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रोचक होगा राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव  

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की ओर से गैर भाजपा दलों को एकजुट कर सशक्त विकल्प बनाने की बातें होती रही हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी विपक्षी पार्टियों का महागठबंधन बनाने की कोशिशें हुई। कांग्रेस इस प्रयास में खासतौर पर सक्रिय रही। लेकिन गठबंधन का नेतृत्व कौन करे, इस सवाल के चलते एकजुटता नहीं हो पाई। अब एक बार फिर राज्य सभा के उपसभापति चुनाव के बहाने विपक्ष की एकता की बातें हो रही हैं, ऐसे में देखना होगा कि क्या सचमुच केंद्र की भाजपा सरकार के लिए कोई बडी चुनौती खड़ी हो सकेगी। 

गौरतलब है कि राज्यसभा में उपसभापति पद के लिए 14 सितंबर को चुनाव होगा। इसी दिन से संसद का मानसून सत्र भी शुरू होगा। सबसे बडी़ विपक्षी पार्टी कांग्रेस राज्य सभा उपसभापति के चुनाव को लेकर खास दिलचस्पी ले रही है। बताया जाता है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में हुई रणनीतिक समूह की डिजिटल बैठक में यह भी फैसला लिया गया है कि उप सभापति पद के लिए विपक्ष का उम्मीदवार खड़ा किया जाए और इसके लिए संप्रग के घटक दलों और समान विचारधारा वाले दलों को साथ लेने के प्रयास किये जाएं। अब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया है, तो देखना होगा कि कांग्रेस और तमाम विपक्षी पार्टियां उन्हें एकजुट होकर सहयोग दे पाएंगी या नहीं।
विपक्ष के उम्मीदवार के तौर पर सांसद मनोज झा सफल हो पाते हैं या नहीं, यह अभी कहा नहीं जा सकता, लेकिन फिलहाल उनकी दावेददारी से यह चुनाव  काफी रोचक हो गया है। दरअसल, मनजो झा के सामने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राज्यसभा सांसद हरिवंश प्रसाद सिंह एनडीए उम्मीदवार के तौर पर हैं। दोनों ही उम्मीदवार बिहार से हैं, तो मुकाबला इस दृष्टि से भी रोचक बन गया है कि इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले बिहार  की दो बड़ी पार्टियों के प्रत्याशी राज्यसभा में आमने-सामने हैं। जाहिर है कि राज्यसभा उपसभापति चुनाव की लड़ाई जदयू बनाम राजद हो गई है।यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषक उपसभापति के चुनाव को बिहार विधानसभा चुनाव की रिहर्सल या सेमीफाइनल के तौर पर भी देखने लगे हैं। अगर विपक्षी दलों की एकजुटता रंग लाइ तो सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के लिए यह चुनाव बड़ी चुनौती बन जाएगा।

चुनावी समीकरणों पर गौर करें तो  राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं। इनमें से 116 सांसद एनडीए के हैं। इसके अलावा एनडीए को बीजू जनता दल (बीजद), वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र समिति सहित अन्य दलों से समर्थन मिलने की संभावना है। ऐसे में एनडीए उम्मीदवार की जीत की संभावना  ज्यादा है।

एनडीए के उम्मीद्वार हरिवंश प्रसाद पहले भी 2018 में एक बार राज्यसभा के उपसभापति चुने जा चुके हैं। एनडीए के उम्मीदवार के रूप में उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार बीके हरि प्रसाद को हराया था। उस समय हरिवंश को 125 वोट मिले थे, जबकि बीके हरिप्रसाद को 105 वोट मिले थे।अब देखना है कि इस बार विपक्ष की एकजुटता की मुहिम क्या रंग लाती है।

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