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दुनिया की सबसे प्रभावशाली वैक्सीन का असर घटा: स्टडी

कोरोना से बचाव में कोरोना वैक्सीन को एक हथियार के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन वैक्सीनेशन के इस दौर में दुनिया की सबसे प्रभावशाली वैक्सीन को बड़ा झटका लगा है।

दरअसल दुनिया की सबसे प्रभावी कोविड-19 वैक्सीन फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन की छह महीने बाद प्रभावशीलता में बड़ी कमी देखी है। एक अध्ययन के मुताबिक, फाइजर की दोनों खुराक लेने के बाद संक्रमण को रोकने में जो टीका 88 फीसदी कारगर था, वह छह महीने बाद घटकर 47 फीसदी पर आ गया है। यानी सिर्फ छह महीने में दुनिया के सबसे प्रभावी टीके का असर 41 फीसदी तक कम हो गया।

यह अध्ययन लैंसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के अनुसार, अस्पताल में भर्ती होने और संक्रमण से होने वाली मौतों को रोकने में टीके की प्रभावशीलता छह महीने तक 90% के उच्च स्तर पर रही। यह डेटा बताता है कि यह गिरावट अधिक संक्रामक रूपों के बजाय कम प्रभावकारिता के कारण है।

फाइजर और कैसर परमानेंट ने दिसंबर 2020 और अगस्त 2021 के बीच कैसर परमानेंट दक्षिणी कैलिफोर्निया में लगभग 3.4 मिलियन लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड की जांच की। इस अध्ययन के बारे में फाइजर वैक्सीन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और वरिष्ठ उपाध्यक्ष लुई जोदर ने कहा कि हमारे संस्करण-विशिष्ट विश्लेषण यह दर्शाता है कि फाइजर वैक्सीन कोरोना के डेल्टा सहित सभी चिंताजनक रूपों के खिलाफ प्रभावी है।

अध्ययन में कहा गया है कि फाइजर वैक्सीन के एक महीने बाद यह डेल्टा संस्करण के खिलाफ 93 प्रतिशत प्रभावी था, लेकिन चार महीने बाद यह घटकर 53 प्रतिशत रह गया। जबकि अन्य वेरिएंट की तुलना में प्रभावशीलता 97 प्रतिशत से घटकर 67 प्रतिशत हो गई।

कैसर परमानेंटे दक्षिणी कैलिफोर्निया के अनुसंधान और मूल्यांकन विभाग के साथ अध्ययन प्रमुख लेखक सारा टार्टॉफ का कहना है कि इससे पता चलता है कि डेल्टा एक प्रकार नहीं है जो टीका को चकमा दे सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो शायद हमें टीकाकरण के बाद उच्च सुरक्षा नहीं मिलती।

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