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यूपी में प्रियंका की सक्रियता के मायने 

 

तमाम कमजोरियों, चुनौतियों और चिंताओं के बीच प्रियंका की उत्तर प्रदेश में सक्रियता ने न केवल पार्टी में बल्कि विपक्षी दलों में नयी जान फूंकने का काम किया है। प्रियंका ने बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। बड़ी तेजी से वह यूपी में नये सिरे से पार्टी के गठन पर काम कर रही हैं। फिलवक्त जमीन और सोशल मीडिया खासकर ट्विटर के प्लेटफार्म पर प्रियंका की सक्रियता ने योगी सरकार की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं।

 

राजनितिक पंडितो का मानना है कि चुनाव में मिले सबक और नतीजों से प्रियंका को एक बात तो अच्छी तरह समझ में आ गयी है कि यूपी में मजबूत हुए बिना देशभर में मजबूत नहीं हुआ जा सकता है। शायद प्रियंका ने इसी दिशा में उत्तर प्रदेश में कदम बढ़ा दिये हैं। इसके चलते चर्चा है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को जल्द ही यूपी के सीएम के चेहरा के रुप में मैदान में उतारा जा सकता है। हालांकि विधानसभा चुनाव 2022 में होने हैं लेकिन कांग्रेस ने अभी से इसकी तैयारी शुरु कर दी है। प्रियंका गांधी अभी से ही कांग्रेस के संगठन से लेकर बूथ स्तर तक रणनीति बनाने में जुटी हुई हैं। 

 

पार्टी के नेतृ्त्व का इस मामले में मानना है कि कांग्रेस को सवर्णों और मुस्लिम वोटरों को साधकर भाजपा के विकल्प के रुप में अभी से ही प्रस्तुत करना चाहिए। कहा जा रहा है कि इससे कांग्रेस को एक फायदा मिलेगा जो भी सवर्ण नेता पार्टी से नाराज होकर बाहर गए हुए हैं, वह भी पार्टी में वापसी कर सकते हैं।

इसी को देखते हुए कांग्रेस नेतत्व ने अभी से ही प्रियंका गांधी को यूपी की सरजमीं पर गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कहा है।  इसलिए प्रियंका उत्तर प्रदेश में फ़िलहाल कोई भी बड़ा मुद्दा हाथ से जाने नहीं दे रही है।  फिर वो चाहे सोनभद्र का नर’संहार कांड हो या उन्नाव कांड या पिछले दिनों हुआ स्वामी चिन्मयानंद प्रकरण। प्रदेश में कानून व्यवस्था का मामला हो या बिजली के बिलो में मूल्य वृद्धि, सभी मुद्दों को प्रियंका हाथों-हाथ ले रही है।

बहरहाल ,लोकसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व अगर यूपी से देखा जाए तो बिल्कुल साफ दिखाई देता है। सिर्फ रायबरेली की सीट ही कांग्रेस के पास है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पहले कांग्रेस को यूपी में अकेले दम पर खड़ा करना होगा। इसके बाद ही केंद्र की सत्ता की ओर देखा जा सकता है।

 

सूत्रों के मुताबिक आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी। पार्टी का प्रयास रहेगा कि सपा और बसपा दोनों ही पार्टियों को यूपी में समाप्त किया जाए, जिससे भाजपा के विकल्प के रुप में लोग कांग्रेस को देखें।

 

कांग्रेस ने ये भी तय कर लिया है कि इन चुनावों में चुनाव संचालन समिति का अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद के लिहाज से प्रियंका गांधी को ही दावेदार बनाया जायेगा। हो सकता है इसकी चुनाव से पहले ही घोषणा कर दी जाए। फिलहाल उत्तर प्रदेश में होने वाले 11 विधानसभा उपचुनावों में कांग्रेस को जीत की और ले जाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए दो दिन पूर्व प्रियंका ने दिल्ली में उत्तर प्रदेश के पार्टी के वरिष्ठ नेताओ के साथ गहन मंत्रणा की है।

बता दें कि 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस तब की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरी थी। यह गठबंधन फेल रहा और भारतीय जनता पार्टी ने तीन सौ से अधिक सीटें जीत कर प्रदेश की सत्ता में वापसी की। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश और ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी का दायित्व सौंपा और अकेले चुनाव मैदान में उतरी।

लेकिन इसका मतदाताओं में ज्यादा असर नहीं हुआ। नतीजा यह निकला कि 2014 में जीती गांधी परिवार की दो सीटें भी पार्टी बरकरार नहीं रख पाई और राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को अमेठी में मात मिली।  इसके बाद से ही कांग्रेस एक तरह से पुनर्गठन के दौर से गुजर रही है। पार्टी को फ़िलहाल करिश्माई चेहरे की जरुरत है। और घूमफिरकर कांग्रेसी कार्यकर्ताओ को यह चेहरा प्रियंका का ही दिखाई दे रहा है। इसके मद्देनजर ही कांग्रेसी प्रियंका का नाम उत्तर प्रदेश के खेवनहार के रूप में तलाश रहे है।

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