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चौतरफा फैलता अवैध क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग का मकड़जाल

 
पूरी दुनिया में क्रिप्टोकरेंसी का तिलिस्म बढ़ता ही जा रहा है। कुछ सालों से चर्चा में आई क्रिप्टोकरेंसी ने दुनिया भर में काफी कम समय के भीतर ही अपनी अलग पहचान बना ली है। आज के युग में जहां क्रिप्टो की डिमांड बढ़ती जा रही है वहीँ इससे होने वाले जोखिम भी बढ़ते ही जा रहे हैं। क्रिप्टोकरेंसी का अवैध रूप से माइनिंग की घटनाये रोज़ाना सामने आने लगी हैं। जिस कारण समाज में यह एक चिंता का विषय बन गया है। इसी चिंता को बढ़ाते हुए हालही में रूस में अवैध क्रिप्टो माइनिंग एक मामला सामने आया है। 
 
गौरतलब है कि यह अवैध माइनिंग काफी समय से रूस की सबसे पुरानी जेल ‘ब्यूटिरका’ में हो रही थी। इसके लिए जेल के एक वॉर्डन को इलेक्ट्रिसिटी की चोरी करने का आरोपी बताया गया है। रूस की राजधानी मॉस्को में यह जेल 1771 में बनाई गई थी और इसमें लगभग दो हजार कैदी रखे जाते हैं।इस मामले की पुलिस के द्वारा जांच की जा रही है। 
 
यह मामला तब सामने आया जब जेल के एक क्लिनिक में माइनिंग इक्विपमेंट पकड़ा गया था। बिटकॉइन डॉट कॉम ने एक रिपोर्ट में बताया कि जांच करने वाले अधिकारियों को जेल के अंदर क्रिप्टो माइनिंग पिछले वर्ष नवंबर से की जा रही थी। इसके लिए इस वर्ष फरवरी तक 8,400 kW से अधिक की इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल होने का अनुमान लगाया गया है। यह इलेक्ट्रिसिटी जेल में इस्तेमाल के लिए थी लेकिन इसका इस्तेमाल क्रिप्टो माइनिंग के लिए किया गया। जांच के घेरे में आए वॉर्डन और उसके सहयोगियों के बारे में जानकारी प्राप्त पुलिस इन्वेस्टिगेशन की जा रही है। क्रिप्टो माइनिंग में बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल होता है। क्योंकि इसमें हाई क्वालिटी कम्प्यूटर्स का इस्तेमाल किया जाता है। क्रिप्टोकरेंसी की अधिक माइनिंग के कारण कई देशों में इलेक्ट्रिसिटी की कमी हो चुकी है। इन देशों में चीन, कजाकिस्तान और ईरान शामिल हैं।

हालांकि, रूस क्रिप्टो माइनिंग को कानूनी दर्जा देने पर विचार कर रहा है। इससे माइनिंग के लिए जरूरी इलेक्ट्रिसिटी को प्रोड्यूस किया जा सकेगा और इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई में रुकावट नहीं आएगी। रूस के डिप्टी एनर्जी मिनिस्टर ‘एवगेनी ग्रैबचक’ ने भी मार्च में रूस में कानूनी तौर पर क्रिप्टो माइनिंग करने वालों की पहली कॉन्फ्रेंस में क्रिप्टो माइनिंग को कानूनी दर्जा देने और इसे रेगुलेट करने का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि रूस में माइनिंग के लिए उपयुक्त साइट्स की पहचान करने के साथ ही इसके लिए जरूरी इलेक्ट्रिसिटी की व्यवस्था की जानी चाहिए।

इससे पहले क्रिप्टो माइनिंग में इलेक्ट्रिसिटी की अधिक खपत होने के कारण चीन ने पिछले वर्ष माइनिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। ईरान ने भी हाल ही में इस कारण से क्रिप्टो माइनिंग को अस्थायी तौर पर बंद करने का आदेश दिया था। बिटकॉइन माइनिंग करने वाले बड़े देशों में शामिल अमेरिका के टेक्सास में माइनिंग के कारण इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई में रुकावट आई थी। इसका टेक्सास के लोगों ने काफी विरोध किया था। कई देशों में अवैध क्रिप्टो माइनिंग के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए हैं।

 
क्या होती है डिजिटल करेंसी?

क्रिप्टो करेंसी दरअसल, वित्तीय लेन-देन का एक जरिया है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे भारतीय रुपये और अमेरिकी डॉलर । अंतर सिर्फ इतना है कि यह आभासी है और दिखाई नहीं देती, न ही आप इसे छू सकते हैं। इसलिए इसे डिजिटल करेंसी भी कहते हैं। इसका पूरा कारोबार ऑनलाइन माध्यम से ही होता है। जहां एक ओर किसी भी देश की करेंसी के लेनदेन के बीच में एक मध्यस्थ होता है, जैसे भारत में केंद्रीय बैंक, लेकिन क्रिप्टो के कारोबार में कोई मध्यस्थ नहीं होती और इसे एक नेटवर्क द्वारा ऑनलाइन संचालित किया जाता है। यही कारण है कि इसे अनियमित बाजार के तौर पर जाना जाता है, जो पल में किसी को अमीर बना देता है और एक झटके में उसे जमीन पर गिरा देता है। लेकिन बावजूद इस उतार चढ़ाव के इसको लेकर लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही है। 

 

क्रिप्टोकोर्रेंसी माइनिंग कैसे होती है

 

हमारी धरती पर जो सोना और चांदी है धरती और पहाड़ों से खोदकर निकाला जाता है जिसे माइनिंग कहा जाता है और बिल्कुल इसी तरह कोयला भी माइन किया जाता है। अगर आप रुपए और डॉलर को देखें तो उसे भी मिंट (छापे) किया जाता है और ठीक उसी तरह क्रिप्टोकरेंसी को भी जब बनाया जाता है तो उसे मिनटिंग या माइनिंग कहते हैं। 
 
क्रिप्टो करेंसी को माइन करना इतना आसान नहीं जितना की सोना माइनिंग और नोट छापना होता है। क्योंकि क्रिप्टो करेंसी एक डिजिटल करेंसी है तो इसे माइन करना थोड़ा मुश्किल और जटिल  होता है। जब माइनिंग की जाती है तब माइनिंग करने वाले मैकर्स अपने अलग-अलग कंप्यूटर और हार्डवेयर की मदद से एक साथ माइनिंग सॉफ्टवेयर रन करते हैं। जिसमे एक ही समय में अधिक बिजली की ज़रूरत पड़ती है। माइनिंग सॉफ्टवेयर सभी क्रिप्टोकोर्रेंसी के अलग-अलग होते हैं क्योंकि सभी क्रिप्टोकरंसी के कोड अलग-अलग प्रकार के होते हैं। इसलिए जब कोई माइनर किसी क्रिप्टो करेंसी को माईन करने की कोशिश करता है उस वक्त एक समय में एक साथ कई लोग उस क्रिप्टोकोर्रेंसी को माइन करने की कोशिश करते हैं जिसमें एक समय में से कोई एक व्यक्ति ही सफलता पूर्वक माइन कर पाता है।

हम कितने और कितनी गति से क्रिप्टो करेंसी माइन कर पाते है यह कंप्यूटर के हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, बिजली, इंटरनेट पर निर्भर होता है। मीनिंग के इस जटिल क्रिया में हर एक समय ब्लॉक माइन होता है। सीधे तौर पर हर एक ब्लॉक बनने में 10 मिनट का समय लगता है और जब भी एक ब्लॉक माइन किया जाता है तब कुछ नए क्रिप्टो करेंसी/बिटकॉइन बनते हैं। जब भी आप किसी भी क्रिप्टोकरेंसी को किसी को भेजते हैं तो उसे भेजने के लिए कोई कंपनियां या कोई संस्था नहीं होती है इसलिए किसी भी क्रिप्टोकरंसी की ट्रांजैक्शन के लिए क्रिप्टो माइनर की मदद लेनी पड़ती है। जैसा कि आपने किसी को 10 बिटकॉइन भेजें तो उस बिटकॉइन को दूसरे व्यक्ति के वॉलेट तक पहुंचाने का काम क्रिप्टो माइनर का होगा जिसके बदले उस क्रिप्टो माइनर को उस 10 बिटकॉइन के सफलतापूर्वक ट्रांजैक्शन के लिए एक बिटकॉइन तक का रिवार्ड के रूप में मिलेगा
 
 
 
 
 

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