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फिर सरकार की नियत पर सवाल!

 

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को एक बड़ा झटका लगा है। दरसअल, केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह सात महीने के अंदर दूसरी बार है जब आरबीआई के किसी उच्च अधिकारी ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ दिया है।
अहम बात यह है कि डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कार्यकाल पूरा होने के करीब छह महीने पहले ही अपना पद छोड़ दिया है। गवर्नर विरल आरबीआई के उन उच्च अधिकारियों में सम्मिलित थे जिन्हें उर्जित पटेल की टीम का हिस्सा माना जाता था। इस संबंध में आरबीआई के मुताबिक विरल आचार्य ने कुछ हफ्तोें पहले ही आरबीआई को एक खत सौंपा था जिसमें बताया गया था कि निजी कारणों के चलते वह 23 जुलाई 2019 से आगे आरबीआई के उपराज्यपाल के रूप में अपना कार्यकाल जारी नहीं रख पाएंगे।
रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर पद से इस्तीफा देने वाल विरल आचार्य केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता और स्वायत्तता के मजबूत पक्षधर रहे हैं। आचार्य ने एक तरह की चेतावनी देते हुए पिछले साल अक्टूबर में कहा था कि ‘केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को यदि कमतर आंका गया तो इसके परिणाम घातक हो सकते हैं।’ भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के अपने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ने वाले विरल आचार्य मौद्रिक नीति विभाग के प्रमुख थे। विरल आचार्य ने 23 जनवरी 2017 को गवर्नर पद ज्वाइन किया था। वह करीब 30 महीने के लिए ही केंद्रीय बैंक के लिए गवर्नर पद पर कार्यरत रहें। हाल में ही हुई मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास और डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के बीच वित्तीय घाटा और इसके सही आकलन के मुद्दों पर असहमति दिखी थी। इससे पहले दिसंबर 2018 में उर्जित पटेल ने आरबीआई गवर्नर कार्यकाल पूरा होने से पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उर्जित पटेल ने भी इस्तीफे का कारण निजी बताया था। उर्जित पटेल के इस्तीफे के पश्चात शक्तिकांत दास को आरबीआई गवर्नर नियुक्त किया गया था।
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में भारतीय इकोनॉमी के हिसाब से उर्जित पटेल का इस्तीफा तीसरा बड़ा इस्तीफा था। इससे पूर्व अरविंद सुब्रमण्यम ने जुलाई 2018 में व्यक्तिगत कारणों से मुख्य सलाहकार के पद को छोड़ा था। वही 2017 अगस्त में नीति आयोग के उपाध्यक्ष रहे अरविंद पनगढ़िया ने पद छोड़ा था। उच्च अधिकारियों का पद कार्यकाल से पहले छोड़ना कहीं न कहीं सरकार के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
सूत्रों से ज्ञात हुआ है आचार्य विरल इस्तीफे के बाद न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में पढ़ाने जाएंगे। बहरहाल, आरबीआई के वरिष्ठ डिप्टी गवर्नर एन विश्वनाथन का कार्यकाल भी खत्म होने वाला है। परंतु विरल आचार्य के अचानक पद छोड़ने के कारण विश्वनाथन का कार्यकाल बढ़ाने पर विचार अवश्य किया जा सकता है।

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