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फिर सुलगने लगी खालिस्तान की आग

भगवंत मान सरकार को अभी पंजाब की सत्ता संभाले महज दो महीने ही हुए हैं। जन अपेक्षाओं के पहाड़ पर खरा उतरने की कठिन डगर मान के सामने है लेकिन इन सबसे कहीं बड़ी चुनौती पंजाब को एक बार फिर से अलगाववाद की राह पकड़ने से रोकने की है। राज्य में पिछले दिनों की घटनाओं ने इस आशंका की पुष्टि कर दी है कि ‘खालिस्तान’ की आग को देश विरोधी ताकतें एक बार फिर सुलगाने का प्रयास कर रही है

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खालिस्तानी समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू

30 अप्रैल : पंजाब के पटियाला में इस दिन दो समुदायों के बीच झड़प हो गई। जिसमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित तीन लोग घायल हो गए। इस दिन खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने खालिस्तान स्थापना दिवस मनाने का ऐलान किया था। इस पर शिवसेना बाल ठाकरे नामक स्थानीय हिंदू संगठन ने इसका विरोध किया था। पुलिस ने लोगों को शांत करने की कोशिश भी की। लेकिन मामला काफी बिगड़ गया। इस रैली के दौरान कुछ लोगों ने खालिस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगाए। एक स्थानीय हिंदू संगठन ने पटियाला में खालिस्तानी मुर्दाबाद मार्च निकालने का ऐलान कर दिया था। जब हिंदू संगठन ने मार्च निकाला, तो दूसरी तरफ खालिस्तान समर्थकों ने जमकर इसका विरोध किया। जिससे दोनों गुटों में तनाव बढ़ गया। इसके बाद पत्थरबाजी और बवाल शुरू हो गया था। जिसमें कई लोग घायल हो गए थे।

5 मई : हरियाणा के करनाल जिले से चार संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार बरामद हुए। बरामद विस्फोटकों में तीन आईईडी भी शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना था कि आतंकियों ने दिल्ली को दहलाने की साजिश रची थी। इस दौरान पुलिस की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की वजह से आतंकवादियों को दिल्ली पहुंचने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया। बताया गया कि पकड़े गए बब्बर खालसा के संदिग्ध आतंकियों को पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियारों की सप्लाई की गई थी। उनके कब्जे से गोला-बारूद के कंटेनर भी पकड़े गए।

8 मई : इस दिन हिमाचल प्रदेश की विधानसभा के गेट और चारदीवारी पर खालिस्तानी झंडा फहराया गया। सिख फॉर जस्टिस ने 29 मार्च को ही खालिस्तानी झंडा फहराने की धमकी दी थी। लेकिन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते वह अपने नापाक मंसूबों में कामयाब नहीं हो सका था। बताया जा रहा है कि हिमाचल में भिंडरावाले और खालिस्तान समर्थित झंडों पर बैन की वजह से पन्नू भड़का हुआ है। पंजाब का पड़ोसी राज्य होने की वजह से भी हिमाचल में खुफिया एजेंसियां पहले से ही अलर्ट हैं।

9 मई : पंजाब पुलिस के मोहाली स्थित खुफिया विभाग के मुख्यालय पर रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड से ब्लास्ट किया गया। हालांकि इस घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन मुख्यालय के भवन के दूसरे फ्लोर के सामने धमाका हुआ। जिससे खिड़कियों से शीशे टूट गए। सूचना मिलते ही पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने डीजीपी से पूरे मामले की जानकारी ली। घटना के बाद पंजाब पुलिस ने आस-पास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। हमले के बाद मोहाली जिला प्रशासन की ओर से कहा गया कि यह आतंकवादी हमला नहीं है। लेकिन घटनास्थल पर गहन जांच के बाद जब मोहाली के एसपी (मुख्यालय) रविंदर पाल से पूछा गया कि क्या इसे आतंकवादी हमला माना जा सकता है या नहीं तो उन्होंने कहा कि इस हमले को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है, हम इसकी जांच कर रहे हैं।

महज 10 दिन में हुई यह चौथी आतंकी घटना देश के अमन चैन पर घातक हो सकती है। पंजाब में पिछले कुछ दिनों से खालिस्तानी गतिविधियां बढ़ी है। यहां तक की पंजाब के कुछ इलाकों में पुलिस को विस्फोटकों से भरी कार मिली है। ऐसे में इस घटना को आतंकियों के प्रयोग के तौर पर भी देखा जा सकता है। वह भी जब इनमें अलगाववादी संगठनों का हाथ हो। अगर यही हाल रहा तो यह संगठन खालिस्तान के मुद्दे पर फिर से आग सुलगा सकते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इस बार खालिस्तान का यह मुद्दा सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसी के साथ हिमाचल प्रदेश और हरियाणा को अपनी गिरफ्त में लेता हुआ दिखाई दे रहा है। इससे 80 के उस दशक का स्मरण होता है जब खालिस्तान के नाम पर पंजाब को आतंकी गतिविधियों का अड्डा बना दिया गया था।

80 के दशक में पंजाब में उग्रवाद की शुरुआत हुई। भारत विरोधी इस हिंसक आंदोलन में हजारों बेकसूर लोगों को अपनी जानें गंवानी पड़ी थी। आतंकियों ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में अकाल तख्त पर कब्जा कर लिया था। 1984 में भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर परिसर में कब्जा किए बैठे खालिस्तानी चरमपंथियों को निकालने के लिए बड़ी सैन्य कार्रवाई की थी। ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के जरिए यहां कब्जा जमाए बैठे जरनैल सिंह भिंडरावाला को ढेर कर दिया गया। खालिस्तान समर्थक आतंकियों ने स्वर्ण मंदिर के हरमंदिर साहिब में ठिकाना बनाया हुआ था। उस वक्त यह कहा जा रहा था कि अगर हालात काबू में नहीं हो पाते तो पंजाब हमारे हाथ से निकल सकता है। तब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्देश पर हुए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ की वजह से देश एक बड़ी मुश्किल से तो बच निकला था। लेकिन खुद इंदिरा गांधी नहीं बच सकी थी। उनको इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी। 31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री के सिख सुरक्षाकर्मियों ने ही ताबड़तोड़ गोलियां बरसाते हुए उनकी दिल्ली स्थित 1-सफदरजंग रोड आवास पर हत्या कर दी थी।

बताया जाता है कि ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के दौरान उग्रवादी भिंडरावाला की मृत्यु से सिख समुदाय में इंदिरा सरकार के खिलाफ गुस्सा था। ऐसा नहीं है कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद ही खालिस्तान का यह मुद्दा खत्म हो गया हो बल्कि इसके बाद भी खालिस्तान का मुद्दा बीच-बीच में सामने आता रहा। इसके एक साल बाद 23 जून 1985 को एयर इंडिया के एक विमान में विस्फोट किया गया। जिसमें 329 लोगों की मौत हो गई थी। इसके एक साल बाद 10 अगस्त 1986 को ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ का नेतृत्व करने वाले पूर्व आर्मी चीफ जनरल एएस वैद्य की दो बाइक सवार बदमाशों ने पुणे में हत्या कर दी। यही नहीं, बल्कि 31 अगस्त 1995 को पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई। इन सभी हत्याओं में खालिस्तानी समर्थकों का नाम आया था।

फिलहाल, एक बार फिर पंजाब में खालिस्तान के मुद्दे पर अलगाववादी सक्रिय हो उठे हैं। 10 दिन में चार आतंकी घटनाएं इसका उदाहरण मात्र है। बताया जा रहा है कि इटली, कनाडा और अमेरिका के कुछ लोग पंजाब में आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं। लेकिन इस मामले में पाकिस्तान का नाम मुख्य तौर पर सामने आ रहा है। बताया तो यहां तक जा रहा है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की ओर से पंजाब में स्लीपर सेल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें पंजाब के बेरोजगार युवकां को उतारा जा रहा है। उनको पैसे के अलावा अन्य प्रलोभन दिए जा रहे हैं। इसको आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू के ऐलान से भी जोड़कर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि ‘जस्टिस फॉर सिख’ के आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने ऐलान किया था कि भारत के पंजाब में अगर कोई भी व्यक्ति खालिस्तान का झंडा फहराता है तो उसे 2500 डॉलर का इनाम दिया जाएगा। इसके अलावा अगर कोई लाल किला दिल्ली में जाकर खालिस्तान का केसरी झंडा लहराएगा तो उसे सवा लाख डॉलर का इनाम दिया जाएगा। इसके बाद से ही पंजाब में पन्नू के स्लीपर सेल सक्रिय बताए जा रहे हैं। भारत में प्रतिबंधित संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ गुरुग्राम के साइबर क्राइम थाना में केस दर्ज है। पन्नू पर देशद्रोह, दो समुदायों को भड़काने के आरोप में मुकदमा दर्ज है। पन्नू ने पंजाब को भारत से अलग करने और गत 29 अप्रैल को गुरुग्राम से लेकर अंबाला तक सभी डीसी एवं एसपी कार्यालय पर खालिस्तान का झंडा फहराने के ऐलान का वीडियो जारी किया था।

पन्नू के अलावा और भी कई सक्रिय खालिस्तान समर्थक पंजाब के युवाओं को ‘मिशन खालिस्तान’ से जोड़कर उनको बहका रहे हैं। इसमें गैंगस्टर हरविंदर सिंह रिंदा का नाम भी सामने आ रहा है। रिंदा के पाकिस्तान पहुंचने की खबरें हैं। वहीं से रिंदा गैंगस्टर जयपाल भुल्लर और दिलप्रीत बाबा से संपर्क कर पंजाब के बेरोजगार युवाओं को खालिस्तान की इस अंधी सुरंग में धकेल रहा है। गैंगस्टर हरविंदर सिंह रिंदा के अलावा पंजाब से फरार होकर पाकिस्तान में शरण ले चुके खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के चीफ रंजीत सिंह नीटा, इंडियन सिख यूथ फेडरेशन के चीफ भाई लखबीर सिंह रोडे, खालिस्तान कमांडो फोर्स के परमजीत सिंह पंजवड़ और आतंकवादी बब्बर खालसा इंटरनेशनल के चीफ वधावा सिंह भी खालिस्तान के नाम पर भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय बताए जा रहे हैं।

अमृतसर के खासा इलाके में 15 अगस्त 2021 की रात में हैंड ग्रेनेड और पिस्तौल के साथ सुल्तानविंड रोड के अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार किया गया था। बताया गया कि अमृतपाल सिंह पिछले पांच साल से आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के लिए स्लीपर सेल के रूप में काम कर रहा था। इस गैंग के द्वारा ही 24 अप्रैल को चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल को उड़ाने की कोशिश की गई थी। जेल की पिछली दीवारों के पास डेटोनेटर और तार मिले थे। इस जेल में कई खालिस्तानी कट्टरपंथी और गैंगस्टर बंद हैं। बताया जाता है कि इसी जगह पर वर्ष 2004 में 109 फुट सुरंग खोदी गई थी। इसी सुरंग के जरिए पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे परमजीत सिंह भौरा, जगतार सिंह हवारा, जगतारा सिंह तार और रसोइया देवी सिंह फरार हो गए थे।

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