी क्षेत्र में सबसे ज्यादा सेंध लगाने की उम्मीद है। इससे तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच हर सीट पर कड़ा मुकाबला होता दिख रहा है। भाजपा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम में ज्यादा समय देने पर मजबूर करने में सफल रही। गौरतलब है कि इसी सीट पर चुनाव लड़ चुकी ममता नामांकन के दिन को छोड़ कर अपना तीन दिन का समय दे चुकी हैं। ममता मतदान वाले दिन तक नंदीग्राम में ही मौजूद रहीं।


नंदीग्राम सीट पर कांटे की टक्कर का संदेश देने के लिए भाजपा ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को यहां का प्रभारी बनाया। दो और केंद्रीय मंत्रियों को इसी सीट पर लगाने के अलावा संगठन के कई लोगों को यहीं जमे रहने का संकेत दिया। प्रधानमंत्री की रैली कराने के अलावा चुनाव प्रचार खत्म होने के चंद घंटे पहले गृह मंत्री अमित शाह का रोड शो भी कराया गया। दरअसल, टीएमसी के चुनाव प्रचार की सारी रणनीति ममता पर ही केंद्रित है। इसी को ध्यान में रखकर भाजपा ने उन्हें नंदीग्राम में ज्यादा से ज्यादा समय बिताने के लिए मजबूर करने की रणनीति बनाई। इसी रणनीति के तहत टीएमसी छोड़कर भाजपा में आए शुभेंदु अधिकारी को न सिर्फ अपना उम्मीदवार बनाया, बल्कि अधिकारी के जरिए ममता को इस सीट पर चुनाव लड़ने की चुनौती भी दी। भाजपा की रणनीति हर चरण के बाद पार्टी को बढ़त मिलने का संदेश देने की है। पार्टी इसी रणनीति के सहारे आगे बढ़ रही है।

एक ओर जहां भाजपा टीएमसी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराना चाहती है, वहीं ममता भी अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। ममता बनर्जी के चोटिल होने से लेकर अस्पताल पहुंचने और बाहर आने की तस्वीरें बार-बार देश ने देखी। निश्चित रूप से यह ममता एवं तृणमूल कांग्रेस की रणनीति के अनुरूप है। चोटिल या घायल होने वाले के प्रति आम लोगों की स्वाभाविक सहानुभूति होती है। राजनीति में घायल करने का आरोप यदि प्रतिस्पर्धी पर लग जाए तो समर्थक ज्यादा आवेग से नेताओं के इर्द-गिर्द खड़े हो जाते हैं। तृणमूल कार्यकर्ताओं और समर्थकों के एक वर्ग की

आक्रामकता इस बात को दर्शा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो नंदीग्राम में घायल होने के बाद मतदान करते समय ममता और तृणमूल कांग्रेस के प्रति आमजन और समर्थकों की प्रतिक्रिया ऐसी ही होगी। इसमें दो राय नहीं कि ममता को चोट लगी। उन्होंने रणनीति के तहत लोगों की सहानुभूति पाने तथा अपने कार्यकर्ताओं को भाजपा के खिलाफ आक्रामक करने के लिए इसका उपयोग भी किया है। बयान दे दिया कि उन पर चार-पांच लोगों ने हमला किया। वहां से कोलकाता अस्पताल जाते, अंदर बिस्तर पर सिर, पैरों पर प्लास्टर के साथ बीमार अवस्था में लेटी, डाॅक्टरों द्वारा देखभाल किए जाते और फिर व्हीलचेयर पर बाहर निकलती तस्वीरें अपने-आप जारी नहीं हुईं।

इसके साथ उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की अपील वाला अपना एक वीडियो संदेश भी जारी किया। अस्पताल से बाहर होने के पहले उन्होंने बयान दिया कि उन्हें चोट लगी है, लेकिन चुनाव अभियान में अपना सारा कार्यक्रम पूरा करेंगी। व्हीलचेयर पर उन्होंने चुनाव प्रचार आरंभ भी कर दिया। इससे पार्टी के नेताओं और समर्थकों को लगता है कि ममता अब भाजपा के मुकाबले पहले से ज्यादा बेहतर स्थिति में है।

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