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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कृषि कानूनों पर चार हफ्ते में जबाब दे केंद्र 

पिछले महीने  मानसून सत्र के दौरान संसद में  किसान विधेयकों को लेकर भारी विरोध -प्रदर्शनो के बावजूद  सरकार ने  कृषि विधेयक ‘कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020’ पारित कर दिये  थे । जिसके बाद विपक्षी दलों ने इन विधेयकों का विरोध करते हुए इन्हें किसानों के लिए बेहद नुकसानदायक करार दिया था ।इसके  बाद सड़क पर किसान  और संसद में नेता तीन विधेयकों को लेकर हाय-तौबा कर रहे हैं। इस बीच कई राज्यों में किसान विधेयकों का जोर -शोर विरोध प्रदर्शन किया।

लेकिन राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करने के बाद इन विधेयकों ने कानून का रूप ले लिया। कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर आज  कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इन बिलों को चुनौती देने वाली इन याचिकाओं पर कोर्ट ने केंद्र से चार हफ्तों के भीतर  जवाब देने को कहा है।केरल में कांग्रेस से सांसद टीएन प्रथापन ने कृषि कानून के विभिन्न प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। केरल के त्रिशूर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद टीएन प्रथापन ने इन बिलों को लेकर आरोप लगाया था कि यह किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम 2020 द्वारा समानता का अधिकार व भेदभाव का उल्लंघन है। कांग्रेस सासंद ने कहा था कि कानून जिसे राष्ट्रपति की सहमति दी गई वह असंवैधानिक, अवैध और शून्य के रूप में माना जा सकता है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कृषि कानून का विरोध करते हुए इसे किसानों के लिए काला कानून बताया है। पार्टी के महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने  प्रेसवार्ता में इस कानून का विरोध किया और घोषणा की कि राज्य में किसी भी कीमत पर इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा। इससे किसानों की किसानी मर जाएगी और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ऐसा नहीं होने देगा। उन्होंने कहा कि जिस राज्य में भाजपा का शासन है, वहां के किसान भी इस कानून का विरोध कर रहे हैं। पूरे देश में इस काला कानून का विरोध हो रहा है।

बता दें कि केंद्र की तरफ से लाए गए कृषि कानूनों का कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दल विरोध कर रहे हैं। इसके चलते पिछले दिनों कानूनों के विरोध में देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन भी किए गए। पंजाब में किसानों ने रेलवे ट्रैक पर बैठकर अपना विरोध जताया तो वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्रैक्टर पर बैठकर पंजाब में रैली निकाली। इसके अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और हरियाणा समेत विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन किए गए।

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