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मुंडन के बालों की तस्करी से आंद्रा की राजनीति में आया उबाल 

आंध्र प्रदेश के चित्तूर ज़िले में स्थित तिरुपति बालाजी दुनिया के सबसे अमीर  मंदिरों में एक  है। इस मंदिर के पास  लगभग 11 अरब डॉलर यानी क़रीब 8 ख़रब रुपये की कीमत का सोना मौजूद है।  साल 2018-19 में मंदिर की अनुमानित आय थी 29 अरब रुपये। आपको शायद यकीन न हो, लेकिन इस आय का  10 फीसदी  हिस्सा कैसे आता है यह जानकार आप भी चौंक सकते हैं। इन दिनों इसी चौंका देने वाली आय को लेकर राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है। कहा जा रहा है कि यहां इंसानी बालों की तस्करी हो रही है। भारत की प्राचीन परंपरा और संस्कृति के अनुसार, कभी भगवान को खुश करने के लिए तो कभी कोई मन्नत पूरी हो जाने पर श्रद्धालु यहां आकर मुंडन करवाते हैं। अब यहां से ख़बरें आ रही हैं कि  इन बालों को  बेचकर करोड़ों रुपयों की कमाई  हो रही है। हालांकि मुंडन के इन बालों का व्यापार केवल तिरुपति में ही नहीं होता। चेन्नई के श्री भवानी अम्मन मंदिर में महिलाएं भगवान को खुश करने के लिए मुंडन कराती हैं। इसकी वजह से हर साल इस मंदिर में तीन टन से ज़्यादा बाल इकट्ठा हो जाते हैं। एक वक़्त था, जब मुंडन में उतरे बालों को जला दिया जाता, लेकिन अब बाक़ायदा इनकी नीलामी की जाती है।

इंसानी बालों का यह क़ारोबार सिर्फ गांव-क़स्बों तक सीमित नहीं। 9 अरब डॉलर की इंडस्ट्री है यह और दुनियाभर में फैली है। ह्यूमन हेयर एंड हेयर प्रॉडक्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया के सदस्य सुनील ईमानी कहते हैं, ‘इंसानी बालों की इंडस्ट्री में बड़ी हिस्सेदारी है भारत की। 80-90 प्रतिशत कच्चा माल भारत से ही जाता है। दुनियाभर में हम ह्यूमन हेयर और हेयर प्रॉडक्ट़्स एक्सपोर्ट करते हैं। इस बिज़नेस का सालाना टर्नओवर है ढाई से तीन हज़ार करोड़ रुपये। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और कोलकाता इस इंडस्ट्री के गढ़ हैं। हालांकि अब यह इंडस्ट्री कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैल चुकी है।’

इंसानी बालों के इस क़ारोबार में इतना पैसा है कि सोने-चांदी की तरह इसकी भी स्मगलिंग होने लगी है। दरअसल, भारतीय बाल मुख्य रूप से चीन, अमेरिका, यूरोप और मिडिल ईस्ट एक्सपोर्ट किए जाते हैं। चीन, कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार जैसे देश इस मामले में भारत के प्रतिद्वंद्वी हैं। भारतीय बालों की क्वालिटी अच्छी होने की वजह से बाज़ार में इनकी मांग ज़्यादा है, लेकिन म्यांमार से कच्चे भारतीय बालों की तस्करी की जाती है और इन्हें सरहद पार भेजा जाता है।

 भारत और म्यांमार सीमा पर दो महीने पहले पकड़े गए इन्हीं मुंडन के बालों की खेप के मुद्दे ने आंध्र प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। आशंका है कि ये बाल तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) से तस्करी किए जा रहे थे।  ये मंदिर लोगों की भावनाओं से भी जुड़ा है। अब बालों की तस्करी को लेकर श्रद्धालुओं में भी चर्चा होने लगी है।  पकड़े गए बालों की क़ीमत करीब 1.8 करोड़ रुपये आंकी गई है। सवाल पूछा जा रहा है कि तस्करी का पता चलने के बाद अधिकारियों ने क्या किया? सवाल ये भी है कि तिरुमला में कुछ सोशल मीडिया अकाउंट और एक टीवी चैनल के ख़िलाफ़ मुक़दमा क्यों दर्ज किया गया है?

मुंडन के ये बाल दो महीने पहले पकड़े गए थे। असम राइफल्स की एक सर्च पार्टी ने बालों की ये खेप मिजोरम से लगी म्यांमार सीमा पर पकड़ी थी , लेकिन इस पर चर्चा अब ज्यादा हो रही है। आमतौर पर इस इलाक़े में सोने और जंगली जानवरों की तस्करी की जा जाती है, लेकिन पहली बार सुरक्षाबलों को इंसान के बालों से भरी 120 बोरियां मिली थी।  हर बोरी में करीब पचास किलो बाल थे. इसकी बरामदगी को लेकर विवाद भी हुआ।

बीस मार्च को जारी किए गए असम राइफल्स के एक  अधिकारिक बयान में ये कहा गया है कि सुरक्षाबलों ने बालों की ये खेप एक ट्रक से पकड़ी थी। कुछ अधिकारियों ने मीडिया को बताया था कि ट्रक चला रहे ड्राइवरों ने दावा किया था कि ये बाल तिरुपति से लाए जा रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक ड्राइवर ने कहा था कि उसे एज़वाल की एक मारूयति नाम की महिला ने तिरुपति से बाल लाने का ठेका दिया था। ट्रक के ड्राइवर मुंगयान सिंह से पुलिस ने कड़ी पूछताछ की थी।  ये ट्रक भारतीय सीमा के 7 किलोमीटर भीतर पकड़ा गया था।  अधिकारियों का कहना था कि ट्रक से जब्त बालों की कीमत 1.8 करोड़ रुपये तक हो सकती है।

भारत से ये बाल तस्करी करके म्यांमार ले जाए जाते हैं फिर ये थाईलैंड पहुंचते हैं जहां इन्हें तैयार करके चीन भेज दिया जाता है। अधिकारियों के मुताबिक चीन में इन बालों के विग बनाए जाते हैं और फिर इन्हें दुनिया भर के बाज़ारों में भेजा जाता है। बाज़ार पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों के मुताबिक विग बनाने के 70 फ़ीसदी कारोबार पर चीन का क़ब्ज़ा है. सिर के बालों का बाज़ार दुनिया भर में है। ख़ासकर भारत में कुछ मंदिरों में बाल चढ़ाए जाने की प्रथा है। इस वजह से यहां बाल आसानी से उपलब्ध रहते हैं।  विग कारोबार के लिए कच्चा माल भारत से ही जाता है।

भारत में सिर के बाल सबसे ज्यादा तिरुपति मंदिर में ही दान किए जाते है।  यहां रोज़ाना औसतन पचास हज़ार श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। इनमें से कम से कम एक तिहाई यहां अपने बालों का दान करते हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 में टीटीडी को बालों से 131 करोड़ रुपये की आय हुई।  टीटीडी का सालाना बजट क़रीब तीन हज़ार करोड़ रुपये का रहता है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक टीटीडी को टिकटों की बिक्री के अलावा मुंडन के बालों की बिक्री से भी अच्छी आय होती है।

सबसे ज्यादा बाल बेचता है टीटीडी

पहले तिरु्मला में हर महीने होने वाली नीलामी में मुंडन के बालों की बिक्री होती थी।  बालों को तिरुमला से तिरुपति के भंडार केंद्र ले जाया जाता है।  फिर बालों के रंग और लंबाई के हिसाब से उनकी नीलामी की जाती है।  बालों को पांच श्रेणियों में बांटा जाता है. लंबे बालों के अधिक पैसे मिलते हैं। टीटीडी ने आधिकारिक बयान में बताया था कि साल 2019 में उसे बालों की बिक्री से 74 करोड़ रुपये की आय हुई थी। दिसंबर 2019 में 54,500 किलो बाल 37.26 करोड़ रुपये में नीलाम हुए थे. अब पता चला है कि बालों की नीलामी तीन महीनों में एक बार ही होती है।

विवाद क्या है?

विपक्षी तेलुगूदेशम पार्टी का कहना है कि टीटीडी के अधिकारियों को म्यांमार की सीमा से मुंडन के बाल पकड़े जाने की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए।  बंडारु सत्यनारायण मूर्ति ने कहा कि इस मामले की जांच कर ज़रूरी कार्रवाई की जानी चाहिए।उन्होंने कहा, “टीटीडी में इतनी गोपनीयता क्यों है? टीटीडी के अधिकारी कहते हैं कि लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़े इस मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है।  ये शर्मनाक है।  क्या अधिकारियों को उन संस्थाओं के बारे में पता नहीं हैं जिन्होंने बाल ख़रीदने का ठेका लिया था? क्या उन्हें नहीं पता कि ये लोग बाल ख़रीद कर उनका क्या करते हैं।  क्या बिना पूरी जांच पड़ताल के ही ठेका दे दिया गया था? टीटीडी प्रशासनकि समिति को तुरंद रद्द करके संबंधित अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जानी चाहिए। बीते दो सालों से टीटीडी कई विवादों में फंस चुकी है।  अब मुंडन के बालों को लेकर इस नए विवाद ने विवाद को और बढ़ा दिया है।  टीटीडी का कहना है कि इस मामले में संबंधित खरीदार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

टीटीडी की शिकायत

टीटीडी ने शुरू में कहा था कि एक बार नीलामी में ठेका दिए जाने के बाद उन्हें नहीं पता होता कि बालों को कहां बेचा जाता है, लेकिन बाद में टीटीडी ने कहा है कि यदि तस्करी करने वाली कंपनियों के नाम पता चलेंगे तो उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। वहीं सोशल मीडिया पर ये दावे भी किए जा रहे हैं कि टीटीडी के ज़रिए ही बालों की तस्करी हुई है।  आंध्र प्रदेश के विजिलेंस विभाग ने इस संबंध में शिकायतों का संज्ञान भी लिया है।  सीपीएम नेता और टीटीडी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी यूनियन के नेताओं का कहना है कि टीटीडी की आय में कमी और तस्करी के बीच संबंध की खोज की जानी चाहिए।

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