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चांदनी चौक के प्राचीन हनुमान मंदिर टूटने पर गरमाई सियासत

दिल्ली के चांदनी चौक में 60 साल पुराना हनुमान मंदिर टूटने को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। इसे लेकर आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी एक-दूसरे पर हमलावर हैं। आम आदमी पार्टी ये कहकर भाजपा को घर रही है कि एमसीडी में भाजपा की सत्ता है। एमसीडी ने ही री-डेमवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए मंदिर को तोड़ा। एमसीडी में सत्तासीन भाजपा इसके लिए जिम्मेदार है। दूसरी तरफ भाजपा इसके लिए दिल्ली सरकार को दोषी मान रही है, तो कांग्रेस एमसीडी और दिल्ली सरकार दोनों को दोषी ठहरा रही है। कांग्रेस के निशाने पर भाजपा और आप दोनों हैं। भाजपा के लिए दिक्कत यह है कि विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों ने भी चांदनी चैक पहुंचकर प्रदर्शन किया।

दरसल चांदनी चौक का री-डेवलपमेंट हो रहा है। इसी कड़ी में फुटपाथ का भी री-डेवलपमेंट होना था। जिस फुटपाथ का री-डेवलपमेंट होना था उसी फुटपाथ पर प्राचीन हुनमान मंदिर आड़े आ रहा था जिसको हाईकोर्ट के आदेश के बाद तोड़ दिया गया हैं इस पर अब राजनीति शुरू हो गई है। पूरी घटना 4 जनवरी को सुबह चार बजे चांदनी चैक पर बने मंदिर को कोर्ट के आदेश पर हटाने के बाद शुरू हुई द्य जहां मंदिर तोडा गया वहा सुबह सबसे पहले अरविंद केजरीवाल की पार्टी के कार्यकर्ता मंदिर वहीं बनाएंगे का नारा लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे। इसके ठीक 24 घंटे के भीतर जहां मंदिर टूटा वहां फिर नया प्रदर्शन होने लगा। इस बार भगवा झंडे के साथ क्रोधित हनुमान जी की तस्वीर लिए वीएचपी, बजरंग दल के कार्यकर्ता पहुंच गए, और ‘ये भी मंदिर वहीं बनाएंगे’ का नारा लगाने लगे।

मंदिर तोड़े जाने को लेकर बीजेपी इसके लिए दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराती रही है तो आम आदमी पार्टी बीजेपी के नेतृत्व वाली एमसीडी को दोषी करार दे रही है, वहीं दिल्ली कांग्रेस ने मंदिर तोड़े जाने को लेकर बीजेपी के नेतृत्व वाले नगर निगम और दिल्ली सरकार दोनों को जिम्मेदार ठहराया है। आम आदमी पार्टी के विधायक दुर्गेश पाठक ने कहा कि नार्थ एमसीडी ने हाई कोर्ट में बोला कि टेंपल तोड़ने को तैयार हैं, टेंपल तोड़ा नार्थ एमसीडी ने, किसको बेवकूफ बना रहे हैं, आप फंस चुके हैं, इस बात को मानिए कि आपने मंदिर तोड़ा। दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि विधायक सौरभ भारद्वाज सहित आम आदमी पार्टी के विभिन्न नेता लगातार दो दिन से हनुमान मंदिर को तोड़े जाने पर झूठ बोल रहे हैं। बीजेपी ने शुरू से ही चांदनी चैक विकास परियोजना का विरोध किया था। क्योंकि हम जानते थे की इसमें जहां मंदिर एवं गुरुद्वारा परिसरों में तोड़ फोड़ होगी तो वहीं क्षेत्र का थोक व्यापार भी यातायात प्रतिबंधों से प्रभावित होगा।

हनुमान मंदिर को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साध रहे आप-बीजेपी दोनों को इस मुद्दे पर कांग्रेस ने आड़े हाथों लिया है. प्रदेश अध्यक्ष अनिल चैधरी ने कहा कि दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं लेकिन सच ये है कि दिल्ली सरकार की सहमति से ही उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने मंदिर को हटाया है।
वहीं दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि चांदनी चैक में प्राचीन हनुमान मंदिर के मुद्दे पर दिल्ली सरकार की धार्मिक समिति दोबारा समीक्षा करे। डेवेलमेंट प्लान को री-डिजाइन करें और प्राचीन हनुमान मंदिर को पुनः स्थापित करने की अनुमति प्रदान की जाए।

राजनीतिक पार्टियां से हटकर आम लोगों या विकास चाहने वालों की राय है कि विकास का कार्य छोड़ मंदिर के नाम पर राजनीती करने वाले राजनितिक दलों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी ध्यान रखना चाहीये 29 सितंबर 2009 जब देश की सर्वोच्च अदालत ने सभी राज्यों को निर्देश देते हुए कहा था कि धर्म और भगवान के नाम पर कोई भी अवैध धार्मिक स्थल सड़क, पार्क या दूसरी सार्वजनिक जगह पर नहीं खड़ा किया जा सकता। अप्रैल 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सभी को पैदल चलने का अधिकार है. भगवान कभी किसी के पैदल चलने के रास्ते में बाधा खुद नहीं बनना चाहते।

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