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  • वृंदा यादव

 

केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ किसान एक बार फिर से गोलबंद होंगे। इसके लिए तैयारी की जा रही है। किसान नेता टिकैत ने कहा कि आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से कई बड़े वायदे किए गए थे। लेकिन सरकार ने जो भी वायदा किया, वह आज तक पूरा नहीं हो पाया है। यही कारण है कि हम फिर से आंदोलन करने को विवश हैं

केंद्र की मोदी सरकार के बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ साल तक चले किसान आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले राकेश टिकैत एक बार फिर से सरकार के खिलाफ हुंकार भरने की तैयारी कर रहे हैं। खबरों के मुताबिक 26 नवंबर से किसान एक बार फिर से सरकार के खिलाफ गोलबंद होंगे। इसके लिए तैयारी भी की जा रही है। दरअसल, 26 नवंबर 2020 को दिल्ली के बॉर्डर पर किसान आंदोलन की शुरुआत हुई थी। राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से कई बड़े वायदे किए गए थे। लेकिन सरकार ने जो भी वायदा किया, वह आज तक पूरा नहीं हो पाया है। यही कारण है कि हम फिर से आंदोलन करने को विवश हुए हैं। इसके लिए संयुक्त किसान मोर्चा किसानों के साथ तैयारी में लगा हुआ है और योजनाओं पर विचार किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि संयुक्त किसान मोर्चा किसानों के साथ मिलकर 26 नवंबर को देश भर में आंदोलन करेगा। इस दौरान हर राज्य के राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा। साथ ही जिला प्रशासन को भी यह ज्ञापन दिया जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष किसान आंदोलन के दौरान लखीमपुर के तिकुनिया में हुई हिंसा को एक वर्ष पूरे होने के मौके पर किसान नेता राकेश टिकैत ने हिंसा में मारे गए निर्दोष किसानों को श्रद्धांजलि देने के बाद कहा कि मृतक किसानों के न्याय के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी। इसके लिए वे एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत करेंगे। जिसमें किसानों की मांगों के साथ लखीमपुर में हुए कांड में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी को पद से हटाने और अभी तक जेल में बंद किसानों की जमानत जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई जाएगी। दरअसल 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का कार्यक्रम था जिसके लिए वे हेलीकॉप्टर से आने वाले थे, लेकिन हैलीपैड पर किसानों ने धरना-प्रदर्शन कर वहां कब्जा कर लिया था। किसानों को हटाए जाने के प्रयास में असफल होने के बाद केशव प्रसाद को लाने के लिए गाड़ियां भेजी गईं जो केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा की थी। जब यह गाड़ियां लखीमपुर के तिकुनिया गांव में पहुंची तो किसानों ने रास्ते में धरना-प्रदर्शन शुरू कर रास्ता बंद कर रखा था।

जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच पहले तो झड़प हुई और बाद में आशीष मिश्रा ने मानवता को शर्मशार करते हुए किसानों पर अपनी गाड़ी चढ़ा दी जिसमें 4 किसानों की मौत हो गई और लगभग 13 किसान घायल हो गए। गुस्साए किसानों ने भी विरोध करते हुए गाड़ियों में आग लगा दी और कार चला रहे 4 लोगों को पीट-पीटकर मार डाला जिसमें एक पत्रकार, दो बीजेपी नेता और एक ड्राइवर शामिल था। तब बढ़ती हिंसा को देखते हुए राज्य सरकार ने लखीमपुर में धारा 144 लागू कर दी। स्कूल, कॉलेज व इंटेरनेट जैसी सुविधाओं पर भी रोक लगा दी गई। साथ ही एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर किसानों पर गाड़ी चढ़ाए जाने के आरोप में आशीष मिश्र सहित करीब 12 अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था। वहीं गाड़ी में आग लगाने और गाड़ी चला रहे लोगों की पीट-पीट कर हत्या करने अपराध में कई किसानों को गिरफ्तार किया गया था जो अभी भी जेल में हैं। तब तत्कालीन राज्य सरकार ने किसानों के गुस्से को शांत करने के लिए किसानों के साथ जो समझौता किया था।

सरकार उस समझौते पर अभी तक खरी नहीं उतर पाई है जिससे नाराज किसान एक बार फिर गोलबंद होने लगे हैं।  किसानों का यह भी आरोप है कि किसानों की मौत के बाद कमिश्नर रंजन कुमार, आईजी लक्ष्मी सिंह व तत्कालीन डीएम एसपी के साथ हुए समझौते का अभी तक पालन नहीं किया गया है। गौरतलब है कि इस घटना के बाद राज्य सरकार ने किसानों के साथ एक समझौता किया था जिसके तहत सरकार उन किसानों, जिन्होंने अपनी जान गंवाई उनके परिजनों को 45 लाख रुपये का मुआवजा और घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने तथा घायल किसानों को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक न तो पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी मिली और न ही घायलों को 10 लाख का मुआवजा मिला है।

 

लखीमपुरखीरी शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे किसान नेता

 

 

क्या कहती है एसआईटी की रिपोर्ट

आरोपी आशीष मिश्रा हर बार अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत ठहरा रहा था लेकिन 14 दिसंबर को पेश की गई विशेष जांच दल (एसआईटी) एक रिपोर्ट के अनुसार यह सिद्ध हो गया की यह कांड महज कोई हादसा नहीं एक साजिश थी। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिया गया था कि केस में बदलाव करते हुए हत्या, हत्या के प्रयास और अंग-भंग करने की धाराएं लगाई जानी चाहिए। इस रिपोर्ट के साथ ही अजय मिश्रा के इस्तीफे की मांग भी तेज होने लगी। एसआईटी की रिपोर्ट पर उस वक्त संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा था कि ‘‘एसआईटी की जांच रिपोर्ट, संयुक्त किसान मोर्चा और विरोध कर रहे किसानों के रुख की पुष्टि करती है कि लखीमपुर खीरी की घटना एक पूर्व नियोजित नरसंहार थी। इस बीच, घटना के मुख्य सूत्रधार अजय मिश्रा टेनी खुले-आम घूम रहे हैं, और केंद्र सरकार में अपनी पद पर बने हुए हैं। नवीनतम निष्कर्षों के आलोक में, एसकेएम मांग करता है कि मोदी सरकार इस ‘लखीमपुर खीरी में किसान हत्याकांड के साजिशकर्ता’ को बचाना बंद करे और उसकी बर्खास्तगी और गिरफ्तारी करे। इस मुद्दे पर एसकेएम अपना संघर्ष जारी रखेगा। भारत के किसान इस नरसंहार को तब तक नहीं भूलेंगे, जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिल जाता।’’

आशीष मिश्रा पर मुकदमा दायर

इस मामले में आशीष मिश्रा के साथ-साथ करीब 12 अन्य लोगों को भी दोषी ठहराया गया था। जिनमें से 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया। जिनके खिलाफ धरा 147, 148, 149 (दंगे भड़काने से संबंधित), 279 (गाड़ी चलने के नियमों का उल्लंघन), 338 (दूसरों को नुकसान या चोट पहुचाना), 304 (लापरवाही के कारण मौत), 302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक साजिश रचने) के तहत केस दर्ज किया गया। इसके बाद 10 फरवरी 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आशीष मिश्रा को जमानत दी थी। सुनवाई पहले ही हो चुकी थी। कोर्ट ने इस पर अपना फैसला सुनाया था। जिसके बाद 15 फरवरी 2022- जमानत मिलने के बाद आशीष मिश्र जेल से रिहा हो गया था। लेकिन किसान परिवारों के लिए यह न्यायपूर्ण फैसला नहीं था। दूसरी ओर आशीष की रिहाई के बाद से ही गवाहों पर हमले किए जाने के मामले सामने आने लगे। किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में मदद की गुहार लगाई और अशीष मिश्रा को रिहा किए जाने के फैसले का विरोध किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों को सुरक्षा प्रदान की और इलाहाबाद हाई कोर्ट को इस मामले पर वापस जांच करने का आदेश दिया। जिसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करते हुए कहा कि रिकॉर्ड के साक्ष्यों के के मुताबिक इन्हें रिहा नहीं किया जा सकता। इसके बाद से आशीष मिश्रा पर कार्यवाही जारी है। लेकिन इससे किसानों को पूर्ण न्याय नहीं मिला क्योंकि अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर तो कार्यवाही जारी है लेकिन किसानों का कहना है कि सरकार अजय मिश्रा को बचाने का प्रयास कर रही है। यही कारण है कि वह अभी तक अपने पद पर कार्यरत हैं और उन पर किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की जा रही है।

इस विषय पर राकेश टिकैत ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा पिछले साल तीन अक्टूबर को हुई तिकुनिया में शांतिपूर्ण आंदोलन कर लौट रहे किसानों पर थार गाड़ी चढ़ा दी गई थी। हिंसा में चार किसान और एक पत्रकार मारे गए थे, जबकि 13 से अधिक किसान घायल हुए थे। यह एक सुनियोजित षड्यंत्र था, जो केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी ने अपने बेटे आशीष मिश्रा के साथ मिलकर रचा था। टेनी धारा 120बी (आपराधिक साजिश रचने) के मुजरिम हैं, लेकिन सरकार उन्हें बचा रही है।

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