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कोरोना वैक्सीन लेने वाले वाॅलियटर की मौत से दुखी हैं परिजन

देश में विकसित कोरोना वैक्सीन ने नई उम्मीदें जगाई हैं, लेकिन इन उम्मीदों के साथ ही आशंकाएं और गलतफहमियां भी पैदा हो रही है कि कहीं वैक्सीन असुरक्षित तो नहीं होगी। मध्य प्रदेश के भोपाल में कोरोना वैक्सीन लेने वाले एक वाॅलियटर की मौत को लेकर इसी तरह की आशंकाएं और गलतफहमी हुई तो राज्य सरकार को आगे आकर स्पष्ट करना पड़ा कि मौत वैक्सीन से नहीं, बल्कि जहर से हुई। दरअसल, भोपाल में कोवैक्सीन लेने के 9 दिन बाद एक वाॅलंयि दीपक मारवी की मौत हो गई। इस पर दीपक के परिजनों ने वैक्सीन को लेकर सवाल उठाए हैं। टीला जमालपुरा स्थित सूबेदार काॅलोनी में मृतक के परिवार से मिलने 9 जनवरी को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पहुंचे। मृतक की पत्नी ने पूर्व मुख्यमंत्री को कहा कि उनकी बिना इजाजत के उनके पति को टीका क्यों लगाया गया। मरावी की पत्नी ने कहा कि उनके पति को किसी तरह की कोई बीमारी नहीं थी। टीका लगाने के बाद उनकी मौत हुई है। मृत्यु के बाद शासन- प्रशासन आज तक उनसे मिलने तक नहीं आया।

दिग्विजय सिंह ने मृतक के परिवार को दिलासा देते हुए कहा कि वे उसके परिवार की मदद करेंगे। स्व. दीपक मरावी के छोटे बेटे पवन के दिल में छेद है। इनका इलाज होना है। पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत बाॅयोटेक के टीके कोवेक्सीन के परीक्षण के बाद ही दीपक मरावी की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि मैं निंदा करता हूं चिकित्सा शिक्षा मंत्री की, जिन्होंने इस मामले को उठाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रचना को टुकड़े- टुकड़े गैंग का सदस्य बताया। पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने सवाल उठाया कि इस तरह गरीब लोगों पर ही क्यों टीके का परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण के बाद उन पर कोई निगरानी नहीं रखी जा रही? तो फिर परीक्षण क्यों किया गया? वे पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं और उनकी हरसंभव मदद की जाएगी।

भोपाल के ‘पीपुल्स मेडिकल काॅलेज’ में 12 दिसंबर को कोवैक्सीन का ट्रायल टीका लगवाने वाले 47 वर्षीय वालंटियर दीपक मरावी की 21 दिसंबर को मौत हो गई। मरावी टीला जमालपुरा, सूबेदार कालोनी में अपने घर में मृत पाए गए थे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने 22 दिसंबर को उनके शव का पोस्टमार्टम कराया। जांच में शव में जहर मिलने की पुष्टि हुई है। मौत कोवैक्सीन का टीका लगवाने से हुई या किसी अन्य कारण से, इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। दीपक के शव का विसरा पुलिस को सौंप दिया गया है। भारत बायोटेक और आईसीएमआर द्वारा बनाई गई स्वदेशी कोरोना वैक्सीन (कोवैक्सीन) का 7 जनवरी को फाइनल ट्रायल पूरा हो गया है।

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