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शराब की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह राज्यों का नीतिगत मसला है

सुप्रीम कोर्ट में देश का नाम बदल इंडिया करने की याचिका पर आज होगी सुनवाई

कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच कई राज्य सरकारों ने शराब की बिक्री शुरू कर दी है। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित यचिका में कहा गया कि शराब की बिक्री के कारण दुकानों में लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं, इस वजह से कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इन दुकानों को बंद किया जाना चाहिए।

लेकिन याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए शुक्रवार को कहा कि यह राज्यों का नीतिगत मसला है और वे होम डिलिवरी या ऑनलाइन व्यवस्था कर रहे हैं।

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस कौल ने कहा कि राज्य सरकारें शराब की होम डिलिवरी के बारे में सोच रही हैं। आर्टिकल-32 याचिका के जरिए आप हमसे क्या चाहते हैं?

इस पर वकील साईं दीपक ने कहा कि मैं चाहता हूं कि आम आदमी की जिंदगी शराब की दुकानें खुलने के कारण प्रभावित न हो। इस पर जस्टिस भूषण ने कहा कि हम कोई आदेश नहीं करते हैं, लेकिन राज्य सरकारें लोगों को अप्रत्यक्ष बिक्री या होम डिलिवरी को लेकर सोचें। इससे सोशल डिस्टेंसिंग बनी रही रहेगी। यह राज्य सरकारों का नीतिगत मसला है।

दुनिया में कोरोना वायरस से अब तक 39 लाख 16 हजार 338 लोग संक्रमित हैं। दो लाख 70 हजार 711 की मौत हो चुकी है, जबकि 13 लाख 43 हजार 54 ठीक हो चुके हैं।

डब्ल्यूएचओ ने गुरुवार को कहा कि संक्रमण से अगर सख्ती से नहीं निपटा गया तो अफ्रीका में 83 हजार से एक लाख 90 हजार तक जान जा सकती है।

पहले साल में 2.9 करोड़ से 4.4 करोड़ लोग संक्रमित हो सकते हैं। संगठन ने अपनी नई स्टडी में इसका खुलासा किया है। इसे कई आधार पर तैयार किया गया है।

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