[gtranslate]
Country

डॉक्टरों पर हमले का सच आया सामने, वाट्सएप पर आए इस मैसेज ने लगाई आग

इंदौर के टाटपट्‌टी बाखल से बुधवार को एक वीडियो आया था जिसमें देखा गया था कि कुछ लोग डॉक्टरों पर पथराव कर रहे हैं। ये वीडियो उस समय वायरल हुई थी जब डॉक्टरों की टीम कोरोना संक्रमण जांच करने पहुंची थी। एक बार फिर गुरुवार को डॉक्टर और मेडिकल टीम प्रशासनिक अफसरों के साथ जांच के लिए वहांं पहुंची। उनमें डॉ तृप्ति कटारिया और डॉ जाकिया जांच के लिए पहुंची। इन दोनों को भी पथराव में चोटें आई थी।

जब टीम वहां पहुंची तो स्थानीय लोगों ने बुधवार की घटना के लिए माफी मांगी कि उनलोगों से गलती हो गई। इस दौरान एसपी, अपर कलेक्टर दिनेश जैन, टीआई, तहसीलदार और डॉक्टरों की टीम वहां मौजूद था। स्थानीय लोगों ने सभी डॉक्टरों से माफी मांगी। उन्होंने स्वीकारा कि हमसे और बच्चों से गलती हो गई। आप तो हमारी सुरक्षा के लिए आए हो। आप अपना काम करें, हम पूरा सहयोग करेंगे।

स्थानीय लोगों और डॉक्टरों के बीच हुई बातचीत का अंश:

डॉक्टर्स- हम जैसे ही यहां आए, 30 सेकंड में ही पत्थर आने चालू हो गए। शायद हम वापस ही नहीं जा पाते।
निवासी- यहां बच्चों से जो गलती हुई है, वह किसी गलतफहमी से हुई। ये छुटभैये नेताओं के कारण हुआ।
डॉक्टर्स- हमें पता है यहां पॉजिटिव मरीज आया, फिर भी जान पर खेलकर हम यहां आए।
निवासी- मैडम हम माफी मांगते हैं। आप बहन जैसी हैं। अब आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ देंगे। आज 12 दिन हो गए। हमारे बच्चों से थोड़ी-सी गलती हो गई। आप भी हमारी मदद कर रहे हैं, हमें मालूम है। जिन बच्चों ने किया, उन्हें थाने पर बैठा दिया है। पुलिस, प्रशासन हमारी बहुत मदद कर रहा है। फ्री दवाएं दे रहे हैं, कैंप लगा रहे हैं। पूरे मोहल्ले को घर से बाहर बुला-बुलाकर दवाई दे रहे हैं।
डॉक्टर्स- आप सभी ऐसे हाथ जोड़िए नहीं। और आप लोग थोड़ा-थोड़ा दूर खड़े रहें अभी भी। डिस्टेंस बनाकर ही रखें। हम तो सपोर्ट में ही हैं। हम पूरे सिस्टम के लिए बात कर रहे हैं। बस आप सहयोग करें, सब कुछ ठीक होगा।
निवासी- हम साथ हैं। अब शिकायत नहीं आने देंगे।

बुधवार का वायरल वीडियो

बुधवार को वायरल हुआ वीडियो 1 मिनट 12 सेकेंड का है। समय दोपहर के 1.30 बजे। ये इंदौर के सिलावटपुरा गांव का है। इस वीडियो में दो हैज़मेट सूट (कोरना के इलाज़ करने के लिए पहना जाने वाला मेडिकल कोट) पहने व्यक्ति एक गली से दौड़ते हुए बाहर निकल रहे हैं। उनके पीछे लोगों की भीड़ है। वीडियो में बहुत शोर हो रहा है। उन सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर फेंका जा रहा है। ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस घटना के बाद डॉक्टर्स से मीडियाकर्मी से बात हुई।

डॉक्टरों ने क्या कहा?

डॉ तृप्ति बहुत डरी हुई थी। उन्हें नहीं समझ आया कि सबकुछ ठीक चल रहा था। फिर अचानक से क्या हो गया। तृप्ति ने कहा, ”हम रैपिड रिस्पांस टीम में हैं और रोज कोरोना संक्रमित इलाकों में जा रहे हैं। दोपहर करीब डेढ़ बजे सिलावटपुरा क्षेत्र के टाटपट्टी बाखल में स्क्रीनिंग के लिए पहुंचे। मेरे साथ डॉ जाकिया, एक आशा कार्यकर्ता और दो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता थीं। हमें एक घर में कोरोना वायरस संदिग्ध मरीज होने की जानकारी मिली थी। दरवाजा खटखटाया तो एक महिला बाहर आई। हम जानकारी मांग रहे थे। महिला किसी और को बुलाने का बोलकर भीतर चली गई। अचानक सौ सवा-सौ लोग सामने से आए और चिल्लाने लगे, मारो-मारो। पत्थर मारना भी शुरू कर दिया। समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या? हम तो उनकी सेहत के लिए वहां गए थे। जान बचाते हुए बाहर की तरफ आए तो तहसीलदार गाड़ी लेकर हमारे पास आ गए। ये लोग समय से नहीं पहुंचते तो मुश्किल हो जाती।”

इंदौर के प्रमुख मेडिकल एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर प्रवीन जाडिया ने बताया, “कोविड-19 रैपिड मेडिकल टीम के कुल 6 लोग टाट पट्टी बाखल पहुंचे थे। जिनमें दो डॉक्टर, दो मेडिकल पैरा स्टाफ़ और आंगनवाड़ी आशा थीं। इस हमले में डॉक्टरों के पैर में चोट आई है हालांकि, सभी ठीक हैं। इस इलाक़े में अब तक दो कोरोना पॉज़िटिव मामले मिले हैं और 54 परिवारों को क्वारंटीन में रखा गया है।”

एफ़आईआर दर्ज

डॉक्टर्स ने आईपीसी की धारा 353 के तहत अज्ञात लोगों के नाम एफ़आईआर दर्ज कराई। पुलिस ने सीसीटीवी फ़ुटेज के ज़रिए 8-10 लोगों की शिनाख्त की। जिनमें 7 लोगों को गुरुवार दोपहर तक गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल चार पर कार्रवाई की गई है। मोहम्मद मुस्तफा, मोहम्मद गुलरेज, सोयब उर्फ शोभी और मज्जू उर्फ मजीद खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की गई है। इन चारों को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 के तहत इंदौर से बाहर केंद्रीय जेल, रीवा में रखने के आदेश दी गई।

वाट्सएप पर आया मैसेज

अब तक की सारी घटना से साफ है कि भीड़ ने डॉक्टर्स पर हमला किया। लेकिन अब वो सच आपको बताने जा रहे हैं जो अब तक सामने नहीं आया। यह घटना बुधवार के दोपहर का है। लेकिन इससे ठीक एक दिन पहले यानी मंगलवार को इंदौर में एक मैसेज व्हॉट्सएप पर वायरल हो रहा था। मैसेज कुछ इस तरह था-

“इस मैसेज में कहा जा रहा है कि मुसलमानों को फँसाया जा रहा है और मुसलमानों को कोरोना पॉज़िटिव इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। “साजिश मुसलमानों के खिलाफ जरूर पढ़े और आगे फॉरवर्ड करें बहुत बड़ी साजिश है करोना के नाम पर मुस्लिम बस्तियों से मुसलमानों को जांच के बहाने से ले जाया जा रहा है ले जाकर फर्जी पॉजिटिव रिपोर्ट बनाकर आइसोलेशन में रख रहे हैं अस्पताल में नहीं कहीं और ले जाकर इंजेक्शन लगा रहे हैं कोरोनावायरस ब्लड के और इंदौर में इतनी बड़ी आबादी है लेकिन सिर्फ मुसलमानों के ही नाम क्यों आ रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि मुसलमान को डरा दो बस और ले जाओ करुणा के नाम पर फंसा कर निपट रहे हैं अभी खबर मिली है कि मेरे रिश्तेदार डॉक्टर हैं उन्होंने बताया कि पॉजिटिव करके जब इंसान मरने की हालत में आ जाता है तो उसे जहर का इंजेक्शन देकर करो नाथ से मौत का कारण बताकर फेंका जा रहा है। संभल जाओ अगर कोई आपके इलाके में इलाज के लिए डॉक्टर या पुलिस वाला आता है तो उसको कहना कि जांच यही कर,यही रिपोर्ट लेकर आ अगर हम पॉजिटिव निकले तो अपने घर को अपने कमरे में लॉक कर लेंगे आइसोलेट कर लेंगे आप अपने को और कहीं कितना भी बोले जाना मत अल्लाह के वास्ते ध्यान से पढ़े पूरा पढ़ें और ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।”

इंदौर के एसपी इंदौर-वेस्ट महेश चंद और स्वास्थ्य अधिकारी प्रवीन जादिया ने इस मैसेज को लेकर बताया कि ऐसे मैसेज वायरल हुए थे और इस तरह के फ़ेक मैसेज लोगों को प्रशासन के खिलाफ़ भड़काने का काम करते हैं। इंदौर के स्थानीय पत्रकार आदिल सईद बताते हैं कि टाटपट्टी बाखल इलाका शहर से पांच किलोमीटर की दूसरी पर है। लेकिन यहां की आबादी काफ़ी पिछड़ी हुई है। ज़्यादातर मज़दूर और कारीगर का काम करने वाले यहां रहते हैं। यहां लोगों के बीच फ़ेक न्यूज़ खूब फैलती है क्योंकि कोई पढ़ा लिखा नहीं है।

You may also like

MERA DDDD DDD DD