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थिएटर ऑफ लाफ्टर के लिए याद किए जायेंगे रंगकर्मी बंसी कौल

प्रसिद्ध रंगकर्मी बंसी कौल ने छह फरवरी को दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए। कौल लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वह गंभीर बीमारी कैंसर से पीड़ित थे। उनका ऑपरेशन भी किया गया। लेकिन ऑपरेशन होने के बावजूद अस्वस्थ रहे। बीते वर्ष नवंबर से उनकी सेहत लगातार बिगड़ती चली गई। कल सुबह 8 बजे दिल्ली स्थित द्वारका में उन्होंने अंतिम सांस ली। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से स्नातक रहे 71 वर्षीय कौल ने भोपाल में रंग विदूषक के नाम से अपनी पहचान बनाई। वर्ष 1984 से रंग विदूषक ने देश- विदेश में अपनी नाट्य शैली की वजह से उनकी अलग पहचान बनी। कौल देश के एक चर्चित डिजाइनर भी थे।

कौल ने कई बड़े इवेंट्स की डिजाइनिंग की। आखिरी दिनों तक बंसी कौल रंगकर्म और नाटकों की दुनिया को लेकर हमेशा चिंतित भी रहते थे। बंसी कौल थिएटर आफ लाफ्टर, सामूहिकता, उत्सव धर्मिता को लेकर एक नया काम भी कर गए। कौल की संस्था रंग-विदूषक प्रत्येक शैलियों में करीब 80 से ज्यादा नाट्क तैयार कर गए। देश-विदेश के 115 से अधिक शहरों के प्रेक्षागृहों, सभागारों में संस्था प्रदर्शन कर चुकी है। गांव की चैपालों, महल और हवेलियों के आंगन, नदी के घाटों और रेगिस्तान में रेत के टीलों पर हुए संस्था के प्रदर्शनों को आज भी याद किया जाता है।

संस्था ने शोलापुर, ग्वालियर, इन्दौर, उज्जैन, चैन्नई, बैंगलोर, महेश्वर, रायगढ़ और दिल्ली तक रहा। इन राज्यों में समय पर रंगशिविर आयोजित भी किए। कौल अपनी संस्था के जरिए सूरीनाम, कोलम्बिया, बांग्लादेश, डेनमार्क, सिंगापुर, पाकिस्तान में आयोजित थियेटर फेस्टिवल में नाटक मंचित कर चुके है। रंग विदूषक के कलाकार थाईलैण्ड, स्विटरजरलैंड, रूस में आयोजित भारत महोत्सव, जर्मनी में पुस्तक मेले, दिल्ली में आयोजित 19 वें राष्ट्रमंडल खेल, गोवा में आयोजित ल्युसोफोनिया गेम्स 2014 और चेन्नई में आयोजित फुटबाल लीग के उद्घाटन समारोह के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी शामिल हो चुके हैं।

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